पटना के गाँधी मैदान में 29 जून 2025 को वक्फ कानून के विरोध में एक रैली आयोजित की गई। ‘वक्फ बचाओ, दस्तूर बचाओ’ रैली में तेजस्वी यादव, पप्पू यादव, AIMIM के अख्तरुल ईमान समेत विपक्ष के कई बड़े नेता इस रैली का हिस्सा बने।
इमारत-ए-शरिया नाम के एक मजहबी संगठन की ओर से आयोजित की गई इस रैली में बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ और लोग शामिल हुए। हालाँकि वक्फ से परे इस रैली का असली मकसद बिहार का विधानसभा चुनाव 2025 था।
बिहार में कुल 18 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। ये किसी भी पार्टी का खेल बनाने या बिगाड़ने में अपनी अहम भूमिका निभा स कती है। बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 में 243 विधानसभा सीटों में लगभग 48 सीटों पर मुस्लिम वोटरों का बहुल है।
इन सीटों पर 20-40% या कुछ जगहों पर उससे भी अधिक मुस्लिम आबादी शामिल है। इसी के कारण RJD, कॉन्ग्रेस और AIMIM के नेता इस रैली में शामिल होकर मुस्लिम वोटर्स को अपने हक में करने की हर जुगत भिड़ाती दिखी।
रैली में BJP पर जमकर निशाना साधा गया। तेजस्वी यादव ने तो अपने वोटर्स को लुभाने के लिए गजब का नारा ही परोस दिया। उन्होंने कहा, “ये देश किसी के बाप का नहीं है। ये हम सबका हिंदुस्तान है।” अपने भाषण में तेजस्वी यादव ने जमकर जहर उगला। मुस्लिम वोटर्स को लुभाने के चक्कर में वह ये तक कह गए कि उनकी सरकार बनने पर वक्फ संशोधन अधिनियम को कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा।
वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ पटना में हुए ज़ोरदार प्रदर्शन में शामिल हुआ।
धार्मिक भेदभाव पर आधारित किसी भी कानून का लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। हमारे मुस्लिम भाई-बहन अकेले नहीं हैं, अन्याय, अत्याचार और नफ़रत के खिलाफ लड़ाई में हम उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनसे भी आगे खड़े… pic.twitter.com/x9S3s5HSOK— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) March 26, 2025
बीजेपी पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि BJP न सिर्फ वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है पर साथ ही मुस्लिमों, पिछड़ों और दलितों के वोट देने के अधिकार को भी छीनना चाहती है। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में बदलाव कर 4.7 करोड़ गरीबों को वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है।
अपने भाषण में तेजस्वी ने ऐलान कर दिया कि बिहार में उनकी सरकार बनेगी तो वे इस वक्फ संशोधन कानून को लागू ही नहीं होने देंगे। रैली का हिस्सा कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान खा प्रतापगढ़ी भी रहे। उन्होंने वक्फ संसोधन बिल को बर्बादी कारण बता दिया और मुसलमानों के लिए इसे नामंजूर करार दे दिया।
इनके साथ AIMIM के नेता अख्तरुल ने कहा कि ये बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ साजिश है। ये वक्फ बोर्ड की आजादी छीनता है। बात इन दो-चार बयानों पर नहीं रुकी। सीपीआई माले के दीपंकर भट्टाचार्य ने बिल को हिंदुस्तान पर हमला बता दिया।
वहीं, राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी खुद ही अपने पक्ष में करार दे दिया। उन्होंने कहा कि वे उम्मीद कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में इस बिल के खिलाफ फैसला उनके पक्ष में आएगा।
कुल मिलाकर रैली में भड़काऊ बयानबाजी चरम पर रही। शरिया, वक्फ और मुस्लिम अधिकारों की बातें उठाकर हर पार्टी के नेता मुस्लिम वोटों को अपने हक में लाने की भरसक कोशिश करते दिखे।
अपनी राजनीति और तुष्टिकरण में भले ही अलग अलग पार्टियाँ एक साथ आकर ये जताने की कोशिश कर रहीं थीं। लेकिन असल में इनमें से हर पार्टी का अपना अपना एजेंडा चल रहा था। इस राजनीति के चक्कर में बिहार में इन नेताओं ने हिंदू- मुस्लिम संघर्षों और सांप्रदायिक तलाव को किस कदर आग में झोंका इसका अंदाजा अब साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।
हिंसक संघर्षों में हुआ इजाफा
तेजस्वी यादव ने वक्फ बिल के विरोध में लोगों को सड़क पर उतरने तक की बात तक कह डाली थी। उन्होंने कहा कि RJD ने इस कानून का विरोध संसद में भी किया है। हम इस लड़ाई को हर जगह लड़ेंगे, चाहे वह सदन हो, सड़क हो या अदालत।
इस भड़काऊ बयान का असर इस कदर हुआ कि रैली के होने के 10 दिन के अंदर ही मजहबी हिंसा देखने को मिलने लगी। मोताहारी से लेकर कटिहार, भागलपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, अररिया समेत बिहार के कई क्षेत्रों में हिंदू-मुस्लिम संघर्ष और सांप्रदायिक तनाव अपने चरम पर पहुँच गए। कई जगहों पर तो हिंदुओं को अपनी जान तक गँवानी पड़ गई।
6 जुलाई 2025 को मोतिहारी के मेहसी थाना के तहत कनखट्टी बाजार में अजय यादव अपने भाइयों के साथ मुहर्रम का जुलूस देख रहे थे। इसी बीच मुहर्रम में करतब दिखा रहे कुछ लोगों से कहासुनी हो गई। इसके बाद हिंदुओं पर तलवार से हमला कर दिया गया। अजय यादव के गले पर तलवार से वार किया गया। इससे उनकी मौत हो गई। इसके बाद 12 लोगों को हिरासत में लिया गया।
इसी दिन मुहर्रम के जुलूस के दौरान कटिहार में महावीर मंदिर पर पत्थरबाजी की गई। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म पर वायरल हुआ। इसमें मुस्लिम युवक मंदिर के साथ कई घरों और दुकानों पर पथराव करते दिखे। इसके बाद हिंदू समुदाय में आक्रोश देखा गया। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया।
दरभंगा में मुहर्रम जुलूस के दौरान एक ASI को चाकू मार दिया गया। इसी में बिजली के तार की चपेट में आने से एक आदमी की मौत भी हो गई।
मुजफ्फरपुर के बरियापुर में भी हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच झड़प हुई। इसमें 2 लोग घायल हो गए। इसके बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया जिसके चलते भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
इसी तरह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक मुस्लिम व्यक्ति धमकी दे रहा है कि बिहार में मुस्लिम बहुल है। ऐसे में बिहार में वही होगा जैसा मुस्लिम समुदाय चाहेगा।
इसके साथ ही भागलपुर के लोदीपुर थाना क्षेत्र के उस्तू गाँव में अखाड़ा घुमाने को लेकर झड़प हुई। इसमें लाठी- डंडे चलने के साथ साथ फायरिंग भी हुई। इसके तहत 8 लोग घायल हुए। अररिया के फारबिसगंज में मुहर्रम जुलूस के दौरान दो गुटों के बीच पत्थरबाजी हुई और लाठियाँ चली। इसके बाद पुलिस को क्षेत्र में तैनात किया गया।
मुहर्रम जहाँ एक ओर मातम का संदेश देता है तो वहीं, मुजफ्फरपुर के मीनापुर थाना क्षेत्र से ताजिया जुलूस के दौरान फिलिस्तीन का झंडा लहराने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जुलूस हैदरे अखाड़ा की ओर से निकला। पुरानी पेठिया क़र्बला जाने के दौरान रास्ते में फिलिस्तीन का झंडा और कई हथियार लहराए गए। मामले पर मीनापुर थाना की पुलिस जाँच कर रही है।
बिहार में चुनाव नजदीक है। ऐसे में इस तरह की बयानबाजी, रैली, संघर्ष और सांप्रदायिक तनाव लोगों के मन में भावनात्मक तौर पर घर कर रहे हैं। इससे भले ही राजनीतिक पार्टियाँ अपने वोट बैंक साध रही हों लेकिन लोगों के बीच सामाजिकता का अभाव बढ़ता जा रहा है। नतीजा ये होगा कि किसी विपदा के समय भी ये समाज चाहकर भी एकजुट नहीं हो पाएगा।