लद्दाख प्रशासन द्वारा जमीन का आवंटन रद्द करने के कुछ ही दिनों बाद ही पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स ने ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक का समर्थन करना शुरू कर दिया है।
वांगचुक फरवरी 2025 में एक ‘क्लाइमेट कॉन्फ्रेंस’ में हिस्सा लेने पाकिस्तान गए थे। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के हालिया फैसले को ‘लद्दाख पर हमला‘ करार दिया था।
इस बीच, पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा अकाउंट्स झूठी कहानियाँ फैलाकर ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि सोनम वांगचुक को भारत सरकार द्वारा परेशान किया जा रहा है।

ये अकाउंट्स जानबूझकर भारत के आंतरिक मामले में दखल देकर यह प्रचार कर रहे हैं कि लद्दाख प्रशासन का फैसला एक ‘राजनीतिक चाल’ है, जिससे राज्य का दर्जा मांगने वाली आवाजों को दबाया जा सके।
क्या है पूरा विवाद?
साल 2018 में स्थानीय प्रशासन ने लेह के फियांग गाँव में करीब 135 एकड़ जमीन ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक और उनके हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (HIAL) को आवंटित की थी।
यह जमीन 40 साल की लीज पर दी गई थी लेकिन इस साल 21 अगस्त को लेह के डिप्टी कमिश्नर ने पूरा आवंटन रद्द कर दिया।
प्रशासन को यह सख्त कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि आवंटित की गई जमीन का इस्तेमाल उस काम के लिए नहीं हो रहा था, जिस पर दोनों पक्षों ने सहमति बनाई थी।
‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक आज तक उस 135 एकड़ जमीन पर मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी नहीं बना पाए हैं। साथ ही, उन्होंने न तो लीज एग्रीमेंट पर अमल किया और न ही जमीन को औपचारिक तौर पर तहसीलदार को सौंपा।
अपने आदेश में लेह के डिप्टी कमिश्नर रोमिल सिंह डोंक ने लिखा, “आवंटन आदेश 5-5-2019 को खत्म हो चुका है और आवंटन आदेश की शर्त संख्या IV के तहत इसे रद्द माना जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह जमीन अब ‘राज्य को सौंप’ दी गई है और तहसीलदार को निर्देश दिया गया कि वह जमीन को खाली कराए और राजस्व रिकॉर्ड में अपडेट करे।
‘विचहंट’ के झूठे दावे
लद्दाख प्रशासन के आदेश के बाद से ही ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक खुद को सरकारी दबाव का शिकार दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
उन्होंने दावा किया है, “HIAL का जमीन आवंटन रद्द करने का फैसला उस वक्त लिया गया है जब लद्दाख के लोग अपने अधिकार, सुरक्षा और लोकतंत्र की माँग कर रहे हैं। यह एक तरह से विचहंटिंग लगती है।”
इसी तरह के ‘विचहंट’ वाले दावे लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) जैसे राजनीतिक समूहों ने भी किए हैं। हालाँकि, हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
सच, जो सोनम वांगचुक नहीं बताना चाहते
‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक ने कई सालों से 135 एकड़ जमीन का किराया तक नहीं चुकाया है, जिसकी मौजूदा कीमत 27 से 30 करोड़ रुपए के बीच है। जबकि डिप्टी कमिश्नर ने क्लॉज 4(b) के तहत नोटिस भी जारी किए थे।
साथ ही, लीज एग्रीमेंट के एक साल के भीतर यूनिवर्सिटी भी नहीं शुरू की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि HIAL ने ‘यूनिवर्सिटी का दर्जा’ पाने के लिए आवेदन भी 2022 में किया, यानी आवंटन के 4 साल बाद।
इससे साफ झलकता है कि सोनम वांगचुक ने लीज एग्रीमेंट का पालन नहीं किया लेकिन फिर भी वे झूठे बहाने बनाकर प्रशासनिक अड़चनों का रोना रो रहे हैं।
इतना ही नहीं, HIAL ने 3 साल तक लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) से संपर्क नहीं किया। बल्कि सीधे लेह के डिप्टी कमिश्नर से बात करने की कोशिश की।
इसके अलावा, सोनम वांगचुक ने दावा किया कि HIAL को 14 करोड़ रुपए के प्रीमियम से छूट मिली थी। लेकिन LAHDC ने ऐसा कोई अनुरोध कभी मंजूर ही नहीं किया। इसलिए आधिकारिक रिकॉर्ड में किसी तरह की छूट मौजूद नहीं है।
असल में, HIAL के खिलाफ जमीन के गलत इस्तेमाल की शिकायतें दर्ज हुईं। फरवरी 2020 में फियांग गाँव के सरपंच और नम्बदार ने LAHDC को इस बारे में पत्र भी भेजा था।
इन हालात और लीज एग्रीमेंट के कई उल्लंघनों को देखते हुए लद्दाख प्रशासन को मजबूरन HIAL का आवंटन रद्द करना पड़ा।
‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक ने न तो लीज की शर्तों का पालन किया और न ही LAHDC की शिकायतों को सुलझाया। कई सालों तक भुगतान न करने के बावजूद अब वे राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनने का नाटक कर रहे हैं।
HIAL और सोनम वांगचुक की ये सारी गड़बड़ियाँ अब प्रशासनिक रिकॉर्ड, नोटिस और लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल के एग्जीक्यूटिव काउंसलर द्वारा दर्ज हो चुकी हैं।
पाकिस्तान से मिल रहा वांगचुक को समर्थन
यह साफ है कि ‘एक्टिविस्ट’ भले ही बौखलाए हुए हैं लेकिन असल चिंता की बात यह है कि सोनम वांगचुक को सीमा पार से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।
यह एक गंभीर मसला है क्योंकि पाकिस्तान आधे-अधूरे सच और साजिश की थ्योरी फैलाकर भारत में मतभेद पैदा करना चाहता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी हाल के दिनों में कई झूठ फैलाए गए हैं जिनका PIB ने खुलासा किया है।
‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक सच्चाई न बताकर सार्वजनिक संसाधनों के गलत इस्तेमाल को छिपाकर पाकिस्तान को भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने में मदद कर रहे हैं।