बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार कोई नई बात नहीं है। पहले भी खबरें आती रही हैं कि दुर्गा पूजा के समय मंदिरों पर हमला हुआ, घरों में आग लगाई गई और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया। लेकिन, अब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा बहुत तेजी से बढ़ गई है।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद नाम के एक संगठन ने गुरुवार (10 जुलाई, 2025) को बताया कि 4 अगस्त 2024 से लेकर पिछले 330 दिनों में कुल 2,442 हिंसक घटनाएँ हुई हैं। यह वो समय था जब बांग्लादेश में बहुत राजनीतिक उथल-पुथल चल रही थी और प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार बदल गई थी।
हिंसा का स्वरूप और आँकड़े
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिषद ने बताया कि ज्यादातर हिंसा पिछले साल 4 अगस्त से 20 अगस्त के बीच हुई। इन हमलों में लोगों की हत्याएँ हुईं। सामूहिक बलात्कार सहित कई यौन हमले हुए। पूजा स्थलों पर हमला किया गया। लोगों के घर और व्यापार छीन लिए गए। हिंदू धर्म के अपमान के आरोप में गिरफ्तारियाँ भी हुईं।
अल्पसंख्यकों को संगठनों से जबरदस्ती हटाया गया। इन हमलों के शिकार बनने वाले अल्पसंख्यक समुदायों में पुरुष, महिलाएँ और किशोर सभी शामिल थे।
रिपोर्ट पर युनुस सरकार की चुप्पी
परिषद ने बताया कि 4 अगस्त 2024 से 31 दिसंबर 2024 के बीच 2184 हिंसक घटनाएँ हुईं। वहीं, 2025 के पहले छह महीनों में 258 और घटनाएँ दर्ज की गईं। इसका मतलब है कि 4 अगस्त 2024 से अब तक कुल 2442 हिंसक घटनाएँ हो चुकी हैं।
2025 की घटनाओं में 20 बलात्कार के मामले थे। हिंदू पूजा स्थलों पर 59 बार हमले हुए। जनजातीय समुदायों पर भी 12 बार हमला किया गया।
परिषद का आरोप है कि सरकार ने कुछ नहीं किया। परिषद ने कहा कि सरकार ने इन घटनाओं को ‘झूठ’ कहकर पलड़ा झाड़ा था। इससे हमलावरों को और हिम्मत मिली। अल्पसंख्यक समुदायों में डर का माहौल बढ़ा।
हिंसा के 88 मामलों में अब तक 70 लोगों को पकड़ा गया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार यानि मोहम्मद यूनुस ने अभी तक परिषद की इस नई रिपोर्ट पर कोई जवाब नहीं दिया है।
बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय
2022 की जनगणना के मुताबिक, बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय हैं। वे कुल आबादी का 7.95% हैं। उनके बाद बौद्ध (0.61%) और ईसाई (0.30%) आते हैं।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद अल्पसंख्यकों का सबसे पुराना संगठन है। यह 1960 के दशक में शुरू हुआ था। तब सांप्रदायिक घटनाएँ बढ़ रही थीं। यह संगठन हमेशा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाता रहा है।