उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली और सिस्टम को आइना दिखाने वाली खबर सामने आई है, जहाँ बाबा साहेब के दिए गए ‘संवैधानिक सुरक्षा कवच’ को सरेआम ‘अपराध का हथियार’ बना लिया गया है। मामला मुंडेरवा थाना क्षेत्र का है, जहाँ एक परिवार अपनी बेटी की इज्जत और बेटे की जान बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है।
आरोप है कि एक सिरफिरा आशिक पिछले 6 साल से एक छात्रा को परेशान कर रहा है और जब परिवार ने विरोध किया, तो उसे सरेआम धमकी दी गई, “या तो अपनी बेटी मुझे दे दो, या फिर पूरा खानदान SC-ST एक्ट के फर्जी मुकदमे में जेल के अंदर सड़ेगा।”
इस मामले ने उस वक्त हिंसक मोड़ ले लिया जब 18 फरवरी को हमलावरों की एक भीड़ ने छात्रा के भाई पर जानलेवा हमला कर उसका सिर फाड़ दिया। ताज्जुब की बात यह है कि हमला करने वाले आरोपित अब खुद को पीड़ित बताकर क्रॉस FIR दर्ज करा चुके हैं।
"Either Give Away Your Daughter Or Face SC-ST Act"
– The Republic has written your destiny!
Mangesh had been harassing his daughter for six years. Every time his family objected, he threatened them with the SC-ST Act.
One day, Mangesh's gang of 20-25 attacked the girl's… pic.twitter.com/4IwFNP8pa3— Treeni (@treeni) February 21, 2026
6 साल का टॉर्चर और ‘SC-ST एक्ट’ का खौफ: FIR की कॉपी
घटना की FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है, जो इस पूरी कहानी की भयावहता को बयाँ करती है। पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराई गई पहली शिकायत (FIR No. 1) के मुताबिक, उनकी बेटी महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज, बस्ती में पैरामेडिकल का कोर्स कर रही है।
आरोपित मंगेश (पुत्र ओमप्रकाश), जो परसा बोधी का रहने वाला है, पिछले 6 साल से उसे फोन पर और रास्ते में आते-जाते प्रताड़ित कर रहा है। शिकायत में पिता ने साफ लिखा है कि जब भी उन्होंने मंगेश को समझाने की कोशिश की, उसने अपनी जाति का हवाला देते हुए धमकी दी।
18 फरवरी की शाम 5 बजे, जब छात्रा का भाई चौराहे पर जा रहा था, तब मंगेश अपने साथ 20-25 अज्ञात गुंडों को लेकर पहुँचा। आरोप है कि इन लोगों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से उस पर हमला कर दिया। युवक का सिर बुरी तरह फट गया और वह लहूलुहान होकर किसी तरह घर भागा।
क्रॉस केस का खेल: हमलावर ही बने ‘फरियादी’
हैरानी तब हुई जब घटना के अगले ही दिन 19 फरवरी को दूसरे पक्ष यानी लव कुमार (पुत्र राम नरेश) की ओर से भी एक FIR दर्ज कराई गई। इस दूसरी शिकायत में कहानी को पूरी तरह पलट दिया गया है। लव कुमार का आरोप है कि अनिल दूबे के बेटों (अंशू और विकास दूबे) ने उनके साथ गाली-गलौज की और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए मारपीट की।
हकीकत और साजिश के बीच की यह जंग अब बस्ती पुलिस के पास है। एक तरफ वह परिवार है जिसकी बेटी 6 साल से छेड़खानी झेल रही है और जिसका बेटा अस्पताल के बिस्तर पर है, तो दूसरी तरफ वह पक्ष है जिस पर छेड़खानी और जानलेवा हमले का आरोप है, लेकिन वह ‘जातिसूचक गाली’ का ढाल लेकर खड़ा है।
ग्राउंड जीरो का सच: क्या प्रशासन सो रहा है?
बस्ती के मुंडेरवा इलाके में इस घटना के बाद से तनाव का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी विवाद में SC-ST एक्ट की धमकी का इस्तेमाल कर समझौता करने का दबाव बनाया गया हो। छात्रा के परिवार का कहना है कि वे ब्राह्मण समाज से आते हैं और उनके पास खोने के लिए सिर्फ ‘इज्जत’ है, जिसका फायदा आरोपित उठा रहा है। पीड़ित परिवार ने पुलिस के आला अधिकारियों से माँग की है कि केवल कागजी कार्रवाई न की जाए, बल्कि उस ‘ब्लैकमेलिंग’ की भी जाँच हो जो पिछले 6 सालों से चल रही है।
