एअर इंडिया क्रेश

12 जून, 2025 को गुजरात के अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया विमान हादसे का दोष पायलटों पर डालने का प्रयास चालू हो गया है। जाँच रिपोर्ट सामने आने से पहले ही AI 171 फ्लाइट हादसे का आधार पायलट की कथित गलती को विदेशी मीडिया ने बना दिया। जबकि जाँच रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट रूप से नहीं कही गई।

इस मामले में मीडिया ने विमान निर्माता कंपनी बोइंग को भी क्लीन चिट देने का प्रयास है, जिसका बनाया 787-8 ड्रीमलाइनर 242 लोगों के साथ क्रैश हुआ था। यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी विमान हादसे के बाद बोइंग ने पायलटों के सिर पर दोष मढ़ने का प्रयास किया हो।

वॉल स्ट्रीट जनरल ने पायलटों को बनाया ‘विलेन’

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल ने गुरुवार (10 जुलाई,2025) को इसी संबंध में एक खबर प्रकाशित की है। इस खबर में दावा किया गया है कि जाँचकर्ता अब एअर इंडिया हादसे की जाँच इंजन या अन्य फेलियर के एंगल से नहीं परंतु पायलटों की ‘भूल’ के एंगल से कर रहे हैं। 

एअर इंडिया पायलटों दोष

वॉल स्ट्रीट जनरल ने यह रिपोर्ट अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से लिखी है, जिनका नाम नहीं दिया गया है। पायलटों को कठघरे में खड़े करने वाली यह रिपोर्ट पूरी तरह से ‘सूत्रों के हवाले से’ लिखी गई है। इसमें ना किसी अमेरिकी और ना ही एअर इंडिया के अधिकारियों का नाम दिया गया है। 

वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट कहती है कि जाँच का दायरा काल कवलित हुई फ्लाइट के पायलटों कैप्टन सुमीत सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर के कथित तौर पर विमान के दोनों इंजनों के फ्यूल स्विच एक साथ बंद किए जाने को लेकर है। रिपोर्ट में दावा है कि इनके बंद होने से विमान उठ नहीं पाया और उड़ान भरते ही एक इमारत से जा टकराया। 

वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट में कहा गया है, “इन लोगों ने बताया कि उड़ान के दौरान ये स्विच सामान्यतः चालू रहते हैं, और यह स्पष्ट नहीं है कि इन्हें कैसे या क्यों बंद किया गया। लोगों ने यह भी बताया कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह गलती से हुआ था या जानबूझकर, या इन्हें वापस चालू करने की कोशिश की गई थी।”

इस रिपोर्ट में सधे शब्दों के साथ यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि विमान असल में पायलट की ही भूल के चलते हादसे का शिकार हुए है। रिपोर्ट के पहले हिस्से में ही यह दावा कर दिया गया है कि बोइंग का 787 ड्रीमलाइनर एकदम सुरक्षित है और उसको लेकर जाँच की कोई तलवार नहीं लटक रही। 

जबकि AAIB की रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि इंजन फ्यूल स्विच बंद हुए थे और कुछ सेकंड के बीच चालू भी हो गए थे। इस बीच पायलटों के बीच बातचीत भी हुई थी। जिसमे दूसरे पायलट ने पहले से इनकार किया था कि उसने इस स्विच के साथ कोई छेड़छाड़ की है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्विच वापस ऑन करने के बाद भी एक ही इंजन चालू हुआ था। दूसरा तब भी नहीं चालू हो पाया। संभव है किसी तकनीकी सस्या की वजह से फ्यूल स्विच बंद हुए हों।

विदेशी मीडिया में एक साथ सामने आए दावे

वॉल स्ट्रीट जनरल की यह रिपोर्ट भारत में विमान हादसे की जाँच कर रही एजेंसी AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो) की रिपोर्ट के सामने आने से पहले आई है। AAIB के इस मामले में रिपोर्ट सार्वजनिक करने की तारीख शुक्रवार (11 जुलाई 2025) बताई गई थी। इसे 12 जुलाई की सुबह रिलीज किया गया।

एअर इंडिया की फ्लाइट AI 171 हादसे को लेकर केवल वॉल स्ट्रीट जनरल ने ही ऐसी रिपोर्ट नहीं प्रकाशित की है। AAIB की रिपोर्ट आने के कुछ दिनों पहले से संगठित रूप से वही मीडिया पोर्टल ऐसे दावे कर रहे हैं, जो लगातार भारत विरोधी प्रोपेगेंडा करते पकड़े गए हैं। 

वॉल स्ट्रीट जनरल के अलावा ब्लूमबर्ग, रॉयटर्स, ABC न्यूज और विमानन पर रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट एयर करेंट ने भी विमान हादसे का कारण इंजन को ईंधन पहुंचाने वाले फ्यूल स्विच के गलती से बंद होना बताने का प्रयास किया है। इन सभी मीडिया पोर्टल में यह खबरें 8 जुलाई से 10 जुलाई के बीच प्रकाशित हुई हैं। 

एअर इंडिया पायलटों दोष
विदेशी मीडिया में एक साथ ‘पायलट की गलती’ की बात को रेखांकित किया गया है

इनमें से एयर करेंट वेबसाइट ने तो विमान निर्माता बोइंग और उसके विमान 787 ड्रीमलाइनर के साथ ही उसके इंजन को भी बचाना चालू कर दिया है। एयर करेंट ने इस विमान के लिए इंजन सप्लाई करने वाले जनरल इलेक्ट्रिक के इंजन मॉडल को भी दोषमुक्त करार दे दिया है। 

बोइंग को ‘बचाने’ के हो रहे प्रयास?

एअर इंडिया हादसे को लेकर विदेशी मीडिया में एक साथ खबरें आना असमान्य सा लगता है। यह बात अगर किसी जाँच रिपोर्ट के हवाले से कही जाती तो मानी भी जा सकती थी। जाँच रिपोर्ट में कहीं स्पष्ट रूप से नहीं लिखा कि पायलटों ने स्विच बंद किया था। उसमे केवल स्विच बंद होने की बात है।

इससे प्रश्न उठता है कि कहीं बोइंग इस मामले में पायलटों को दोषी ठहरा अपनी जिम्मेदारी से बचना तो नहीं चाह रही और इसी के लिए एक साथ ऐसी खबरें सामने आई हों। यह आशंका निराधार भी नहीं है, इससे पहले बोइंग कई हादसों में पायलटों के ऊपर दोष डाल चुकी है। 

बाद में हुई जाँच में बोइंग की ही गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण वर्ष 2019 और 2020 में हुए 737 मैक्स विमान के हादसे हैं। यह हादसे इंडोनेशिया की लायन एयर और इथियोपिया की इथियोपियन एयरलाइंस के विमानों के साथ हुए थे। 

इथियोपियन एयर का 737 मैक्स उड़ने के कुछ ही मिनटों के बाद क्रैश हो गया था (फोटो साभार: UPI)

इन हादसों में 346 लोग मारे गए थे। इन हादसों के बाद न्यू यॉर्क टाइम्स के साथ एक बातचीत में बोइंग के CEO डेविड कोल्हान ने कहा था,”वहाँ (एशिया और अफ्रीका) के पायलटों का अनुभव, अमेरिकी पायलटों के मुकाबले कहीं नहीं ठहरता।”

उन्होंने सीधे तौर पर पायलटों को कम अनुभव वाला और हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया था। इन्हीं हादसों को लेकर डेविड कोल्हान से पहले बोइंग के CEO रहे डेनिस मुलिनबर्ग ने भी ऐसी ही टिप्पणी की थी। 

उन्होंने हादसों के बाद अमेरिकी संसद के सामने कहा था कि उनके विमान (737 मैक्स) एकदम ठीक थे लेकिन पायलटों ने सारे कदम नहीं उठाए, जिसके चलते विमान हादसे का शिकार हो गए। इन दोनों की बातें आगे चलकर एकदम झूठ साबित हुई थीं। 

यह दोनों विमान हादसे बोइंग की ही एक गलती के चलते हुए थे। बोइंग ने अपने 737 मैक्स में MCAS नाम का एक सॉफ्टवेयर लगाया था जो विमान के आगे के हिस्से को अधिक ऊपर उठने से रोकता था। इसके विषय में बोइंग ने पायलटों को नहीं बताया था। यह सॉफ्टवेयर खुद ही काम करता था। 

बोइंग के पायलटों को इस विषय में ना बताने के पीछे कारण था कि यह विमान खरीदने वाली एयरलाइंस को उन्हें ट्रेनिंग देनी पड़ती जो बड़ा खर्च होता। इसके अलावा इस सिस्टम का प्रमाणन भी बोइंग को करवाना पड़ता, यह भी एक खर्चीली प्रक्रिया है। 

बोइंग की बेइमानी का परिणाम यह हुआ कि यह दोनों हादसे हो गए। इन दोनों हादसे में विमान के उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद वह नीचे की तरफ गोते खाने लगा और अंत में जाकर क्रैश हो गया। इसके पीछे कारण था कि MCAS सॉफ्टवेयर लगातार इन दोनों में विमानों को नीचे की तरफ दबाता रहा और पायलट चाह कर भी कुछ नहीं कर पाए। 

बोइंग ने पहले तो अपनी गलती स्वीकार ही नहीं की और इन दोनों एयरलाइंस के पायलट पर ही दोष मढ़ दिया। बाद में हुई जाँच में सच्चाई खुली और बोइंग को लगभग ₹20 हजार करोड़ का जुर्माना झेलना पड़ा था और MCAS में गड़बड़ी की बात भी स्वीकार करनी पड़ी थी। 

इससे पहले भी पायलटों को बदनाम कर चुकी बोइंग

737 मैक्स से जुड़े हादसों के अलावा इससे पहले भी बोइंग का यह रवैया रहा है कि खुद को बचाने के लिए तुरंत पायलटों को निशाना बनाओ। वर्ष 2009 में टर्किश एयरलाइन का एक विमान भी ऐसे ही हादसे का शिकार बना था, जब बोइंग ने पायलटों को निशाना बनाया था। 

25 फरवरी, 2009 को टर्किश एयरलाइन का एक विमान एम्स्टर्डम एयरपोर्ट पर उतरते समय हादसे का शिकार हो गया था और इसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे में 120 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हादसा बोइंग के बनाए 737-800 विमान के साथ हुआ था। 

एम्सटर्डम के रनवे पर तुर्की का विमान हादसे का शिकार हुआ था (फोटो साभार: FAA US Gov)

हादसे की जाँच में सामने आया था कि इस विमान को ऊँचाई का डाटा देने वाला उपकरण (अल्टीमीटर) गड़बड़ कर गया था। इसने विमान के 2000 फीट ऊंचाई पर होने के बावजूद सिस्टम को यह डेटा दिया कि वह नीचे उतर चुका है और लैंडिंग के आखिरी चरणों में हैं। 

इसके चलते विमान के ऑटो थ्रोटल सिस्टम ने उसके इंजन को लगभग बंद कर दिया। हालांकि विमान तब भी ठीकठाक ऊंचाई पर था। इस गड़बड़ी के चलते विमान सीधा एयरपोर्ट पर आकर गिरा और कई टुकड़ों में बंट गया। बाद में सामने आया कि यह गड़बड़ी बोइंग के सिस्टम की थी और कॉकपिट में मौजूद पायलटों को इस गड़बड़ी को पहचानने में देरी हो गई थी। 

इस मामले में भी पश्चिमी देशों की प्रेस ने यही खबरें चलाई थीं कि पायलटों को भूल से ही यह हादसा हुआ है। हालांकि बाद में हुई जाँच में असल कारण सामने आए थे और बोइंग को इसके बाद एक्शन भी लेना पड़ा था। इसी तरह की कहानी जुलाई 2013 सैन फ्रांसिस्को के एक विमान हादसे में हुई थी। 

दक्षिण कोरिया की एशियाना एयरलाइन का एक बोइंग 777 विमान इस एयरपोर्ट पर हादसे का शिकार हो गया था। यह विमान कम स्पीड के चलते एक दीवाल में जा टकराया था और इसका बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हुई थी। 

जाँच में सामने आया था कि इसमें भी विमान की लैंडिंग के समय स्पीड घट गई थी। पायलटों ने इस पर ध्यान नहीं दिया था। बोइंग ने यह कह कर बचने का प्रयास किया था कि पायलट सही से सीखे नहीं हुए थे। जबकि असल बात यह थी कि विमान के तकनीक इतनी ज्यादा थी कि पायलट कुछ समझ नहीं पाए। एयरलाइन ने भी तकनीक में गड़बड़ी को समस्या बताया था। 

पुरानी स्क्रिप्ट फिर चलाई जा रही

स्पष्ट है कि बोइंग कभी भी बिना दबाव के अपनी गलती मानने को तैयार नहीं हुई है। एअर इंडिया हादसे के मामले में भी कुछ ऐसा ही प्रयास चल रहा है। इस मामले में पायलटों को दोषी ठहराना और भी आसान है क्योंकि दुखद तौर पर वह अपनी सफाई पेश करने के लिए इस संसार में मौजूद ही नहीं हैं। 

बोइंग अपने आप को इसलिए भी बचा रही है कि अगर उसकी गलती इस मामले में निकली तो एक तो 787 ड्रीमलाइनर का अब तक का सुरक्षित विमान होने का रिकॉर्ड टूट जाएगा और दुनिया भर में उसके व्यापार पर बड़ा फर्क पड़ेगा। 

इसके अलावा उसका दोष निकलने पर उसे बड़ी मात्रा में मुआवजे तक देने पड़ सकते हैं। ऐसे में वह पहले ही पायलटों के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चला कर अपने को बचाने के प्रयास कर रही हो, यह आशंका है। अमेरिकी और पश्चिमी देशों की मीडिया एजेंसी में एक जैसी खबरें आना इसी का संकेत लगती हैं। 

पायलटों को दोषी ठहराने के अलावा भी बोइंग कोई दूध की धुली नहीं है और उसके खिलाफ गड़बड़ी का बड़ा इतिहास है। चाहे अमेरिकी वायु सेना के लिए टैंकर डील हो या फिर एयरबस से प्रतियोगिता, वह हर बार अपने प्रभाव का इस्तेमाल करती आई है। 

अब इस मामले में AAIB और बाकी जाँच एजेंसियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे की असल वजह क्या थी और इसके लिए बोइंग दोषी है या पायलटों की चूक वाली बात ऐसे ही फैलाई जा रही है। 

अहमदाबाद हादसे में क्या हुआ

12 जून, 2025 को अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ी एअर इंडिया की फ्लाइट AI 171 हादसे का शिकार हो गई थी। यह हादसा बोइंग निर्मित 787-8 ड्रीमलाइनर विमान के साथ हुआ था। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोग मारे गए थे, जिनमें दोनों पायलट और क्रू भी शामिल थे। 

अहमदाबाद में क्रैश हुआ एअर इंडिया का विमान एक होस्टल में जा घुसा था (फोटो साभार: Narendra Modi/X)

यह हादसा दोपहर लगभग 1:40 मिनट पर हुआ था। यह विमान उड़ान भरने के साथ ही हादसे का शिकार हो गया था। यह विमान जहां टकराया था वहां भी लोग मारे गए थे। हादसे के बाद घटनास्थल का दौरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी किया था। 

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