भारत की आर्थिक तरक्की में उसके उद्योगपतियों का बड़ा हाथ है। पहले टाटा-बिरला और बाद में अडानी-अम्बानी जैसे कारोबारी समूह भारत की आर्थिक तरक्की को आगे ले जा रहे हैं। इसी आर्थिक तरक्की ने भारत को पाकिस्तान से कई गुना आगे खड़ा किया है और मजबूत बनाया है। इस आर्थिक तरक्की के स्तम्भों को लगातार निशाने पर लिया जा रहा है। इसके पीछे वह तत्व हैं, जिन्हें अमेरिका या उससे जुड़ी एजेंसियों का समर्थन प्राप्त है। कॉन्ग्रेस MP राहुल गाँधी भारतीय आर्थिक हितों को निशाना बनाने वालों के सुर में सुर मिलाते रहे हैं।
‘मुल्ला मुनीर’ ने अब मुकेश अम्बानी पर किया प्रलाप
आर्थिक दौड़ में भारत से कोसों पीछे हो चुका पाकिस्तान वर्तमान में कर्जों के बल पर ज़िंदा है। IMF, अमेरिका और सऊदी के पैसों पर उसकी अर्थव्यवस्था दिवालिया होने से बच रही है। भारत की बराबरी ना कर पाने के चलते पाकिस्तान अब भारत की अर्थव्यवस्था के स्तम्भों को कमजोर करने की धमकियाँ दे रहा है। इसी कड़ी में पाक फ़ौज के सरगना आसिम मुनीर ने अमेरिकी जमीन से भारतीय कारोबारी मुकेश अम्बानी को निशाना बनाने की बात कही है।
द प्रिंट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर ने अमेरिका में एक जनरल के विदाई समारोह में अपने भाषण में खूब जहर उगला। इसमें मुनीर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया। इसमें मुकेश अम्बानी की एक तस्वीर और कुरान की एक आयत थी। मुनीर ने अपने इस वक्तव्य में मुकेश अम्बानी की हत्या की धमकी एक तरह से दी। दरअसल, जिस आयत का जिक्र मुकेश अम्बानी की फोटो पर था, चिड़ियों ने दुश्मन की सेना पर पत्थर गिराए और उसे तबाह किया।
मुनीर ने सीधे तौर पर यह कहने का प्रयास किया कि वह अगले युद्ध में मुकेश अम्बानी को निशाना बनाएँगे। किसी सैन्य अधिकारी का दूसरे देश के उद्योगपति को लेकर ऐसा बयान काफी चौंकाने वाला था। हालाँकि, पाक फ़ौज के मुखिया से और कोई उम्मीद नहीं की जा सकती थी। ज्यादा परेशान करने वाली बात है कि यह धमकी लाहौर या इस्लामाबाद से नहीं बल्कि अमेरिका की जमीन से दी गई। उस कमरे से दी गई, जहाँ अमेरिका के बड़े से बड़े सैन्य अधिकारी तक मौजूद थे।
इसे सीधे तौर पर समझा जाए कि अमेरिका की शह पर मुनीर भारतीय कारोबारी को धमका रहे हैं, इसमें अमेरिका की मौन सहमति भी मानी जाए। उन्हें भारतीय कारोबारी को धमकाते टाइम ना किसी ने रोका, ना किसी ने टोका। यह मौन स्वीकृति बताती है कि मुनीर के अम्बानी पर हमले के दौरान अमेरिका उसके साथ खड़ा रहेगा। मुनीर की लफंगई का कई तरीकों से अर्थ निकाला गया है। कुछ ने इसे गुजरात के के जामनगर रिफाइनरी से भी जोड़ा।
जामनगर में रिलाइंस की बड़ी रिफाइनरी है। यह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी खतरे की जद में बताई गई थी। इस तरह से यह मतलब भी निकाला जाए कि भारतीय औद्योगिक हितों का निशाना बनाए जाने से अमेरिका को कोई समस्या नहीं है और वह इसके लिए अपनी जमीन भी इस्तेमाल होने देगा, इसके साथ ही वह पाकिस्तान के साथ खड़ा रहेगा। मुनीर का बयान भले ही चौंकाने वाला हो लेकिन अमेरिका का भारतीय कारोबारी हितों को प्रभावित करना कोई नई बात नहीं है।
अडानी को निशाना बना रही थी अमेरिकी फर्म
अमेरिकी जमीन से जहाँ मुनीर ने भारतीय कारोबारी मुकेश अम्बानी को निशाना बनाया, तो कुछ समय पहले तक दूसरे कारोबारी गौतम अडानी भी उसकी ही जमीन से निशाना बनाए जा रहे थे। अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग ने जनवरी, 2023 से लेकर 2024 तक लगातार अडानी पर रिपोर्ट्स छापीं। अडानी पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट ने तमाम तरह के आरोप लगाए। इसके आधार पर भारत में खूब हंगामा हुआ। भारतीय निवेशकों की लाखों करोड़ की पूँजी चली गई।
अडानी पर हिंडनबर्ग की इस रिपोर्ट के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी तक को निशाना बनाया गया। अडानी समूह पर धोखाधड़ी, शेयर बाजार में गड़बड़ी और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने जैसे आरोप तक लगाए गए। यह सब उस हिंडनबर्ग ने किया, जिसका सीधा संबंध जॉर्ज सोरोस से था। यह वही सोरोस है, जिसने दुनिया भर में सत्ताएँ बदलने का काम किया है। वह भारत के खिलाफ भी जहर उगल रहा था। तब अमेरिका के बायडेन प्रशासन ने हिंडनबर्ग और बाकी ऐसे तत्वों को खुली छूट दी कि वह भारतीय कारोबारी हितों को नुकसान पहुँचे।
अडानी के खिलाफ अमेरिका में बायडेन प्रशासन के अंतिम दिनों में मुकदमा भी दर्ज कर दिया गया। एक कथित रिश्वतखोरी के मामले में गौतम अडानी और उनकी कम्पनी के बाकी लोगों को आरोपित बनाया गया है। इसमें अमेरिका की सरकारी एजेंसी SEC तक अडानी को निशाना बनाने में जुटी हुई थी। अडानी को इससे भी कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा लेकिन भारत के आर्थिक हितों को लेकर अमेरिका का क्या रुख है, यह जरूर साफ़ हुआ।
राहुल गाँधी भी इसी गेम में शामिल!
जहाँ पाकिस्तान-अमेरिका का नेक्सस भारतीय कारोबारियों को निशाने ले रहा है तो वहीं उसको मौन सहयोग कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी दे रहे हैं। राहुल गाँधी ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद तमाम आरोप प्रधानमंत्री मोदी पर लगाए थे। कॉन्ग्रेस ने इस दौरान हिंडनबर्ग द्वारा प्रसारित हर झूठ को आगे बढ़ाया। राहुल गाँधी ने अडानी को PM मोदी का दोस्त बताया था और कई आरोप लगाए थे। कॉन्ग्रेस कहीं अडानी और प्रधानमंत्री मोदी को लेकर कोई नया शब्द गढ़ती थी तो कहीं इस्तीफ़ा माँगती थी।
हिंडनबर्ग के सहारे प्रधानमंत्री मोदी और अडानी को जोड़ कर सारा प्रोपेगेंडा चलाने का नेतृत्व राहुल गाँधी के पास ही था। बाद हिंडनबर्ग के लगाए आरोप ताश के पत्तों की तरह बिखर गए। हालाँकि, इतने दिनों तक राहुल गाँधी अमेरिकी कम्पनी हिंडनबर्ग की प्लेबुक पर खेलते रहे। दुखद बात यह है कि पाकिस्तानी जनरल मुनीर के बयान के दौरान भी उन्होंने चुप्पी साध रखी है। उनका समर्थन भारत के आर्थिक हितों को नहीं है।
यहाँ तक कि जो सेना इन आर्थिक हितों को प्रभावित होने से बचाएगी, उसके शौर्य पर प्रश्न उठाने स भी राहुल गाँधी नहीं चूके हैं। राहुल गाँधी की पार्टी के कई नेताओं ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के एक्शन को लेकर प्रश्न पूछे हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता यह भी नहीं मानने को तैयार हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान के 5-6 विमान मार गिराए। इससे पाकिस्तान को शह मिल रही है और उसकी फ़ौज की मुखिया अब भारतीय कारोबारी हितों को निशाना बना रहा है।













