कुल सालाना सरप्लस 90 अरब डॉलर यानी 8.1 लाख करोड़ तक बढ़ सकता है। SBI रिसर्च में ये दावा किया गया है। रिसर्च के मुताबिक, भारत सामानों की अमेरिकी बाजार में माँग काफी बढ़ जाएगी क्योंकि टैरिफ में कमी आने से उनकी कीमत घट जाएगी।
SBI रिसर्च में ये भी कहा गया है कि भारत की जीडीपी में उछाल आएगा और ये करीब 1.1 फीसदी बढ़ सकता है। इससे 3 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है, क्योंकि आयात शुल्क में भारत ने कमी की है।
अमेरिका आयात 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का होता है। भारत अभी सिर्फ 3 फीसदी ही इसका पूरा कर पाता है। इसमें जेम्स एंड ज्वैलरी, कपड़े, कैमिकल, समुद्री भोजन जैसे क्षेत्र अहम हैं। अमेरिकी माँग को देखते हुए भारत के पास आपूर्ति बढ़ाने की काफी संभावना है जिसका असर भारत के निर्यात में वृद्धि के तौर पर सामने आएगा।
SBI रिसर्च में कहा गया है कि सबसे ज्यादा निर्यात होने वाले 15 उत्पादों में सालाना करीब 97 अरब डॉलर की बढोतरी संभव है। इसलिए कहा जा रहा है कि भारतीय सामानों का निर्यात 100 अरब डॉलर पार कर जाएगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कृषि क्षेत्र को भी काफी फायदा होने वाला है। भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले करीब 75 फीसदी उत्पादों पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। इनमें मसाले, चावल, चाय, कॉफी, तिलहन, मेवा और समुद्री भोजन शामिल है।
भारत का अमेरिका के साथ व्यापार भारत के लिए फायदेमंद रहा है। अगले 5 सालों में ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और कीमती मेटल्स, विमानों और दूसरे प्रोडक्ट का करीब 500 अरब डॉलर खरीदने की इच्छा जताई है। एसबीआई रिसर्च में पूरे व्यापार को लेकर कहा गया है कि भारत के पक्ष में ये व्यापार होगा।
