महाराष्ट्र में ठाणे जिले के मुंब्रा वार्ड में ‘हिजाब वाली’ सहर यूनुस शेख ने नगर निगम चुनाव जीता है। AIMIM के टिकट से नई पार्षद बनीं। 22 साल की सहर शेख ने जीत के बाद थैंक्यू स्पीच दी, जो कोई आम भाषण तो बिल्कुल भी नहीं था। मंच से सहर शेख ने कहा कि पूरे मुंब्रा को ‘ग्रीन’ (हरा) रंग से रंगना है। सहर की इस स्पीच का वीडियो वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया में चर्चा पर बने हुए इस वायरल वीडियो में सहर शेख कहती है, “आने वाले 5 साल बाद भी जब चुनाव होंगे, तो उस चुनाव में भी विरोधियों को मुँहतोड़ जवाब देना है। पूरे मुंब्रा को ग्रीन कलर से ऐसे रंगना है कि इन लोगों को यहाँ से बुरी तरह से पछाड़कर भेजना है। हर एक उम्मीदवार सिर्फ AIMIM का आएगा।”

AIMIM पार्षद सहर शेख के इस बयान को लेकर जहाँ एक तरफ बहस छिड़ी हुई है। वहीं इस बयान के कई मायने भी निकाले जा रहे हैं। खासकर यहाँ ‘ग्रीन’ शब्द को किस संदर्भ में इस्तेमाल किया गया है, यह अब भी सवालों के घेरे में ही है। इस ग्रीन का मतलब क्या लोगों को इस्लाम से जोड़ना है, क्या यहाँ धर्म परिवर्तन की बात हो रही है? क्या मुंब्रा की नई पार्षद सिर्फ हरा-हरा देखना चाहती हैं? जवाब जानने के लिए लोग इसके क्या मायने निकाल रहे हैं, यह जानना जरूरी है।

सोशल मीडिया पर सहर शेख के ‘ग्रीन’ बयान पर प्रतिक्रिया

सहर शेख के इस बयान को सोशल मीडिया पर कुछ लोग हिंदुओं का नामोनिशान हटाने की चेतावनी बता रहे हैं, कोई मुंब्रा को मुस्लिम बहुल इलाका बनने पर चिंता व्यक्त कर रहा है, तो कोई यहाँ ‘ग्रीन’ का मतलब इस्लाम के ‘हरे’ रंग से जोड़कर देख रहा है।

इस बयान पर शिवसेना नेता शाइना एनसी ने कहा है, “सहर शेख युवा नेत्री हैं, वे मुंब्रा में कहती हैं कि वह मुंब्रा को हरा कर देंगी। आपको यह साफ करना चाहिए कि आप पर्यावरण की बात कर रही हैं, जहाँ आप हरा-भरा, साफ-सुथरा माहौल चाहती हैं। अगर ऐसा है, तो आपका बयान स्वीकार्य है। लेकिन अगर आप धर्म, जाति और संस्कृति के आधार पर लोगों को बांट रही हैं, तो यह बहुत दुख की बात है।”

एक्स यूजर हार्दिक कहते हैं, “डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है। इनका एजेंडा बिल्कुल साफ है।” वे हिंदुओं को एकजुट होने के लिए कहते हैं, “असली खतरा हमे किससे है वे कोई नहीं देख पा रहा। हिंदुओं अपने धर्म, संस्कृति, धरोहर और विचारधारा का संरक्षण करना है तो समय रहते एक हो जाइए।”

एक और यूजर अभय प्रताप लिखते हैं, “मैडम साहिबा का एजेंडा एकदम से क्लियर है। नगरसेवक का चुनाव जीता है और पूरे क्षेत्र को हरा बना देना है। और ओवैसी के अनुसार एक हिजाबी PM बनेगी तो क्या करेगी?”

बाला नाम के एक्स यूजर ने कहा, “मिलिए 22 साल की AIMIM पार्षद सहर शेख से। ये वो ‘भटके हुए युवा’ नहीं है, इन्हें इस्लाम की अच्छी समझ है। दुख की बात है कि हिंदू अभी तक इस्लाम को नहीं जानते।”

एक और एक्स यूजर दीपा मुखर्जी कहती हैं, “अगर आपको हर चीज को हरा ही करना है, तो जाकर अपने बुजुर्गों की छोड़ी हुई विरासत- पाकिस्तान और बांग्लादेश को ही हरा कर दीजिए। वहाँ पहले से ही हर तरफ हरियाली फैली है, उसे और डुबो दीजिए। भारत को केसरिया ही रहने दीजिए। हमें आप लोगों की यहाँ जरा भी दखलअंदाजी नहीं चाहिए।”

ऑस अबाउट इंडियन नाम से एक्स यूजर कहते हैं, “मिस्टर ओवैसी एक हिजाब पहनने वाली प्रधानमंत्री चाहते थे। लेकिन हम पहले ही देख चुके हैं कि हिजाब पहनने वाली नेता स्थानीय पार्षद बनने पर कैसा व्यवहार करती हैं।”

लोगों की प्रतिक्रियाओं से साफ होता है कि सहर शेख के ‘ग्रीन’ के मायने कुछ भी हों, लेकिन लोग इसे कुछ सकारात्मक तरीके से तो देख नहीं ही रहे हैं। बल्कि यहाँ सहर शेख का मुंब्रा को ‘ग्रीन’ करने का मकसद जरूर जाहिर हो रहा है। सहर शेख ने यह बयान देकर AIMIM में तो अपनी जगह पक्की कर ली है, लेकिन इससे मुंब्रा के लोगों जरूर चिंता जाहिर कर रहे हैं। वहीं, पार्टी के ‘नवाब’ असदुद्दीन ओवैसी देश में ‘हिजाब पहनने वाली’ प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे हैं।

सोशल मीडिया पर ‘ग्रीन’ कलर के मायने

सोशल मीडिया पर सहर शेख के ‘ग्रीन’ शब्द के जो मायने निकाले जा रहे हैं, वे अचानक से नहीं हैं। तमाम खबरें ऐसी आती रही हैं जब इस तरह के बयान देकर नफरत फैलाने के काम सरेआम हुए हैं और जब सवाल उठे तो कह दिया गया- कहने का मतलब कुछ और था।

आपको याद होगा असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने खुलेआम 15 मिनट पुलिस हटाने की बात कही थी और तब उसने साफ कहा था, “हिंदुस्तान में हम 25 करोड़ हैं, तुम 100 करोड़ है ना, ठीक है तुम तो हमसे इतने ज्यादा हो, 15 मिनट पुलिस को हटा लो हम बता देंगे कि किसमें कितना दम है।”

आज ओवैसी ये बोल दें कि उनके भाई के इस बयान में 25 करोड़ का मतलब मुस्लिमों से नहीं था, तो क्या ये बातें बदल जाएँगी? क्या नहीं माना जाएगा कि ये सीधे तौर पर देश में रहने वाले 100 करोड़ हिंदुओं को धमकाने के लिए कहा गया था?

सहर शेख ने आज ओवैसी वाला जहर ही उगला है। बस बात ये है कि वो शब्द नहीं बदल पा रहीं, तो उसके मायने को तोड़-मरोड़ रही हैं। सेकुलर होने की बातें भी इसीलिए की जा रही हैं क्योंकि लोग उस बयान का असल मतलब समझकर उनसे सवाल कर रहे हैं। वरना ‘ग्रीन’ रंग से उनकी मंशा क्या थी ये साफ उनके हाव-भाव में पता चल रहा है। अब वो इस हाव-भाव को छिपाने के लिए कुछ भी गढ़ें इससे जनता को क्या… उन्हें जरूरत है उस बयान को याद रखने की जो उन्होंने जीत के नशे में चूर होकर मंच से दिया है।

देखा जाए तो सहर मात्र 22 साल की युवती हैं, लेकिन उनके मुँह से निकला ये जहर हैरान करने वाला नहीं है। इसी सोशल मीडिया पर ऐसे तमाम वीडियो आपको वायरल होते हुए दिखेंगे, जहाँ छोटे-छोटे मुस्लिम बच्चों के मन में गजवा-ए-हिंद का मकसद भर दिया जाता है, वे सरेआम हिंदुस्तान को गाली देते हैं, पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हैं और इसी देश के बहुसंख्यकों को काफिर कहकर जहर उगलते हैं।

सहर शेख के ‘ग्रीन’ कलर के असल मायने

अब सहर शेख के थैंक्यू स्पीच पर सवाल उठ रहे हैं तो उन्होंने सफाई दी है कि उन्होंने तो सिर्फ ‘ग्रीन’ शब्द का इस्तेमाल रंग के तौर पर किया था, लेकिन यहीं अगर कोई इस्लामी पैरोकार बैठा होगा तो ये निश्चित है कि उनके सामने ये मायने बदल जाएँगे। उसकी मजहबी सोच के अनुसार, इसके मायने मजहबी सोच का खुला ऐलान है।

भले ही सहर शेख समझा रही हैं कि वो सेकुलर है लेकिन ये इस्लामी पैरोकार लोग ग्रीन को इस्लामी पहचान से जोड़कर देख रहे हैं, और देख रहे हैं उस मुस्लिम पार्टी AIMIM की सोच से, जो आए दिन भड़काऊ बयान देकर कट्टरवादी पैदा करने में लगी रहती है। यहाँ ये लोग सहर शेख को सिर्फ अपना पार्षद मान रहे है, न कि पूरे मुंब्रा क्षेत्र का।

उधर, सहर शेख के इस बयान पर चिंता जाहिर करने वाले वह मुंब्रा के वह लोग हैं, जिन्होंने विकास के मुद्दे पर पार्षद चुना था। वे इस उम्मीद से वोट देने पहुँचे थे कि उनका पार्षद खराब सड़कें ठीक करवाएगा, पानी की समस्या सुलझाएगा, नगर में विकास होगा, लेकिन जीत के बाद स्पीच में उन्हें जरूर अपने नए पार्षद की स्पीच सुनकर मायूसी हाथ लगी होगी। जो मुंब्रा को विकास से नहीं, बल्कि ‘ग्रीन’ कलर की मजहबी सोच से रंगना चाहती हैं।

यह वही मानसिकता है, जो AIMIM की राजनीति की पहचान है। जहाँ असदुद्दीन ओवैसी मंच से भड़काऊ भाषण देने से नहीं चूकते, वहीं अब उनकी पार्टी में नए एडमिशन लेने वाले युवा भी उसी राह पर चल पड़े हैं। इससे साफ जाहिर है कि असदुद्दीन के लोकतंत्र और संविधान की बड़ी-बड़ी बातें करने का मतलब सिर्फ मजहब और एक ही सोच को आगे बढ़ाना है। और यही नतीजा है कि उनकी ‘हिजाब पहनने वाली’ सहर शेख पूरे शहर को ‘ग्रीन’ कलर में रंगना चाहती हैं।



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