लगभग दो हफ्ते पहले राहुल गाँधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलीभगत करके, लाखों फर्जी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए हैं। उन्होंने दावा किया कि इनमें से कई लोगों के मतदाता पहचान पत्र में उनके घर के पते की जगह ‘0’ लिखा हुआ था। यानी ये फर्जी मतदाता थे, जिनके घर का पता नहीं था।
अपने आरोपों की पुष्टि के लिए राहुल गाँधी ने एक दस्तावेज भी दिखाया। उन्होंने दावा किया कि यह कर्नाटक के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची है। इसमें मकान नंबर ‘0’ वाले कई मतदाता हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार (17 अगस्त 2025) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गाँधी के दावों का खंडन किया। मकान संख्या ‘0’ को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि बेघर लोगों को ये नंबर दिया गया है। इनका पता स्पष्ट नहीं होता है।
चुनाव आयोग ‘मकान संख्या 0’ का इस्तेमाल इसलिए करता है ताकि वे मतदाता छूट न जाएँ, जिनके पास स्पष्ट रूप से घर का पता नहीं है या जिनका कोई घर नहीं है। ऐसे लोगों का चुनावी फॉर्म में पूरा पता दर्ज नहीं होता है। कई बार संयुक्त परिवार, साझा आवास या किराए के घरों में एक ही पते पर कई लोगों के नाम दर्ज होते हैं। ऐसे में एक ही पते पर कई मतदाताओं के नाम भी मिलते हैं।
2013 में शुरू मकान संख्या ‘0’
चुनाव आयोग ने मकान संख्या शून्य देने की शुरूआत 2013 में की थी। उस वक्त बेघर लोगों का मतदाता पहचान पत्र बनाने का काम शुरू हुआ। सबसे पहले दिल्ली में इसे लागू किया गया। पहली बार बेघर लोगों को मतदाता पहचान पत्र जारी किए गए।
एक ब्लॉक जिला अधिकारी (बीडीओ) ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मतदाता बनने के लिए किसी बेघर व्यक्ति को फॉर्म 6 भरना पड़ता है। वह जिस घर में रहता है, उसका निवास प्रमाण पत्र और बर्थ सर्टिफिकेट देना होगा। फॉर्म जमा करने के बाद, बीएलओ सत्यापन के लिए दिए गए पते पर जाता है।
दिल्ली में मकान संख्या ‘0’ वाले बेघर मतदाता
द इंडियन एक्सप्रेस ने राष्ट्रीय राजधानी के कुछ मतदाताओं से बात की, जिनके मतदाता पहचान पत्र में उनके घर के पते की जगह ‘0’ लिखा है। पश्चिम बंगाल से आए 67 वर्षीय अपूर्व चटर्जी ने बताया कि वह शंकर गली सीता राम बाजार के एक घर में रहते हैं, लेकिन उनके मतदाता पहचान पत्र में उनके घर के पते में ‘0’ लिखा है। चटर्जी ने ये भी कहा, “मैंने 2024 के लोकसभा चुनावों के साथ-साथ इस फरवरी में हुए दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी अपना वोट डाला था।”
रैन बसेरा बंगला साहिब आश्रय गृह में रहने वाले एक बेघर व्यक्ति ने भी मीडिया को बताया कि उसने घर के पते ‘0’ का इस्तेमाल करके एक बैंक खाता भी खोला है। वह पहले वसंत कुंज के शेल्टर होम में रहता था, जहाँ से यहाँ आया है। उसने बताया कि 2013 से चुनावों में उसने वोट डाला था, वोटर आईडी कार्ड में उसके घर का पता ‘0’ लिखा है।
एक और बेघर महिला, दर्शना ने राष्ट्रीय राजधानी के एक शेल्टर होम में रहते हुए अपना मतदाता पहचान पत्र बनवाया। दर्शना के पास आधार कार्ड नहीं है। वह कई साल पहले पंजाब से दिल्ली आई थी जब उसका परिवार उसे छोड़कर चला गया था। वह अब एक दुकान में काम करती है। उसका कहना है कि पिछले दो लोकसभा चुनावों में उसने वोट डाला था।
राहुल की संसदीय सीट में मकान संख्या ‘0’ वाले मतदाता
‘0’ मकान संख्या वाले मतदाता सभी निर्वाचन क्षेत्रों में मौजूद हैं। इनमें उत्तर प्रदेश का रायबरेली लोकसभा क्षेत्र भी शामिल है। गाँधी परिवार का गढ़ रहे रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र में कई मतदाता ऐसे हैं, जो मकान संख्या ‘0’ वाले हैं। कई मतदाताओं का पता भी एक ही है। क्या इसका मतलब यह है कि राहुल गाँधी ने फर्जी मतदाताओं का इस्तेमाल करके अपनी सीट जीती है?
कर्नाटक में मकान संख्या ‘0’ वाले मतदाता
करीब एक हफ्ते पहले, कर्नाटक के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र में मकान संख्या ‘0’ वाले कई मतदाताओं के वीडियो सामने आए थे। इसमें कई लोगों ने अपना मतदाता पहचान पत्र दिखाया। इनमें उनके घर का पता ‘0’ लिखा हुआ था। इनमें से कुछ मतदाता 10-15 सालों से इस इलाके में रह रहे थे। उन्होंने बताया कि उनके घरों पर नंबर नहीं थे। चुनाव अधिकारियों ने उनके मतदाता पहचान पत्र में मकान संख्या की जगह ‘0’ लिख दिया। उनके चुनावी फोटो पहचान पत्र (EPIC) में भी पते की जगह मकान संख्या 0 लिखा था।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने अपने आरोपों के सबूत देने के लिए राहुल गाँधी को एक हफ्ते की मोहलत दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपनी प्रेस वार्ता में आरोप को लेकर सबूत माँगे थे। सवाल यह है कि धोखाधड़ी का चुनाव आयोग पर आरोप लगा कर हंगाम खड़ा करने वाले राहुल गाँधी आरोपों की जाँच क्यों नहीं कराना चाहते।
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