युद्ध से बचकर शांति की तलाश में अमेरिका आईं 23 साल की यूक्रेनी लड़की इरीना ज़ारुत्स्का की हत्या कर दी गई है। यह घटना 22 अगस्त 2025 को अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में एक ट्रेन स्टेशन पर हुई। पुलिस ने बताया कि 34 वर्षीय डिकार्लोस ब्राउन जूनियर नाम के एक शख्स ने चाकू से कई बार हमला कर इरीना को मार डाला।
यह घटना सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई, लेकिन अमेरिकी मीडिया ने इस पर कोई खास कवरेज नहीं दी, जिससे लोगों में नाराजगी है। ऐसा लगा जैसे यह खबर उनके लिए सामान्य थी। शार्लेट-मेक्लेनबर्ग पुलिस विभाग के मुताबिक, इरीना की मौत ईस्ट/वेस्ट बुलेवार्ड लाइट रेल स्टेशन पर हुई।
14 बार जा चुका जेल अपराधी
हिंसक वारदातों में शामिल डिकार्लोस ब्राउन को इरीना की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 34 साल के डिकार्लोस पर पहले भी कई आपराधिक आरोप लग चुके हैं। वह 2011 से अब तक चौदह बार गिरफ्तार हो चुका है। उस पर चोरी, लूटपाट और धमकी देने जैसे आरोप हैं। एक मामले में तो उसे पाँच साल की जेल भी हुई थी।
The murderer of Iryna Zarutska had been arrested FOURTEEN TIMES before.
It’s beyond ridiculous that this monster had not yet been permanently locked up.
The state is partly responsible for her death. pic.twitter.com/R76y2yYFKU— iamyesyouareno (@iamyesyouareno) September 6, 2025
डिकार्लोस ब्राउन पर 911 इमरजेंसी नंबर का गलत इस्तेमाल करने का भी आरोप है। एक बार उसने पुलिस को फोन करके कहा था कि उसके अंदर ‘कुछ इंसानों द्वारा बनाया हुआ सामान’ है, जिसकी जाँच होनी चाहिए। पुलिस ने बताया कि उसे एक मेडिकल समस्या है और वे उसकी मदद नहीं कर सकते। उस पर लगे कई पुराने आरोप कोर्ट ने हटा दिए थे।
लोगों ने मेनस्ट्रीम मीडिया की चुप्पी पर उठाए सवाल
इरीना की हत्या का वीडियो ऑनलाइन वायरल होने के बाद, लोगों ने आरोपित के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को ढूँढ निकाला। इस घटना पर, आरोपित के खिलाफ पुराने मामले हटाए जाने और अमेरिकी मीडिया की चुप्पी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी गुस्सा है।
एक्स (पहले ट्विटर) पर एक यूजर ने लिखा, “इरीना ज़ारुत्स्का की हत्या पर मीडिया की चुप्पी झूठ का सबसे घिनौना रूप है, जिसे मैंने पहले भी देखा है। ये वही लोग है जिन्होंने डैनियल पेनी को लेकर लगातार नकारात्मक कवरेज किया था और वे ही इस मामले में चुप हैं। यह भी सच है कि आप मीडिया से उतनी नफरत नहीं करते जितनी करनी चाहिए।”
The media silence on Iryna Zarutska's murder is one of the most disgusting acts of lying by omission I've ever seen.
From the people who gave you the Daniel Penny wall-to-wall negative coverage and the BLM moral panic.
It's true what they say: you don't hate the media enough.— Konstantin Kisin (@KonstantinKisin) September 8, 2025
एक और यूजर ने लिखा, “अगर एक्स नहीं होता, तो मैं कभी इरीना ज़ारुत्स्का के बारे में नहीं जान पाती। ये पुराने मीडिया चैनल बेकार हैं।”
If it weren’t for 𝕏, I never would have heard of Iryna Zarutska. Fuck legacy media. pic.twitter.com/xGOF1rq26s
— Tiffany Fong (@TiffanyFong_) September 7, 2025
‘एंड वोकेनेस’ नाम के एक और यूज़र ने अमेरिका के बड़े मीडिया संस्थानों का नाम लेते हुए बताया कि किसी ने भी इस क्रूर हत्या को नहीं दिखाया। उन्होंने लिखा, “AP, पीबीएस, न्यूयॉर्क टाइम्स, एनपीआर, वाल स्ट्रीट जर्नल, BBC, सीएनएन, वाशिंगटन पोस्ट, रॉयटर्स और एमसएनबीसी में से किसी ने भी इस हमले पर एक भी खबर नहीं दी।”
0 AP stories on this deadly attack
0 PBS stories on this deadly attack
0 NYT stories on this deadly attack
0 NPR stories on this deadly attack
0 WSJ stories on this deadly attack
0 BBC stories on this deadly attack
0 CNN stories on this deadly attack
0 WAPO stories on this… pic.twitter.com/962qmFOBNm— End Wokeness (@EndWokeness) September 7, 2025
टेस्ला और एक्स के मालिक एलन मस्क ने भी इस मामले में अपनी बात रखी। उन्होंने उन जजों की आलोचना की जिन्होंने पहले आरोपित डिकार्लोस पर लगे आरोप हटा दिए थे। मस्क ने कहा, “आइए कानून बदलें। तब तक उन जजों और वकीलों को शर्मिंदा करें जो हत्या, बलात्कार और डकैती को बढ़ावा देते हैं। और खासकर उन लोगों को शर्मिंदा करें जिन्होंने उनके चुनाव अभियानों को पैसा दिया। इससे सबसे बड़ा फर्क पड़ेगा।”
Let’s change the law.
Between now and then, name and shame the DAs and judges who enable murder, rape and robbery.
But especially shame those who funded the campaigns of the DAs and judges. That will make the biggest difference. https://t.co/SirIuQcs2S— Elon Musk (@elonmusk) September 8, 2025
एक और पोस्ट में मस्क ने अमेरिकी मीडिया पर इरीना की हत्या को नहीं दिखाने के लिए निशाना साधा। उन्होंने एक पोस्ट को शेयर किया जिसमें बताया गया था कि किसी भी बड़े मीडिया संस्थान ने इस पर कोई खबर नहीं लिखी। उन्होंने बस ‘जीरो’ (शून्य) लिखकर अपनी राय दी। यह साफ नहीं है कि अमेरिकी मीडिया ने इस खबर को क्यों नहीं दिखाया, जबकि विदेशी मीडिया ने इसे कवर किया। कुछ लोगों का मानना है कि यह इसलिए हुआ क्योंकि आरोपित एक काला बेघर व्यक्ति था और पीड़ित एक व्हाइट शरणार्थी थी।
इस बीच, शार्लेट शहर की मेयर, वी लाइल्स ने एक एक्स पोस्ट में मीडिया संस्थानों को धन्यवाद दिया कि उन्होंने इरीना की हत्या का वीडियो नहीं दिखाया। इस पर लोगों ने मेयर की आलोचना की। उनका कहना था कि मेयर को वीडियो के वायरल होने की चिंता है, न कि आरोपित और उन जजों पर कार्रवाई करने की जिन्होंने उसे कई आपराधिक आरोपों के बावजूद सड़कों पर रहने दिया।
The video of the heartbreaking attack that took Iryna Zarutska’s life is now public. I want to thank our media partners and community members who have chosen not to repost or share the footage out of respect for Iryna’s family.
This was a senseless and tragic loss. My prayers…— Mayor Vi Lyles (@CLTMayor) September 6, 2025
कई लोग इस तरह की घटनाओं में एक जैसा पैटर्न देख रहे हैं। हाल ही में जर्मनी के फ्रीडलैंड शहर में एक यूक्रेनी लड़की को ट्रेन के आगे धक्का दिया गया था। यूक्रेन के द कीव इंडिपेंडेंट के मुताबिक, एक 31 साल के इराकी नागरिक ने 16 साल की यूक्रेनी शरणार्थी लड़की को ट्रेन की पटरी पर धकेल दिया, जिससे वह 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही ट्रेन से टकरा गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि आरोपित को सिज़ोफ्रेनिया नाम की मानसिक बीमारी है।
क्या अपराध की गंभीरता से ज्यादा, पीड़िता और अपराधी की नस्ल ज्यादा मायने रखती है?
कुछ लोगों का मानना है कि अमेरिका के बड़े मीडिया संस्थान किसी भी अपराध को दिखाने से पहले अपराधी और पीड़ित की नस्ल देखते हैं। शायद उन्हें डर था कि अगर वे इस खबर को दिखाते तो लोग आरोपित की नस्ल, उसके पुराने अपराधों, पीड़ित के व्हाइट होने और शरणार्थी होने की बात पर जोर देते। ऐसा लगता है कि उनके लिए अपराध की खबर दिखाने से ज़्यादा उनका अपना ‘प्रगतिशील एजेंडा’ ज्यादा महत्वपूर्ण है।
अगर अपराधी गोरा होता और पीड़ित काली, तो ये मीडिया संस्थान अब तक हंगामा मचा चुके होते। वे ‘गोरे वर्चस्व’ और नफरत पर लेख लिखते। जैसा कि ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ आंदोलन के दौरान हुआ था, ठीक उसी तरह सड़कों पर प्रदर्शन होने लगते और मीडिया इसे दिन-रात दिखाता।


