पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन अलीमा खान ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक चौंकाने वाला प्रस्ताव दिया है। अलीमा खान ने साफ कहा है कि अगर सरकार उनके भाई को जेल में उचित मेडिकल सुविधा और सही इलाज मुहैया कराती है, तो वे और उनका परिवार भविष्य में कभी भी आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर का नाम नहीं लेंगे।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब खान परिवार ने इमरान खान की आंखों की रोशनी तेजी से कम होने और उनकी जान को खतरा होने की आशंका जताई है।
इलाज के लिए रखी ये शर्तें
अलीमा खान ने माँग की है कि इमरान खान का इलाज इस्लामाबाद के ‘शिफा इंटरनेशनल अस्पताल’ में कराया जाए। उन्होंने शर्त रखी है कि इलाज के दौरान परिवार का एक प्रतिनिधि वहां मौजूद रहना चाहिए। अलीमा के मुताबिक, इस समय इमरान की आँखों की सेहत सबसे बड़ी चिंता है।
अलीमा ने यह भी कहा कि अगर इमरान खान को जमानत मिलती है, तो उन्हें आगे के बेहतर इलाज के लिए ‘शौकत खानम अस्पताल’ ले जाया जाएगा। अलीमा को उम्मीद है कि अगर इस्लामाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस उनके मामलों की निष्पक्ष सुनवाई करें, तो उनकी रिहाई मुमकिन है।
सेना और सरकार पर हत्या की साजिश का आरोप
इस प्रस्ताव के साथ ही अलीमा खान ने बेहद गंभीर आरोप भी जड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि इमरान खान ने अपनी आखिरी मुलाकात में बताया था कि उनकी जान को खतरा है और आर्मी चीफ आसिम मुनीर उनकी हत्या करवा सकते हैं।
अलीमा खान ने गृह मंत्री मोहसिन नकवी को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि अस्पताल में भर्ती कराने का वादा सिर्फ कागजों तक सीमित रहा। खान परिवार का आरोप है कि सरकार बिना किसी निजी डॉक्टर या परिवार की मौजूदगी के इमरान का चेकअप कराना चाहती है, जो उन्हें मंजूर नहीं है।
‘जहर’ देने का डर और ब्लड टेस्ट की माँग
अलीमा खान ने सरकार पर तीखा सवाल दागते हुए कहा कि अगर इमरान खान को जहर नहीं दिया जा रहा है, तो सरकार उनके निजी डॉक्टरों की निगरानी में ब्लड टेस्ट कराने से क्यों डर रही है? उन्होंने माँग की है कि पूरे इलाज की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। अलीमा ने स्पष्ट किया कि जब तक उनके निजी डॉक्टरों को अनुमति नहीं मिलती, वे सरकारी मेडिकल जाँच पर भरोसा नहीं करेंगे।













