जानिए भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन से महाभारत काल का संबंध

हर साल अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणेश विसर्जन के साथ भगवान गणेश के महापर्व गणेश चतुर्थी का समापन होता है। इस दिन गणपति बप्पा को विदाई दी जाती है और उनका विधिवत विसर्जन किया जाता है। उत्सव के इस अंतिम दिन गणपति की आखिरी पूजा भी होती है, जिसे उत्तर पूजा कहा जाता है। आईए जानते हैं गणेश चतुर्थी और प्रतिमा विसर्जन के इतिहास, महाभारत काल और छत्रपति शिवाजी से इस महापर्व के संबंध और मान्यताओं के बारे में जो भारत देश को विश्व में एक अलग पहचान देती हैं।

विघ्नहर्ता गणेश की स्थापना और विसर्जन के पीछे की धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यता:

गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है, जो आमतौर पर अगस्त या सितंबर में आती है। यह त्योहार 10 दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होता है। गणेश चतुर्थी  को विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। यह हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है जो भगवान गणेश के जन्म की खुशी में मनाया जाता है।

इस त्योहार की शुरुआत पहले दिन भगवान गणेश की मूर्ति को घर, ऑफिस या पंडाल में स्थापित करके होती है। लोग मंत्रों, भजनों और आरती के साथ उनकी पूजा करते हैं। दस दिनों तक भगवान को तरह-तरह के भोग अर्पित किए जाते हैं और भक्ति भाव से पूजा की जाती है।

ऐसा माना जाता है कि इस त्योहार की परंपरा सातवाहन, राष्ट्रकूट और चालुक्य राजवंशों के समय से चलती आ रही है। वहीं ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी को सार्वजनिक रूप से मनाना शुरू किया था ताकि लोगों में एकता और देशभक्ति की भावना बढ़े।

त्योहार का अंतिम दिन ‘अनंत चतुर्दशी’ कहलाता है, जिसे ‘गणेश विसर्जन’ के रूप में जाना जाता है। इस दिन भक्त भगवान गणेश की मूर्तियों को श्रद्धा और धूमधाम के साथ नदी, समुद्र या किसी अन्य जल स्रोत में विसर्जित करते हैं। यह माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती के पास कैलाश पर्वत लौट जाते हैं।

विसर्जन का एक विशेष महत्व है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि जब गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन होता है, तब वे अपने साथ हमारे जीवन की सारी परेशानियाँ और बाधाएँ भी ले जाते हैं और उन्हें नष्ट कर देते हैं।

महाभारत काल से विसर्जन का क्या है संबंध?

हिंदू धर्म में एक प्रसिद्ध कथा है कि महर्षि वेदव्यास ने महाभारत ग्रंथ की रचना की थी, लेकिन इसे लिखा भगवान गणेश ने था। ऐसा कहा जाता है कि वेदव्यास जी महाभारत लिखवाने के लिए किसी योग्य लेखक की तलाश में थे और इसके लिए ही उन्होंने भगवान गणेश से प्रार्थना की। गणेश जी मान गए, लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि वे बिना रुके लिखेंगे और वेदव्यास जी को बिना रुके कथा सुनानी होगी।

इसके बाद वेदव्यास जी ने भी एक शर्त रखी कि गणेश जी बिना अर्थ समझे कुछ नहीं लिखेंगे। इसके बाद वेदव्यास जी ने लगातार 10 दिनों तक कथा सुनाई और गणेश जी ने बिना रुके उसे लिखा। 10 दिन बाद जब वेदव्यास जी ने गणेश जी को स्पर्श किया, तो देखा कि उनका शरीर बहुत गर्म हो चुका था। फिर वे उन्हें पास के एक जलकुंड में ले गए और स्नान कराया जिससे उनका ताप शांत हुआ।

यहीं से गणेश स्थापना और फिर विसर्जन की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है। मान्यता है कि गणेश जी को शीतलता प्रदान करने के लिए ही उन्हें जल में विसर्जित किया जाता है।

गणेश विसर्जन की परंपरा, समय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण:

गणेश विसर्जन के कई तरीके हैं। कुछ लोग गणेश चतुर्थी के दिन ही विसर्जन करते हैं, हालाँकि यह बहुत प्रचलित नहीं है। वहीं कुछ लोग डेढ़ दिन (अगले दिन दोपहर बाद), कुछ लोग तीन, पाँच या सात दिन तक पूजा करके विसर्जन करते हैं। सबसे अधिक प्रचलित परंपरा है अनंत चतुर्दशी को विसर्जन करना।

गणेश विसर्जन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि इसका वैज्ञानिक पक्ष भी है। यह हमें जीवन की नश्वरता का एहसास कराता है कि हर वस्तु एक दिन प्रकृति में समा जाती है।

विसर्जन के समय जल में जो चीजें डाली जाती हैं – जैसे हल्दी, कुमकुम, दूर्वा, चंदन, फूल आदि, ये सभी जल को शुद्ध करने वाले होते हैं। खासकर हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो पानी को साफ रखते हैं। बरसात के मौसम में यह पानी तालाबों, नदियों और पोखरों को शुद्ध करता है, जिससे जलजीवों को राहत मिलती है।

मुंबई गणेश विसर्जन के खास इंतजाम

आज देशभर में गणेश उत्सव का आखिरी दिन है। अनंत चतुर्दशी के मौके पर भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा। मुंबई में इस मौके पर खास इंतजाम किए गए हैं। इस साल मुंबई में करीब 1.80 लाख मूर्तियों का विसर्जन होगा। इनमें 6,500 सार्वजनिक गणेश पंडाल और लगभग 1.75 लाख घरेलू मूर्तियाँ शामिल हैं। ये मूर्तियाँ शहर के अलग-अलग समुद्र तटों, तालाबों और 205 कृत्रिम झीलों में विसर्जित की जाएँगी।

इसके लिए यहाँ 21,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। वहीं पहली बार पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रही है। गिरगांव चौपाटी पर एक AI कंट्रोल रूम बनाया गया है। बड़े गणपति पंडालों को QR कोड दिए गए हैं और जुलूस में शामिल वाहनों पर स्टिकर लगाए गए हैं। इससे पुलिस को ट्रैफिक और भीड़ को रियल टाइम में मैनेज करने में मदद मिलेगी।

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