भीम सिंह ठाकुर

किश्तवाड़ में 14 अगस्त 2025 को आई भयानक त्रासदी के दौरान कई ऐसे लोग सामने आए, जिन्होंने अपनी जान पर खेल कर दूसरों की जान बचाई। एनडीआरएफ और दूसरी टीमों के काम में मदद की और मलबे के अंदर दबे लोगों को बाहर निकाला। ऐसा ही एक नाम है भीम सिंह ठाकुर का।

चशौती गाँव, गुलाबगढ़ और मचैल माता मंदिर का वह इलाका, जहाँ 14 अगस्त को अचानक बादल फटा और सब कुछ बह गया। घटना में अब तक 62 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है। लेकिन जब घटना घटी तो स्थानीय लोगों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए लोगों को बचाने के लिए आगे आए।

भीम सिंह ठाकुर का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह एक 9 महीने की छोटी सी बच्ची के लिए फरिश्ता बन कर आए। मलबे से बचाकर बच्ची को गोद लिए वो बोल रहे हैं। गुड़िया उठो, उठो गुड़िया, थपथपाते हुए बच्ची को उठाने की जद्दोजहद करते वो दिख रहे हैं। बच्ची को सीपीआर दे रहे हैं ताकि उसकी साँसे चले। इधर-उधर दौड़ रहे हैं। पत्थरों के ढेर और टूटे-फूटे रास्ते वीडियो में दिखाई दे रहा है, जो वहाँ का मंजर बताने के लिए काफी है। ये वीडियो जब वायरल हुआ तो लोगों ने उनके बारे में जानने की कोशिश की।

न्यूज 18 की टीम भी उन तक पहुँची। उन्होंने अपने इंटरव्यू में बच्ची के बारे में बताते हुए कहा, ” बच्ची बेहोश हो गई थी। ऐसा लग रहा था कि उसकी साँसें थम गई हैं, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। बच्ची को उठाया और उसे बचाने के लिए हरसंभव कोशिश करने लगा।” इस दौरान उन्हें लगा कि बच्ची को दूध की जरूरत है। उन्होंने आस-पास दिख रही महिलाओं से आग्रह किया कि कोई इसे दूध पिला दे। घटना को एक बार सुनाते हुए वह भावुक हो जाते हैं और ईश्वर से कामना करते हैं कि ऐसी घटना फिर कहीं न हो।

भीम सिंह ठाकुर का कहना है कि अफरा-तफरी के बीच वे लोगों को बचाने में जुटे हुए थे। मलबों के बीच कई लोग फँसे थे, जिनकी साँसे चल रही थी। उन्हें निकालने में मदद की। इस बीच ये बच्ची मिली। बच्ची जिंदा है या नहीं ये उन्हें नहीं पता था। बस किसी तरह बच्ची को दोबारा जिंदगी मिल जाए यही वह सोच रहे थे। उनका कहना है कि वह उस मंजर को जीवन में कभी नहीं भूल सकते।

पेशे से पत्रकार भीम सिंह ठाकुर की मेहनत और जज्बे को लोग सलाम कर रहे हैं। उनका वीडियो शेयर कर एक यूजर ने लिखा है कि ऐसे रियल हीरो की देश को जरूरत है। उन्होंने छोटी सी बच्ची को सीपीआर दिया, ताकि उसकी साँस चल सके। जब नेशनल मीडिया सिर्फ बाढ़ की खबर टीआरपी बढ़ाने के लिए करता है, वहाँ एक पत्रकार ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाया। वहीं एक यूजर ने कहा ऐसे वीरों का सम्मान जरूरी है! पत्रकार भीम सिंह जी ने सीपीआर देकर एक मासूम की जान बचाई। मैंने देखा है कि राष्ट्रीय मीडिया सिर्फ़ टीआरपी के लिए ही आगे आता है, लेकिन हर स्तर पर स्थानीय लोग ही ऐसी त्रासदियों में मजबूती से खड़े होते हैं।



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