सरोगेसी के नाम पर हैदराबाद फर्टिलिटी क्लिनिक ने दंपती से 35 लाख रुपए लेकर उन्हें किसी और का बच्चा दे दिया दे दिया है। पुलिस जाँच में पता चला कि बच्चा एक गरीब परिवार से मात्र 90,000 रुपए में खरीदा गया था और उसे दंपत्ति को उनके बेटे के रूप में दे दिया गया।
DNA जाँच में जब सच्चाई सामने आई तो दंपती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला सामने आया। पुलिस जाँच में ये पता चला की यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी सेंटर अवैध सरोगेसी रैकेट बिना किसी लाइसेंस के चल रहा था।
मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अन्य कई दंपतियों की जाँच जारी है, पुलिस को शक है कि और भी लोगों को इसी तरह ठगा गया होगा।
𝗜𝗹𝗹𝗲𝗴𝗮𝗹 𝗦𝘂𝗿𝗿𝗼𝗴𝗮𝗰𝘆 & 𝗕𝗮𝗯𝘆 𝗦𝗲𝗹𝗹𝗶𝗻𝗴 𝗥𝗮𝗰𝗸𝗲𝘁 𝗕𝘂𝘀𝘁𝗲𝗱 𝗯𝘆 𝘁𝗵𝗲 𝗡𝗼𝗿𝘁𝗵 𝗭𝗼𝗻𝗲 𝗣𝗼𝗹𝗶𝗰𝗲.
Gopalapuram Police, with support from the Medical & Health Dept., busted a major illegal surrogacy and baby-selling racket operated by Dr. Athaluri… pic.twitter.com/TFSW3BEK80— Hyderabad City Police (@hydcitypolice) July 27, 2025
झूठी सरोगेसी और जाली दस्तावेज
राजस्थान के एक दंपती ने अगस्त 2024 में हैदराबाद स्थित यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी सेंटर से संपर्क किया। क्लिनिक की संचालिका डॉ अथलुरी नम्रता ने उन्हें सरोगेसी का सुझाव दिया और आश्वासन दिया कि प्रक्रिया में उनके ही भ्रूण का प्रत्यारोपण किया जाएगा।
इलाज के नाम पर दंपती से करीब 35 लाख रुपये वसूले गए और बताया गया कि एक सरोगेट माँ गर्भवती है। जून 2025 में उन्हें बताया गया कि विशाखपटनम में सरोगेट ने एक बेटे को जन्म दिया है। बच्चे को सौंपने से पहले दो लाख रुपये प्रसव के नाम पर लिया गया और साथ ही एक जाली जन्म प्रमाण पत्र भी दिया गया, जिसमें बच्चे को उनका अपना बेटा (जैविक पुत्र) बताया गया था।
शंका होने पर दंपती ने दिल्ली की फोरेंसिक लैब में DNA परीक्षण कराया, जिसमें साफ हुआ कि बच्चे का दंपती से कोई बोयोलॉजिकल रिश्ता नहीं है। जब उन्होंने क्लिनिक से स्पष्टीकरण माँगा तो डॉ नम्रता ने बातचीत बंद कर धमकी देना शुरू कर दिया। इसके बाद दंपती ने गोपालपुरम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
पुराने मामले और अवैध नेटवर्क का भंडाफोड़
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए डॉ नम्रता, उनके बेटे पी जयंत कृष्णा, सरकारी गाँधी अस्पताल के डॉक्टर नरगुला सदानंदम, एजेंट धनश्री संतोषी, दो क्लिनिक कर्मचारियों और बच्चे के बोयोलॉजिकल माता-पिता सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया।
रिपोर्ट के अनुसार, जाँच में पता चला कि बच्चा असम के एक गरीब परिवार से 90,000 रुपये में खरीदा गया था और माँ को प्रसव के लिए विशाखपटनम भेजा गया। दो दिन बाद बच्चे को दंपती को सौंप दिया गया।
डॉ नम्रता पहले भी दो बार विवादों में रह चुकी हैं। 2016 में एक NRI दंपती ने उन पर फर्जी सरोगेसी का आरोप लगाया था, जिसके चलते उनका लाइसेंस पाँच साल के लिए निलंबित किया गया। 2020 में उन्हें विशाखापटनम पुलिस ने नवजात बच्चों की तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया था। अब तक उनके खिलाफ हैदराबाद, विशाखपटनम और गुंटूर में दस से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त छापेमारी में पाया गया कि क्लिनिक बिना वैध लाइसेंस के IVF, भ्रूण निर्माण, लिंग परीक्षण, MTP जैसी संवेदनशील प्रक्रियाएँ चला रहा था। क्लिनिक के भीतर लिंग परीक्षण उपकरण, नाइट्रस ऑक्साइड सिलेंडर और अन्य अवैध उपकरण बरामद हुए हैं।
कैसे चलता था फर्जीवाड़ा और आगे की कार्रवाई
क्लिनिक दंपतियों को यह भरोसा दिलाता था कि उनके ही भ्रूण से बच्चा जन्मेगा। लेकिन वास्तव में किसी भी सरोगेट माँ से संबंध नहीं होता था और गरीब महिलाओं से नवजात बच्चे खरीदकर उन्हें सौंपा जाता था।
क्लिनिक की ओर से लगातार झूठी जानकारी दी जाती थी कि गर्भावस्था सामान्य चल रही है। जब ग्राहक सवाल उठाते तो उन्हें धमकाया जाता था। स्वास्थ्य विभाग ने क्लिनिक को सील कर दिया है और अन्य शाखाओं कोंडापुर, विजयवाड़ा और विशाखपटनम में भी जाँच चल रही है।
DCP रश्मि पेरुमल ने बताया कि उन सभी दंपतियों की जाँच की जा रही है जिन्होंने क्लिनिक की किसी भी शाखा से IVF या सेरोगेसी सेवा ली थी। पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि एक बड़े सरोगेसी-तस्करी रैकेट का हिस्सा है, जो वर्षों से गरीबों का शोषण कर रहा है।