जिन जमीनों को कब्जे से मुक्त करा रही असम की BJP सरकार, सत्ता में आते ही उन पर फिर से ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों’ को बसाएगी कॉन्ग्रेस: गौरव गोगोई ने किया वादा


सीएम हिमंत और गौरव गोगोई

असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार लगातार अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन को खाली कराने के अभियान में लगी हुई है। इस बीच कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई ने कहा है कि अगर कॉन्ग्रेस सत्ता में आती है तो वह अतिक्रमणकारियों को एक बार फिर जमीन वापस दे देगी। कॉन्ग्रेस शुरू से अवैध रूप से कब्जा किए गए जमीन को मुक्त करने के अभियान का विरोध कर रही है। अतिक्रमणकारियों में बांग्लादेशियों की संख्या काफी है।

चुनाव जीती तो कॉन्ग्रेस जमीन लौटा देगी

असम प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने 3 अगस्त को इस मुद्दे पर अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा, “अगर अगले साल विधानसभा चुनाव में विपक्षी पार्टियाँ सत्ता में आती है तो वापस ली गई जमीन को एक बार फिर वंचित लोगों को आवंटित कर देगी।”

जोरहाट से लोकसभा सांसद गोगोई ने कहा, “मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों ने भूमि सुधार के नाम पर अवैध रूप से अर्जित की गई जमीनों को नई कॉन्ग्रेस सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही गरीबों में बाँटने का फैसला लिया जाएगा।” उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी जनता की मदद के लिए भूमि और आर्थिक नीति दोनों में बदलाव लाएगी।

जेल जाने को लेकर सीएम हिमंत ने दिया मुँहतोड़ जवाब

कॉन्ग्रेस नेता ने आगे कहा, “हिमंत बिस्वा सरमा के शासनकाल में हुई लूट और अन्याय पर रोक लगाई जाएगी। कांग्रेस प्रगतिशील भूमि नीतियों और आर्थिक विकास पर आधारित एक नई सरकार बनाएगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी के इस वादे को पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है कि असम के लोग मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को जेल में देखेंगे।

इसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, ” क्या गारंटी है कि मुझसे पहले राहुल गाँधी जेल नहीं जाएँगे।” उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय नेता का इस तरह का बयान देना काफी अपमानजनक है और तब जब नेता अपनी माँ सोनिया गाँधी के साथ नेशनल हेराल्ड केस में पहले ही जमानत पर है।

असम के भूमि सुधार अभियान का सच

कॉन्ग्रेस असम में अतिक्रमण हटाने के अभियान का शुरू से विरोध कर रही है और इसे कोर्ट के आदेशों की अवमानना बता रही है। जबकि तथ्य ये है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मिजोरम जैसे 4 पूर्वोत्तर राज्यों की सीमाओं पर मौजूद वन क्षेत्रों में अतिक्रमण से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करने का आदेश दिया है।

एनजीटी को केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें बताया गया है कि मार्च 2024 तक राज्य में कुल अतिक्रमणग्रस्त वन क्षेत्र 3,620.9 वर्ग किलोमीटर (3,62,090 हेक्टेयर) था, जो देश में मध्य प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर आता है।

अतिक्रमण के खिलाफ दायर याचिका में ये भी बताया गया था कि इसका वन्यजीवों और वन संरक्षण पर काफी बुरा असर पड़ा है। इस पर गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार को वन संरक्षित क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इससे पहले भी गुवाहाटी हाईकोर्ट वन क्षेत्रों को अतिक्रमण से मुक्त कराने का आदेश कई बार दे चुका है।

अतिक्रमण ने जानवरों को बेदखल किया

गौरतलब है कि राज्य में दशकों से चल रहे वन क्षेत्र में अतिक्रमण का असर जीव-जन्तुओं पर पड़ा है। ये लोग अक्सर गाँवों की ओर भागने के लिए विवश होते हैं। खास कर हाथियों के गाँव के खेतों में घुसने और लोगों पर हमला करने की कई घटनाएँ सामने आई है।

असम के विशेष रूप से ग्वालपाड़ा जैसे जिलों में आम लोगों और हाथियों के बीच संघर्ष की खबरें आती रहती हैं। अतिक्रमण से जैव विविधता पर भी असर पड़ा है। लेकिन कॉन्ग्रेस राजनीतिक फायदे के लिए जमीन वापस करने की बात कह रही है। यहाँ तक कि पिछले साल सोनापुर के कोसुटोली इलाके में अवैध रूप से घुसे बांग्लादेशी घुसपैठियों को उकसाने के आरोप भी कॉन्ग्रेस पर सीएम सरमा ने लगाया था।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस और अन्य कट्टरपंथी ताकतों ने अतिक्रमणकारियों को उकसाया। उन्होंने पुलिस पर हमला किया। बांग्लादेश में जो नारा लगाया जा रहा था, वही नारा अब यहाँ भी लगाया जा रहा है। असम पुलिस की कार्रवाई के बाद इलाका फिर से शांत हो गया है और बेदखली का काम जारी है।”

ग्वालपाड़ा में सरकार की कार्रवाई के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें 21 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके बाद सरमा ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने चायगाँव में पार्टी कार्यकर्ताओं को ‘अतिक्रमणकारियों’ और ‘भूमि जिहादियों’ को सरकारी जमीन पर कब्जा करने के लिए उकसाया। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, ” उन्होंने कहा था कि उन्हें उसी वन क्षेत्र में फिर से बसाया जाएगा और घर दिए जाएँगे, लेकिन उनलोगों को नहीं पता कि वनक्षेत्र में किसी को नहीं बसाया जा सकता। “

सरमा ने गोगोई पर लगाए आरोप

सीएम सरमा ने कॉन्ग्रेस नेता गौरव गोगोई पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से संबंध होने के आरोप लगाते रहे हैं। गोगोई की ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कूलबर्न जब दिल्ली के क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क में प्रोजेक्ट मैनेजर थी, उस वक्त उनके एक पाकिस्तानी से संबंध थे। पाकिस्तानी मूल के अली तौकीर शेख और एलिजाबेथ एक ही ऑफिस में काम करते थे। शेख एशिया क्षेत्रीय निदेशक थे। उनपर भारत के खिलाफ सोशल मीडिया में गलत जानकारी देने का रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने दिल्ली दंगों को लेकर संसद में दिए गोगोई के बयान का समर्थन किया था।

फरवरी में सीएम सरमा ने आरोप लगाया था, “आईएसआई से संबंध, युवाओं का ब्रेनवॉश और पिछले 12 सालों से भारतीय नागरिकता लेने से इनकार करने के आरोपों से जुड़े गंभीर सवालों के जवाब दिए जाने की जरूरत है। इसके अलावा, धर्मांतरण गिरोह में शामिल होना और राष्ट्रीय सुरक्षा को अस्थिर करने के लिए जॉर्ज सोरोस समेत बाहरी लोगों से धन लेना गंभीर चिंता का विषय है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।”

गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में यही बात कही थी। उन्होंने गोगोई की ओर मुखातिब होते हुए कहा था, “आप कई बार पाकिस्तान गए हैं, लेकिन क्या कभी बॉर्डर वाले इलाकों में गए हैं। क्या आप समझते हैं कि हमारे सैनिक किस परिस्थितियों में काम करते हैं।”

असम सरकार ने कई अवैध मदरसों पर भी कार्रवाई की। इन मदरसों को शिक्षा देने के नाम पर कट्टरपंथी धार्मिक प्रशिक्षण दिया जा रहा था। यहाँ तक कि ये भी पता चला कि कई मदरसे के कनेक्शन पाकिस्तान के आतंकवादियों से हैं। इन मदरसों को ध्वस्त करने का कॉन्ग्रेस ने विरोध किया था।

गौर करने की बात ये भी है कि गोगोई जब असम कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, तो बराक घाटी जाकर कट्टरपंथी मौलाना अहमद सईद गोविंदपुरी से मुलाकात की थी। ये कार्यक्रम गुप्त था और इसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बहाने रात में अंजाम दिया गया।

अतिक्रमण के खिलाफ एक्शन जारी

विपक्ष और कट्टरपंथियों के तमाम विरोध के बावजूद असम में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई जारी है। प्रशासन ने पिछले 5 दिनों में गोलाघाट जिले के रेंगा रिजर्व वन से करीब 8900 बीघा भूमि खाली कराई और 4000 से अधिक अवैध ढाँचों को ध्वस्त किया।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, “पिछले 5 दिनों के दौरान वन भूमि अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई और उसपर अवैध कब्जा हटाया गया। ये अभियान बिद्यापुर, पीठाघाट,सोनारीबील, दोयालपुर, डोलोनीपाथर, खेरबारी, आनंदपुर और मधुपुर जैसे सघन आबादी वाले क्षेत्रों में चलाया गया। “

गोलाघाट जिले के दोयांग रिजर्व फॉरेस्ट के मेरापानी में 205 घरों को भी 8 अगस्त को खाली करने का नोटिस दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया, ‘बांग्लादेशी घुसपैठिए और संदिग्ध नागरिक’ कथित तौर पर असम के 29 लाख बीघा अर्थात 10 लाख एकड़ जमीन पर कब्जा किए हुए हैं। उन्होंने 21 जुलाई को दारंग ज़िले के गरुखुटी में बहुउद्देशीय कृषि परियोजना की चौथी वर्षगांठ के अवसर पर ये चौंकाने वाले खुलासे किए। 2021 में परियोजना की शुरुआत के बाद से 77,420 बीघा (25,500 एकड़) ज़मीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है।

उन्होंने बताया, “दारंग जिले में बेदखल अभियान के सफल होने के बाद इसे बोरसोला, लुमडिंग, बुरहापहाड़, पाभा, बटाद्रवा, चापर और पैकान तक बढ़ाया गया है। पिछले चार वर्षों सरकार ने 1.29 लाख बीघा (करीब 43,000 एकड़) जमीन से अवैध कब्जा हटाया गया है। इसका एक बड़ा हिस्सा अब वन विकास और राज्य के नागरिकों के लिए आवंटित किया जा रहा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “असम सरकार ने अतिक्रमणकारियों से 182 वर्ग किलोमीटर जमीन वापस ले ली है। अब यही घुसपैठिए एक अलग ‘मिया लैंड’ राज्य की माँग कर रहे हैं। उनका सपना जरूर पूरा होगा। लेकिन भारत में नहीं, बल्कि बांग्लादेश या अफगानिस्तान में। मैं उन्हें वहाँ पहुँचने में जरूर मदद करूँगा।”

यहाँ तक कि हिंदू स्थलों पर भी कब्जा कर लिया गया है। राज्य के वैष्णव मठों के 15,288.52 बीघा क्षेत्र पर अभी भी अवैध अतिक्रमण है। हालाँकि वर्तमान सरकार इस भूमि को मुक्त कराने के लिए एक अभियान चला रही है।

मुख्यमंत्री के अनुसार , “सभी प्रशासनिक अधिकारियों को वन क्षेत्रों से अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि मूल निवासी माने जाने वाले जनजातीय समुदायों के लिए वन अधिकार अधिनियम के तहत सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।” सीएम के मुताबिक इस अभियान को पूरा होने में कम से कम 10 साल लगेंगे

10 साल में हट जाएगा अतिक्रमण- सीएम

कॉन्ग्रेस पार्टी सरमा और उनके मंत्रियों पर हमला करने में व्यस्त है, जबकि असम सरकार राज्य और उसके निवासियों के लाभ के लिए अवैध अतिक्रमण हटाने में लगी हुई है। कॉन्ग्रेस का नजरिया ऐसा है जिसमें वह भारतीय और बांग्लादेशी मुस्लिमों के बीच भी अंतर करना भूल गई है। साथ ही हाईकोर्ट के आदेश को नजरअंदाज कर चुनावी फायदे के लिए भूमि सुधार अभियान का विरोध कर रही है।

( मूल रूप से ये लेख अंग्रेजी में लिखी गई है। इसे देखने के लिए यहाँ क्लिक करें)

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