पहले बात करते हैं यादगीर जिले के तलावरगेरे गाँव की जहाँ एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता। बावजूद इसके वहाँ हिंदू समुदाय ने सांप्रदायिक सौहार्द का परिचय देते हुए पूरे श्रद्धा और उत्साह से मुहर्रम मनाया। यह परंपरा साल 1925 से चली आ रही है। कहा जाता है कि उस समय एक सूफी संत ने गाँव में दर्शन दिए थे और वादा किया था कि अगर उन्हें गाँव में स्थापित किया जाए तो प्लेग और सूखे से मुक्ति मिलेगी। इसके बाद ग्रामीणों ने ऐसा ही किया। ग्रामीण उनके कहे मुताबिक मुहर्रम मनाते हैं। दशकों से चली आ रही ये परंपरा आज भी कायम है।
गाँववाले हर साल छह दिन तक चलने वाला मुहर्रम उत्सव मनाते हैं। इसमें हजारों की संख्या में हिंदू श्रद्धालु शामिल होते हैं, जुलूस निकालते हैं, गीत गाते हैं, और हसन, हुसैन के प्रतीक रूप में पारंपरिक अलाई के पुतले लेकर चलते हैं। गाँव के मजहबी स्थलों की रंगाई -पुताई की जाती है, प्रसाद बाँटा जाता है और आस-पास के गाँवों से भी लोग आकर संत से आशीर्वाद लेते हैं।
अब बात करते हैं शिवमोग्गा की जहाँ भगवान गणेश की प्रतिमा को मुस्लिम युवक ने तोड़ डाला और नागारा की प्रतिमा को नाले में फेंका गया।
शिवमोग्गा में मूर्तियों का अपमान, हिंदुओ में आक्रोश
3 जुलाई 2025 को शिवमोग्गा जिले के राघीगुड्डा के बंगरप्पा ले आउट में सैयद नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा भगवान गणेश की मूर्ति पर पैर रखने और नागारा की मूर्ति को नाले में फेंकने की घटना सामने आई। ये मूर्तियाँ सार्वजनिक पार्क में स्थानीय लोगों ने स्थापित की थी।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ। वीडियो में सैयद यह कहते हुए दिखाई दे रहा है “हम अपने घर के बाहर मंदिर क्यों देखें?” हालाँकि जानकारी के अनुसार बाद में उसने इसके लिए माफी माँगी।
पुलिस ने इस मामले में सैयद और उसके साथी रहमतुल्ला को हिरासत में ले लिया है। स्थानीय विधायक एस. एन. चन्नाबसप्पा और पूर्व उपमुख्यमंत्री के. एस. ईश्वरप्पा ने मौके पर जाकर घटना की निंदा की और सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस अधीक्षक (SP) मिथुन कुमार ने बताया कि जाँच चल रही है और आरोपितों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
जहाँ यादगीर जैसे गाँव साझा परंपराओं और विश्वास की मिसाल बन रहे हैं, वहीं शिवमोग्गा की घटना ने यह याद दिला दिया कि अगर नफरत को समय रहते रोका न जाए, तो वह समाज में जहर घोल सकती है।