‘समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ विजन डॉक्यूमेंट के लिए राज्य सरकार के पोर्टल पर रविवार (7 सितंबर) तक 27,500 से अधिक लोगों ने अपने सुझाव दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें अब तक सबसे अधिक सुझाव शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। यह दिखाता है कि लोग मानते हैं कि विकास की असली कुंजी शिक्षा ही है।

योजना विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने बताया कि रविवार तक पोर्टल पर कुल 27,551 सुझाव दर्ज हो चुके थे। इनमें से 18,780 सुझाव पुरुषों ने दिए जबकि 8,459 महिलाओं से आए। इसके अलावा 312 सुझाव ऐसे भी हैं, जिनमें सुझाव देने वाले लोगों के लिंग की पहचान नहीं हो सकी है।

दिलचस्प बात यह है कि इस बार ग्रामीण आबादी ने शहरों के मुकाबले कहीं ज्यादा सक्रियता दिखाई है। कुल प्राप्त फीडबैक में से 22,158 सुझाव गाँवों से आए जबकि शहरों से केवल 5,393 सुझाव दर्ज हुए।

नागरिकों को नीति निर्माण से जोड़ने के लिए पोर्टल लॉन्च

‘समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ अभियान के तहत samarthuttarpradesh.up.gov.in पोर्टल 3 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में लॉन्च किया था।

इस समारोह में सीएम योगी ने राज्य के भविष्य का रोडमैप बनाने के लिए नागरिकों से भागीदारी की अपील की थी। यह अभियान विधानसभा के विशेष मैराथन सत्र के बाद शुरू किया गया जिसमें विजन 2047 पर चर्चा हुई थी।

इस ऑनलाइन पोर्टल के जरिए लोग 12 प्राथमिक क्षेत्रों पर अपने सुझाव दे सकते हैं। इनमें कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, आईटी, आधारभूत संरचना, पर्यटन, सामाजिक कल्याण, सुरक्षा और सुशासन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह पूरी कवायद आर्थिक शक्ति, नवाचार और जीवन्तता की थीम पर आधारित है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ विजन के अनुरूप है।

विस्तृत भागीदारी और विशेषज्ञों की मौजूदगी

अभियान की शुरुआत के समय लखनऊ के लोक भवन में 400 से ज्यादा रिटायर अधिकारी और प्रशासन, पुलिस, वानिकी, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस अवसर पर ओरिएंटेशन वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत एक लघु फिल्म से हुई जिसमें 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश के विकास को दिखाया गया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि शताब्दी संकल्प अभियान का मकसद हर नागरिक को विकास का साझीदार बनाना है। उन्होंने खास तौर पर बुजुर्गों, बुद्धिजीवियों और पेशेवरों से अपील की कि वे अपने अनुभव को राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए इस्तेमाल करने में मदद करें।

राज्य की आर्थिक को लेकर सीएम योगी ने बताया कि पिछले 8 वर्षों में उत्तर प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 13 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 35 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया है और प्रदेश भारत की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है।

कैसे चल कर रहा है यह अभियान?

अभियान के शुरुआती चरण में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सेमिनार किए जा रहे हैं ताकि युवाओं को जोड़ा जा सके। इसके बाद मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की सक्रिय भागीदारी होगी। योजना यह भी है कि हर ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर प्रस्ताव पारित किए जाएँ ताकि जमीनी स्तर से सुझाव लिए जा सकें।

प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सार्वजनिक जगहों, स्कूलों और कॉलेजों में क्यूआर कोड लगाए गए हैं। कोई भी व्यक्ति इन्हें स्कैन करके सीधे ऑनलाइन अपने सुझाव भेज सकता है। पोर्टल को भी बिल्कुल आसान और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सकें।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, सभी सुझावों का मूल्यांकन उस विषय के एक्सपर्ट और नीति आयोग द्वारा किया जाएगा। सबसे अच्छे और नवाचार वाले आइडिया को अंतिम विज़न डॉक्यूमेंट में शामिल किया जाएगा। साथ ही, उन्हें जिला और राज्य स्तर पर सम्मानित भी किया जाएगा।

2047 तक UP की $6 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

यह अभियान 5 सितंबर से 5 अक्टूबर तक चलेगा और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इसे होर्डिंग, अखबार, रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया के जरिए प्रचारित किया जाएगा।

प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने विजन डॉक्यूमेंट का खाका पेश करते हुए कहा कि राज्य का लक्ष्य 2047 तक अपनी अर्थव्यवस्था को 6 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाना है। उन्होंने बताया कि यह यह दस्तावेज तीन स्तंभों पर टिका है जिसमें आर्थिक ताकत, इनोवेशन और जीवंतता शामिल हैं। यह एक सामूहिक विजन होगा, जो जनता के विचारों से ही बनाया जाएगा।



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