नवोदय स्कूल में ईसाई मिशनरी का धर्मांतरण खेल, छात्रों और माता-पिता को बहलाने के आरोप में 3 पर FIR: जब्त हुई बाइबल और प्रचार सामग्री, SDM की जाँच के बाद सामने आई गड़बड़ियाँ


एमपी के नवोदया स्कूल में छात्रों को धर्मांतरण कराने के आरोप में 3 पर FIR

मध्य प्रदेश के डबरा में एक स्कूल में ईसाई मिशनरी का मामला सामने आया है। एक अभिभावक की शिकायत के बाद खुलासा हुआ कि स्कूल में बच्चों और उनके माता-पिता को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया जा रहा था। इसके बदले उन्हें नौकरी और पैसों का लालच दिया जा रहा था। पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। स्कूल में बाइबल बाँटने और प्रचार सामग्री मिलने के बाद SDM ने जाँच के आदेश दिए। जाँच में कई गंभीर गड़बड़ियाँ भी सामने आईं।

मामला क्या है?

यह मामला तब उजागर हुआ जब एक अभिभावक ने स्कूल में हो रही गतिविधियों की शिकायत की। उनका बेटा नवो कांति स्कूल (वार्ड 18, नवोदय विद्यालय) में पढ़ता है। अभिभावक ने आरोप लगाया कि स्कूल में कुछ लोग बच्चों और माता-पिता को ईसाई मजहब अपनाने के लिए उकसा रहे थे। इसके बदले में उन्हें नौकरी और अन्य लाभों का लालच दिया जा रहा था।

पुलिस ने 29 अगस्त 2025 को इस मामले में FIR दर्ज की। यह शिकायत इटारसी थाने में दर्ज की गई। FIR में श्यामनारायण, रेविका नंदा और डेनज़िल इन 3 लोगों का नाम हैं। इन पर मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धारा 5 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बताया गया है कि पिछले एक साल से स्कूल में ईसाई धर्म का प्रचार किया जा रहा था। पुलिस जांँच कर रही है कि और कौन-कौन इसमें शामिल था। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।

शिकायतकर्ता को इस पूरे मामले की जानकारी तब मिली जब उसके बेटे ने बताया कि स्कूल में टीचर ईसा मसीह और ईसाई मजहब के बारे में बातें करते हैं। बेटे ने यह भी बताया कि स्कूल की प्रिंसिपल को भी इन सब बातों की जानकारी है।

शिकायतकर्ता ने कहा कि स्कूल में बच्चों को धर्म से जुड़ी बातें बताई जाती हैं, जो सरकारी नियमों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीचर बच्चों को प्रवचन देते हैं और ईसा मसीह की महिमा करते हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह काफी समय से स्कूल में इस तरह की गतिविधियाँ देख रहे थे। अब जाकर उन्होंने इसकी शिकायत दर्ज कराई।

स्कूल में दो लोग बाँट रहे थे बाइबल और पर्चे

25 अगस्त 2025 को शिकायतकर्ता अपने एक दोस्त के साथ स्कूल पहुँचा। वहाँ पहुँचने पर उसने देखा कि स्कूल में दो अजनबी लोग मौजूद थे। छात्रों को ईसाई मजहब से जुड़ी किताबें और पर्चे बाँटे जा रहे थे। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन दोनों लोगों ने उसे भी एक बाइबल दी, ईसा मसीह की तारीफ की और ईसाई मजहब अपनाने के लिए कहा। बदले में नौकरी और पैसे का लालच दिया गया।

इसी दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारी दीपक चौकोटिया और विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल के कुछ सदस्य भी स्कूल पहुँच गए। हिंदू संगठनों ने शिक्षा अधिकारी से पूछा कि स्कूलों की नियमित जाँच क्यों नहीं होती। इसी वजह से ऐसी गतिविधियाँ पनप रही हैं।

इस बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। स्कूल से मिले ईसाई मजहब से जुड़े साहित्य को जब्त कर लिया गया। शिक्षा अधिकारी ने उस सामग्री को एक अलमारी में सील कर दिया।

स्कूल में जाँच समिति का गठन, कई गड़बड़ियाँ सामने आईं

स्कूल में ईसाई प्रचार की शिकायत के बाद SDM ने तीन सदस्यीय जाँच समिति बनाई। जाँच के दौरान स्कूल में कई अनियमितताएँ पाई गईं। स्कूल के प्राचार्य का नाम अनिल निगम और संचालक का नाम अब्राहिम क्रांति बताया गया है।

यह स्कूल 2012 से नवा कान्ति समिति द्वारा चलाया जा रहा है। स्कूल मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध है। साल 2025 में इसकी मान्यता दोबारा बढ़ाई गई थी। फिलहाल स्कूल में करीब 70 छात्र अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ते हैं।

स्कूल में एक NGO द्वारा व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र भी चलाया जा रहा था। लेकिन वहाँ पढ़ाने के लिए कोई प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद नहीं था। जाँच में यह भी सामने आया कि स्कूल परिसर में बने आवासीय क्वार्टर में दो बाहरी लोग रह रहे थे।

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