अमेरिका की ओर से भारत पर 50% टैरिफ लागू करने के बाद भारत अलग- अलग देशों के साथ बैठक कर रहा है और अन्य देश भी भारत के साथ अपने रिश्तों में बेहतरी लाने का प्रयास कर रहे हैं। इस कड़ी में मास्को में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूसी कंपनियों को भारत से जुड़ने की अपील की है।

रूस की यात्रा के दौरान जयशंकर ने भारत की अर्थव्यवस्था और ‘मेक इन इंडिया’ का हवाला देते हुए रूसी कंपनियों को देश से जुड़ने और बेहतर कारोबार की बात कही है।

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर बुधवार को मॉस्को में भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) के 26वें सत्र की सह-अध्यक्षता कर रहे थे। यहाँ उन्होंने रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव से मुलाकात की। डेनिस के बुलावे पर ही वे रूस पहुँचे हैं।

इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत और रूस को पारंपरिक तरीकों से हटकर नए और रचनात्मक तरीके अपनाने चाहिए ताकि दोनों देशों के बीच सहयोग को और बेहतर और मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का मंत्र होना चाहिए: ‘Doing more and doing differently.’

अमेरिका के साथ तनाव है वजह

जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारत के कुछ उत्पादों पर 50% टैरिफ (आयात शुल्क) को लगा दिया है। इसके अलावा, भारत के रूसी कच्चे तेल की खरीद पर अतिरिक्त 25% शुल्क लगाया गया है। इसके कारण भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों में तनाव आया है।

ऐसे में रूस के साथ संबंधों को मजबूत करना भारत की बहुपक्षीय विदेश नीति का एक अहम हिस्सा है। जयशंकर ने सुझाव दिया कि भारत और रूस को संयुक्त उपक्रमों (Joint Ventures), तकनीकी सहयोग और निवेश के नए क्षेत्रों में कदम आगे बढ़ाने चाहिए। इसके लिए उन्होंने बेहतर लक्ष्य और समय सीमा तय की जानी चाहिए ताकि सहयोग को समुचित तौर पर आगे बढ़ाया जा सके।

रूस-भारत के बीच व्यापारिक असंतुलन पर रखी विदेश मंत्री ने अपनी बात

पिछले चार वर्षों में भारत-रूस व्यापार में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2021 में यह व्यापार जहाँ 13 अरब अमेरिकी डॉलर ( ₹1.08 लाख करोड़ ) था, वहीं 2024-25 में बढ़कर 68 अरब डॉलर ( ₹5.95 लाख करोड़) तक पहुँच गया है। इस वृद्धि का मुख्य कारण भारत द्वारा रूस से हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) का बड़े पैमाने पर आयात रहा है। नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने अनुमान लगाया है कि पिछले पाँच वर्षों में यह वृद्धि लगभग 700 प्रतिशत रही है।

हालाँकि ने इस बैठक में एक अहम मुद्दा व्यापार असंतुलन का भी रहा। भारत-रूस के बीच व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। जयशंकर ने इस व्यापार में बढ़ते असंतुलन को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 2021 में यह $6.6 बिलियन (₹54,780 करोड़) था, जो अब $59 बिलियन ( ₹4.9 लाख करोड़ रुपये) तक पहुँच गया है। उन्होंने कहा, “हमें इस मुद्दे को तत्काल सुलझाने की आवश्यकता है।”

जयशंकर ने रूस से भारतीय निर्यात के लिए अपने बाजार को और अधिक खोलने की अपील की ताकि यह असंतुलन कम हो सके। उन्होंने लॉजिस्टिक्स और भुगतान प्रणाली को भी सरल और सुगम बनाने को आज की जरूरत बताई। उन्होंने इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक मार्ग जैसे विकल्पों पर भी काम किए जाने की बात कही।

अपने दौरे में विदेश मंत्री ने थिंक टैंक के प्रतिनिधियों और अन्य लोगों के साथ भी मुलाकात की। इस दौरान भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों, बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य और भारत के दृष्टिकोण पर दोनों देशों के बीच बातचीत हुई ।

जयशंकर ने इसे लेकर एक्स पर लिखा, “रूस के प्रमुख विद्वानों और थिंक टैंक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करके खुशी हुई। भारत-रूस संबंधों, समकालीन वैश्विक भू-राजनीति और भारत के दृष्टिकोण पर चर्चा की।”

जयशंकर का ये दौरा और रूस के साथ व्यापार को लेकर चर्चा इस बात का साफ संकेत है कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपने हितों को लेकर अधिक सक्रिय, रणनीतिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रहा है। यह बयान न केवल रूस के साथ संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश है, बल्कि अमेरिका के दबाव के बीच भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को भी दर्शाता है।



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