उत्तर प्रदेश के आगरा में एक बड़े अवैध धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जो हिंदू लड़कियों को निशाना बनाकर उन्हें धोखे, लालच और दबाव के जरिए इस्लाम में परिवर्तित करने की साजिश रचता था। इस रैकेट के तार आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआईएस से जुड़े होने का संदेह है। देहरादून की 21 वर्षीय सृष्टि, जिसका नाम इस गिरोह ने मरियम रखा था, उसने अपनी आपबीती के जरिए इस स्लीपर सेल की पूरी कार्यप्रणाली को उजागर किया है।
सृष्टि ने आज तक से बातचीत में इस रैकेट के हर किरदार और उनकी साजिश का खुलासा किया। आगरा पुलिस ने सात राज्यों में छापेमारी कर 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिसमें मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान कुरैशी, आयशा उर्फ कृष्णा और अन्य शामिल हैं। यह रिपोर्ट सृष्टि की गवाही के आधार पर इस रैकेट की कार्यप्रणाली, लड़कियों को फँसाने के तरीके और विदेशी फंडिंग के खेल को विस्तार से उजागर करती है।
पढ़ें – सृष्टि की आपबीती, फेसबुक से शुरू हुआ जाल
देहरादून की रहने वाली एक साधारण 21 वर्षीय लड़की सृष्टि साल 2020 में इस रैकेट के जाल में फँसी। उसने बताया, “सब कुछ तब शुरू हुआ जब फेसबुक पर मुतालिब नाम के एक शख्स ने मुझसे संपर्क किया। उसने पहले दोस्ती की और फिर अपने धर्म की बातें शुरू कीं। मुझे इस्लाम के बारे में बताया और धीरे-धीरे मेरे मन में उत्सुकता जगाई।” मुतालिब ने सृष्टि को अपनी बहन सुमैया और शफीया से मिलवाया, ताकि वह उन पर भरोसा करे। इसके बाद सृष्टि का संपर्क आयशा (उर्फ कृष्णा) और दिल्ली के अब्दुल रहमान से करवाया गया।
पुलिस जाँच में पता चला कि यह रैकेट सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म जैसे लूडो के जरिए लड़कियों को निशाना बनाता था। कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि और भावनात्मक रूप से कमजोर लड़कियों को पहले दोस्ती के जाल में फँसाया जाता था। फिर उन्हें इस्लामिक वीडियो, प्रचार सामग्री और वॉयस नोट्स भेजकर रेडिकलाइज किया जाता था।
सृष्टि ने बताया, “मुझे व्हाट्सएप ग्रुप्स में जोड़ा गया, जहाँ जावेद, अब्दुल रहमान उर्फ रूपेंद्र प्रताप और दिल्ली के एक अन्य अब्दुल रहमान जैसे लोग थे। मुझे बार-बार इस्लाम अपनाने और शादी के लिए दबाव डाला गया।”
बेहतर जिंदगी का लालच देकर देते थे झाँसा
सृष्टि ने खुलासा किया कि आयशा ने उसकी आर्थिक स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की। “आयशा ने मुझसे मेरे घर की हालत के बारे में पूछा और फिर लालच दिया कि अगर मैं इस्लाम कबूल कर लूँ और किसी की दूसरी, तीसरी या चौथी पत्नी बनने को तैयार हो जाऊँ, तो मुझे बेहतर घर, सुरक्षा और पैसा दिया जाएगा। उसने कहा कि मेरे ऊपर तभी ‘इन्वेस्ट’ किया जाएगा, जब मैं उनकी शर्तें मानूँ।”
यह रैकेट सुनियोजित तरीके से लड़कियों को आर्थिक मदद का लालच देता था। सृष्टि को बताया गया कि अगर वह शादी के लिए तैयार नहीं होती, तो उसकी कोई मदद नहीं की जाएगी। उसे कई लोगों से मिलवाया गया, जिनमें जावेद, अब्दुल रहमान (उर्फ रूपेंद्र), और दिल्ली के एक अन्य अब्दुल रहमान शामिल थे। इन लोगों ने सृष्टि को बार-बार यही कहा कि इस्लामिक नियमों का पालन और शादी ही उनकी मदद की शर्त है।
पुलिस के अनुसार, यह रैकेट लड़कियों को पहले मानसिक रूप से तैयार करता था। उन्हें इस्लामिक नाम चुनने, कलमा पढ़ने और हिजाब पहनने जैसे नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किया जाता था। सृष्टि का नाम बदलकर मरियम रखा गया और उसे वॉयस नोट्स रिकॉर्ड करने को कहा गया, जिसमें वह खुद को कट्टर मुस्लिम बताए। इन नोट्स का इस्तेमाल विदेशों से फंडिंग जुटाने के लिए किया जाता था। खुद सृष्टि ने ये बात स्वीकार की है।
घर से बाहर निकालने की पूरी योजना
इस रैकेट का एक बड़ा हिस्सा लड़कियों को उनके घरों से निकालना था। सृष्टि ने बताया, “झारखंड के अयान ने मुझे कहा कि अगर मैं घर छोड़ना चाहती हूँ, तो मुझे देहरादून के किसी चौक तक अकेले जाना होगा। वहाँ से एक कैब मुझे दिल्ली ले जाएगी। दिल्ली में एक लड़का मुझे 10-12 घंटे की यात्रा के बाद किसी ‘सुरक्षित जगह’ पर छोड़ेगा।”
इस प्रक्रिया में सृष्टि को अपने फोन और सिम को तोड़ने की हिदायत दी गई। आयशा ने उसे सेकेंड-हैंड कीपैड फोन और 4,000-5,000 रुपये की फर्जी सिम दी, ताकि उसकी पहचान और लोकेशन गुप्त रहे।
सृष्टि ने बताया, “मुझे फोन तोड़कर पानी में डुबाने की पूरा तरीका सिखाया गया। मैंने यह सब किया, लेकिन मैं डर गई और घर से नहीं निकली। इसके बाद उन्होंने मेरी मदद बंद कर दी।” जब सृष्टि ने घर छोड़ने से इनकार किया, तो अब्दुल रहमान (उर्फ रूपेंद्र) ने उस पर दबाव डाला कि वह तीसरी या चौथी पत्नी बनने को तैयार हो, वरना कोई मदद नहीं मिलेगी। सृष्टि ने इस दबाव को ठुकरा दिया। इसके बाद रैकेट ने उसे बताया कि उनके पैसे किसी अन्य लड़की पर खर्च हो गए, जो उनके साथ चली गई।
ये देहरादून की सृष्टि हैं। इन्होंने आगरा के धर्मांतरण रैकेट के पूरे संगठित काम के बारे में बताया है। आयशा से लेकर अब्दुल रहमान तक, कैसे हिंदू लड़कियों को शिकार बनाते हैं। कैसे उन्हें घरों से गायब करवाते हैं कि वो पुलिस के हाथ न चढ़ें, हर बात का ब्यौरा है। ये आँखें खोलने वाला है। pic.twitter.com/5TImmvlhoK
— Shravan Shukla ePatrakaar (@epatrakaar) July 26, 2025
कई देशों से फंडिंग का खेल
आगरा पुलिस की जाँच में सामने आया कि इस रैकेट को अमेरिका, कनाडा, लंदन और दुबई से फंडिंग मिल रही थी। सृष्टि ने बताया, “एक लड़के ने मुझसे मेरी पूरी कहानी लिखने को कहा, ताकि वह उसे सोशल मीडिया पर स्टेटस के रूप में डाल सके और फंड जुटा सके। वह आयशा का फंड मैनेजर था और दूसरी लड़कियों की कहानियाँ भी शेयर करता था।” इन कहानियों और वॉयस नोट्स को विदेशों में प्रचारित कर यह दिखाया जाता था कि लड़कियाँ हिंदू से मुस्लिम बन चुकी हैं, जिसके आधार पर फंडिंग जुटाई जाती थी।
पुलिस ने पाया कि अब्दुल रहमान का भतीजा लंदन से फंडिंग को री-रूट करता था। यह रैकेट आईएसआईएस की तर्ज पर काम करता था, जिसमें अलग-अलग मॉड्यूल थे। एक मॉड्यूल फंडिंग जुटाने का काम करता था, दूसरा रेडिकलाइजेशन का और तीसरा लड़कियों को छिपाने और उनके धर्मांतरण के बाद निकाह की व्यवस्था करता था। जाँच में यह भी संदेह जताया गया कि रैकेट के तार पीएफआई और पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं।
जिहादी टीचर आयशा की भूमिका
आयशा उर्फ कृष्णा इस रैकेट की अहम कड़ी थी। सृष्टि ने बताया, “आयशा 18 साल से ऊपर की लड़कियों को निशाना बनाती थी। वह जिहाद का पाठ पढ़ाकर उनका ब्रेनवॉश करती थी। आयशा कई नंबरों का इस्तेमाल करती थी और सेकेंड-हैंड फोन खरीदती थी।” आयशा की गिरफ्तारी गोवा से हुई और उसके फोन से जिहाद से संबंधित वीडियो और प्रचार सामग्री बरामद हुई।
आयशा न केवल लड़कियों को रेडिकलाइज करती थी, बल्कि उन्हें फर्जी सिम और फोन देकर उनकी पहचान छिपाने में मदद करती थी। सृष्टि ने बताया, “मुझे सिखाया गया कि घर से निकलने से पहले फोन तोड़कर पानी में डुबाना है। मुझे एक फर्जी सिम दी गई थी, लेकिन मैंने घर छोड़ने से मना कर दिया।”
कार्रवाई में जुटी आगरा पुलिस, सृष्टि की गवाही अहम
मार्च 2025 में आगरा के सदर बाजार थाने में दो बहनों की गुमशुदगी की शिकायत ने इस रैकेट का पर्दाफाश किया। साइबर सेल की मदद से पुलिस ने कोलकाता में इन बहनों को रेस्क्यू किया और रैकेट के नेटवर्क का पता लगाया। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार की अगुआई में 100 सदस्यीय टीम ने सात राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, राजस्थान और झारखंड में छापेमारी कर 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया। इनमें अब्दुल रहमान कुरैशी, आयशा, मोहम्मद अली और ओसामा शामिल हैं।
पुलिस ने अब्दुल रहमान के घर से धर्मांतरण से जुड़ी किताबें और मौलाना कलीम सिद्दीकी की लिखी प्रचार सामग्री बरामद की। सृष्टि की गवाही ने इस रैकेट के हर किरदार को बेनकाब किया। उसने बताया, “मुझे कलमा पढ़ने और इस्लामिक नाम चुनने के लिए मजबूर किया गया। दिल्ली के अब्दुल रहमान ने मुझसे वॉयस नोट माँगा, जिसमें मुझे कहना था कि मैं कट्टर मुस्लिम हूँ और हिजरत करना चाहती हूँ। यह नोट विदेशी फंडिंग के लिए इस्तेमाल होता था।”
खतरनाक स्तर पर सक्रिय हैं धर्मांतरण गिरोह के स्लीपर सेल
पुलिस ने सात राज्यों में दर्जनों लड़कियों को ट्रेस किया, जिनमें से कई इतनी रेडिकलाइज हो चुकी हैं कि काउंसलिंग का असर नहीं हो रहा। एक पीड़िता की तस्वीर AK-47 के साथ सामने आई, जो इस रैकेट की खतरनाक मंशा को दर्शाती है। यह रैकेट न केवल धर्मांतरण बल्कि आतंकी गतिविधियों के लिए भी लड़कियों को तैयार करता था।
सृष्टि ने कहा, “मैं इस जाल से बाहर निकल पाई, लेकिन कई लड़कियाँ अभी भी फँसी हैं। मैं चाहती हूँ कि लोग इस साजिश को समझें और ऐसी गलती न करें।” उसकी गवाही न केवल इस रैकेट को तोड़ने में मददगार रही, बल्कि उन लड़कियों को खोजने में भी सहायक होगी, जो इस गिरोह के चंगुल में गायब हो चुकी हैं।
आगरा धर्मांतरण रैकेट का खुलासा देश में फैले स्लीपर सेल नेटवर्क की गंभीरता को उजागर करता है। यह रैकेट सोशल मीडिया, विदेशी फंडिंग और संगठित मॉड्यूल के जरिए हिंदू लड़कियों को निशाना बनाता था। सृष्टि की साहसी गवाही और आगरा पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने इस साजिश को बेनकाब किया।
यूपी एटीएस और पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और फंडिंग के स्रोतों की तह तक जाने के लिए जाँच कर रही है। यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से सावधान रहें और किसी भी लालच में न आएँ।