हिमंता सरमा मुस्लिम

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बयान में कहा कि यदि मौजूदा स्थिति के अनुसार जनसंख्या में बढ़ोतरी होती रहेगी तो 2041 तक असम में मुस्लिम जनसंख्या हिंदुओं के बराबर हो जाएगी। उनका दावा है कि इससे मुस्लिम आबादी लगभग 50% तक हो जाएगी।

डिब्रूगढ़ में प्रेस से बात करते हुए सीएम सरमा ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 2011 में असम की कुल जनसंख्या 3.12 करोड़ थी, जिसमें मुस्लिम जनसंख्या 1.07 करोड़ (लगभग 34.22%) और हिंदू जनसंख्या 1.92 करोड़ (लगभग 61.47%) थी।

3% ही असम के मूल निवासी

सीएम सरमा ने कहा कि असम में रहने वाले महज 3% मुस्लिम ही असमिया मूल के हैं, जबकि 31% मुस्लिम आबादी घुसपैठिए हैं जो मुख्यतः बांग्लादेश से आए हैं।

उन्होंने इस बात की भी आशंका जताई कि अगर इसी तरह चलता रहा तो 2021, 2031 और 2041 तक असम की जनसंख्या में 50 फीसदी तबका मुस्लिम होगा और हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक बन जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 1951 से अब तक असम की जनसंख्या संरचना में काफी बड़े बदलाव आए हैं। मुस्लिम बहुल जिलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2001 में असम के 23 जिलों में से 6 मुस्लिम बहुल थे। इनमें धुबरी (74.29), गोलपारा (53.71), बारपेटा (59.37), नगांव (51), करीमगंज (52.3) और हैलाकांडी (57.63) थी।

2011 में जिलों की संख्या 27 हुई और इनमें 9 जिले मुस्लिम बहुल हो गए। इस समय के अनुसार मुस्लिम जिलों की आबादी में धुबरी (79.67), गोलपारा (57.52), बारपेटा (70.74), मोरिगांव (52.56), नगांव (55.36), करीमगंज (56.36), हैलाकांडी (60.31), बोंगाईगांव (50.22) और दारंग (64.34) शामिल हो गए। सीएम सरमा का कहना है कि वर्तमान में जिलों की संख्या कम से कम 11 तक पहुँच गई है।

असम की पहचान पर है हमला

सीएम सरमा ने जनसांख्यिकीय बदलाव पर कहा कि ये सिर्फ ‘भूमि जिहाद’ ही नहीं बल्कि असम को खत्म करने वाला जिहाद है। योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिम आबादी सरकारी और जंगलों की जमीन पर भी कब्जा कर रही है। इसके कारण असम की सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक पहचान खतरे में पड़ गई है। अगर यही प्रवृत्ति जारी रही तो अगले 20 वर्षों में असम के मूल निवासी अल्पसंख्यक बन सकते हैं।

इससे पहले भी सीएम हिमंता ने अतिक्रमण अभियान पर कहा था कि असम में लगभग 29 लाख बीघा यानी लगभग 10 लाख एकड़ भूमि पर अतिक्रमण है। इन पर अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए और संदिग्ध नागरिक रह रहे हैं। असम में बाहर से आए हुए मुस्लिमों को ‘मियाँ’ कहा जाता है।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि ये लोग अपने मूल जिलों में जमीन होने के बावजूद सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर अवैध रूप से बस जाते हैं और फिर वहाँ की मतदाता सूची में नाम दर्ज करवा लेते हैं। इसके बाद जैसे-जैसे इनकी संख्या बढ़ती है, वैसे-वैसे ये एक बड़ा वोट बैंक बन जाते हैं। इसके कारण स्थानीय राजनीतिक पार्टियाँ उनके खिलाफ कार्रवाई करने से बचती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया कॉन्ग्रेस के संरक्षण में वर्षों से चल रही है। जहाँ-जहाँ जनसांख्यिकीय बदलाव हुआ है, वहाँ कॉन्ग्रेस को अचानक अधिक वोट मिलने लगे हैं।

सरमा ने बताया कि उनकी सरकार ने मई 2021 से अब तक 1,19,548 बीघा (लगभग 160 वर्ग किलोमीटर) भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। ये जमीन ज्यादातर वन भूमि है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी भी लाखों बीघा भूमि अतिक्रमण के अधीन है, और सरकार इसे भी मुक्त कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनसंख्या नियंत्रण और भूमि अधिकारों से जुड़े कानूनों पर विचार कर रही है, ताकि असम की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना को बचाया जा सके।



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