अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और स्विट्जरलैंड की राष्ट्रपति कारिन केलर-सटर के बीच हुई एक ‘तनावपूर्ण’ फोन कॉल ने व्यापार जगत में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने खुलासा किया है कि इस कॉल के दौरान स्विस राष्ट्रपति के बर्ताव से नाराज होकर उन्होंने स्विट्जरलैंड से आने वाले सामान पर टैरिफ (आयात शुल्क) को 30% से बढ़ाकर सीधा 39% कर दिया था।
ट्रंप का कहना था कि दोनों देशों के बीच 42 बिलियन डॉलर का व्यापार घाटा है, जिसे संतुलित करना उनकी प्राथमिकता है। हालाँकि, बाद में स्विस व्यापारियों की ओर से मिले कीमती तोहफों और भारी निवेश के वादे के बाद ट्रंप ने इस टैरिफ को घटाकर अब 15% कर दिया है।
तकरार से टैरिफ बढ़ाने तक का सफर
ट्रंप के मुताबिक, फोन पर बातचीत के दौरान स्विस राष्ट्रपति लगातार टैक्स कम करने का दबाव बना रही थीं, लेकिन उनका अंदाज ट्रंप को पसंद नहीं आया। ट्रंप ने इसे अमेरिका का अपमान माना और सजा के तौर पर टैक्स की दरें और ज्यादा बढ़ा दीं। इस फैसले से स्विट्जरलैंड के उद्योगों पर बहुत बुरा असर पड़ने लगा था और वहां के निर्यातकों में हड़कंप मच गया था।
गोल्ड बार, रोलेक्स और ट्रंप का बदला मूड
जब मामला बिगड़ने लगा, तो स्विट्जरलैंड के बड़े कारोबारी खुद व्हाइट हाउस पहुँचे। ट्रंप को खुश करने के लिए उन्होंने उन्हें एक ‘रोलेक्स डेस्क क्लॉक’ और एक ‘किलो सोने की ईंट’ (गोल्ड बार) गिफ्ट की। इस सोने की ईंट पर ट्रंप के कार्यकाल के नंबर 45 और 47 लिखे हुए थे। इस मुलाकात और तोहफों के बाद ट्रंप का दिल पघल गया। उन्होंने ऐलान किया कि वह आम लोगों के फायदे के लिए टैरिफ को घटाकर 15% कर रहे हैं, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर बात नहीं मानी गई तो इसे दोबारा बढ़ाया जा सकता है।
बड़ा समझौता: 200 बिलियन डॉलर का निवेश
विवाद सुलझने के बाद दोनों देशों के बीच एक शुरुआती समझौता हुआ है। इसके तहत अब स्विट्जरलैंड पर सिर्फ 15% टैक्स लगेगा, लेकिन बदले में स्विस कंपनियों को 2028 तक अमेरिका में 200 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम निवेश करना होगा।
स्विस कंपनियों ने इस राहत का स्वागत किया है क्योंकि इससे उन्हें यूरोप के अन्य देशों के मुकाबले बराबरी का मौका मिलेगा। उम्मीद है कि 2026 की पहली तिमाही तक दोनों देश इस समझौते को पूरी तरह औपचारिक रूप दे देंगे।













