उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में प्रसिद्ध खेरेश्वर धाम मंदिर में महाशिवरात्रि मेले के दौरान हुए एक विवाद के बाद मंदिर कमेटी ने बड़ा फैसला लिया है। अब मंदिर परिसर में मुस्लिमों के दुकानदारों को दुकान लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दरअसल परिसर में एक मुस्लिम युवक ने पहचान छिपाकर महिलाओं के अंडरगारमेंट्स की दुकान लगा रखी थी। मामला सामने आने के बाद कमेटी ने साफ कर दिया है कि आगे से दुकानों का आवंटन आधार कार्ड देखकर ही होगा।
कैसे बढ़ा विवाद
महाशिवरात्रि पर खेरेश्वर धाम में हर साल की तरह इस बार भी भव्य मेले का आयोजन हुआ था। लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुँचे थे। मेले में झूले, खानपान और घरेलू सामान की दुकानों के साथ कपड़ों की दुकानें भी लगी थीं। इसी दौरान एक मुस्लिम युवक ने अपना नाम अमन बताकर दुकान ली, जबकि बाद में उसका नाम अरमान निकला।
करणी सेना के युवा जिलाध्यक्ष सचिन राघव अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुँचे और दुकान का विरोध किया। आरोप है कि युवक महिलाओं के अंडरगारमेंट्स बेच रहा था। विवाद इतना बढ़ा कि माइक लेकर घोषणा की गई और दुकान बंद कराई गई।
मौके पर मौजूद पुलिस ने माहौल बिगड़ने की आशंका में कार्रवाई की और करणी सेना के युवा जिलाध्यक्ष सचिन राघव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया।
कमेटी का फैसला: आधार कार्ड देखकर मिलेगी दुकान
मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष देवेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि अब भविष्य में किसी भी दुकानदार को बिना पहचान पत्र देखे जगह नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि पहले भी ठेकेदारों को हिदायत दी गई थी कि किसी मुस्लिम को दुकान लगाने की अनुमति न दी जाए, लेकिन आरोपित ने अपनी पहचान छिपाकर दुकान लगा ली।
कमेटी के अध्यक्ष गहराज सिंह ने कहा कि श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। मंदिर परिसर में जगह-जगह बोर्ड लगा दिए गए हैं, जिनमें लिखा है कि मुस्लिम को दुकान लगाने की अनुमति नहीं है।
VHP का प्रदर्शन और कार्रवाई की माँग
विश्व हिंदू परिषद ने भी इस मामले को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। ब्रज प्रांत मीडिया प्रमुख प्रतीक रघुवंशी के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा गया और दुकानदार व ठेकेदार पर कार्रवाई की माँग की गई।
VHP नेताओं का कहना है कि मंदिर परिसर की पवित्रता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
