रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में एयर डिफेंस, इंटेलिजेंस और आईएसआर क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया। सरकार का साफ फोकस है कि सेना को सिर्फ संख्या के लिहाज से नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और रियल-टाइम इंटेलिजेंस के मामले में भी मजबूत बनाया जाए।
200 टी-90 टैंकों को अपग्रेड किया जाएगा
डिफेंस पब्लिक सेक्ट यूनिट यानी डीपीएसयू को 200 टी 90 टैंकों का स्वदेशी तरीके से मिड लाइफ अपग्रेड करने का जिम्मा दिया जाएगा। इससे टैंकों की ताकत बढ़ेगी। इसके अलावा लोइटरिंग मुनिशन यानी सुसाइड ड्रोन खरीदने को मंजूरी दी गई है। ये ड्रोन दुश्मन के ठिकानों में घुसकर उसे तबाह कर सकता है।
वायुसेना और नौसेना के लिए मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल ( MRSAM) खरीदने को मंजूरी दी गई है। इससे हवा और जल में सेना को मजबूती मिलेगी। वायुसेना के लिए 200 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाला एस्ट्रा मार्क-2 एयर टू एयर मिसाइलें विकसित करने और खरीदने की योजना है। साथ ही मीटियोर मिसाइलें भी खरीदी जाएँगी।
इजरायल से बड़ी संख्या में स्पाइस 1000 बम खरीदने की योजना है। ये काफी सटीक हमला करता है।
नई पिनाका रॉकेट का विकास
बैठक में 120 किलोमीटर रेंज वाली नई पिनाका रॉकेट के विकास को मंजूरी दी गई है। इससे मौजूदा 45 किलोमीटर से 80 किलोमीटर रेंज वाली पिनाका लॉन्चर से ही दागा जा सकता है।
ऐसे हवाई रिफ्यूलिंग टैंकर और एयरबॉर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) की खरीद के लिए RFP यानी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल में बदलाव मंजूर मिल गई है। ये लंबी दूरी के हवाई ऑपरेशन के लिए अहम है।
अमेरिका से 2 MQ -9B हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) सी गार्जियन ड्रोन को 3 साल के लिए लीज पर लेने का फैसला किया जा सकता है। ऐसे 31 ड्रोन खरीदने का अमेरिका से भारत सौदा पहले ही कर चुका है। इसकी डिलीवरी 2028 से शुरू होगी।
भारतीय सेना के हथियारों का आधुनिकीकरण, क्षमता बढ़ाना, स्वदेशीकरण पर जोर और लंबी दूरी की ताकत बढ़ाने पर जोर है।













