असम सीएम अतिक्रमण

असम सरकार ने गोलाघाट और उरियमघाट में बेदखली अभियान तेज कर दिया है। असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने गोलागाट के रिजर्व वन के 11,000 बीघा जमीन से 2000 से अधिक परिवारों को हटाने और 3,600 एकड़ वन भूमि को खाली करने का अभियान शुरू करने की कवायद तेज कर दी है।

गोलाघाट के रेंगमा रिजर्व फॉरेस्ट असम-नागालैंड सीमा पर स्थित है। यहाँ लगभग 2,000 अवैध घुसपैठिए परिवारों ने कब्जा कर लिया था। इसके कारण लगभग 3,600 एकड़ (11,000 बीघे) जमीन पर अवैध कब्जा जमा हुआ था। इस जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है।

11,000 बीघे जमीन पर लगभग 2,000 घुसपैठिए परिवारों के कब्जे को हटाने के लिए लगभग 1,500 परिवारों को 7 दिन का नोटिस दिया गया था। इनमें से 80% से अधिक परिवारों ने पहले से ही घर खाली कर दिए। इसके अलावा लगभग 500 परिवारों के पास फॉरेस्ट राइट्स कमेटी (एफआरसी) से प्रमाणपत्र हैं। वे कानूनी रूप से जंगल क्षेत्र में रह रहे हैं।

गोलाघाट जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरुपथार उप-मंडल में असम-नगालैंड सीमा पर उरियमघाट में रेंगमा वन अभयारण्य की लगभग 11,000 बीघा (3,600 एकड़ से अधिक) भूमि पर अतिक्रमण को हटाने के लिए मंगलवार (29 जुलाई 2025) की सुबह से बेदखली अभियान शुरू किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिद्यापुर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान अवैध मकानों को तोड़ा जा रहा है। स्थानीयों के अनुसार, जिनके पास एफआरसी प्रमाणपत्र हैं वे बोडो, नेपाली समेत अन्य जनजातीय समुदायों से हैं। इसके अलावा स्थानीयों ने यह भी कहा कि जिनके घर अतिक्रमण के तहत तोड़े जा रहे हैं वे लगभग सभी मुस्लिम समुदाय से हैं।

अतिक्रमण को हटाने के लिहाज से क्षेत्र में वन विभाग के कर्मियों के साथ काफी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किया गया है। इस दौरान 12 गाँवों के 2648 अवैध घरों को तोड़ने की तैयारी है। इन गाँवों में – सोनारीबिल टॉप, नंबर 2 पिथाघाट, नंबर 2 और नंबर 3 दयालपुर, दलानपाथर, खेरबारी, विद्यापुर, विद्यापुर बाजार, नंबर 2 मधुपुर, आनंदपुर, राजापुखुरी और गेलाजा शामिल हैं।

असम सरकार का कहना है कि जंगल की जमीन को अतिक्रमणकारियों ने सुपारी की खेती के लिए साफ कर दिया था। जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा जमा लिया गया। इसके कारण असम की सांस्कृतिक पहचान को भी खतरा है। यह इलाका रेंगमा रिजर्व फॉरेस्ट का हिस्सा है, जो पारिस्थितिकीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बेदखली अभियान को लेकर 21 जुलाई 2025 को बयान दिया था कि पिछले चार वर्षों में राज्य में 1.29 लाख बीघा भूमि से अतिक्रमण हटाया गया है, जबकि अभी भी 29 लाख बीघा भूमि पर अभी भी अतिक्रमण है।

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