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फर्जी आधार कार्ड, ₹95000 दलाली फीस और मानव तस्करी: जानिए- महिला के बांग्लादेश से दिल्ली और फिर भाग कर असम पहुँचने की कहानी


असम के धुबरी जिले के गौरिपुर इलाके में बुधवार (24 दिसंबर 2025) की रात एक बांग्लादेशी महिला संदिग्ध हालत में सड़क पर भटकती हुई मिली। स्थानीय लोगों ने रात करीब 9:30 बजे उसकी गतिविधियों पर शक होने पर पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद महिला को गौरिपुर पुलिस स्टेशन लाया गया। महिला की पहचान बांग्लादेश के कुमिल्ला जिले की रहने वाली 35 वर्षीय रुमिया अख्तर के रूप में हुई है।

भारत लाकर बेचे जाने का आरोप, फर्जी आधार बनवाने की कही बात

पुलिस और मीडिया से बातचीत में रुमिया अख्तर ने दावा किया कि वह मानव तस्करी का शिकार हुई है। उसने बताया कि करीब दो महीने पहले एक दलाल ने उसे आठ अन्य महिलाओं के साथ सिलहट के रास्ते भारत पहुँचाया था। इसके बदले उसने दलाल को 95 हजार रुपए दिए थे।

रुमिया ने बताया कि भारत लाने के बाद दलाल ने उसका फर्जी आधार कार्ड बनवाया, जिसमें उसका नाम ‘झुमुर रॉय’ दर्ज था, जबकि उसका असली नाम रुमिया अख्तर है। रुमिया ने बताया कि दिल्ली में सभी महिलाओं को अलग-अलग जगहों पर बेच दिया गया, लेकिन वह किसी तरह वहाँ से भागने में सफल रही।

इसके बाद वह गुवाहाटी होते हुए गौरिपुर पहुँची, क्योंकि वह किसी भी तरह अपने घर सिलहट लौटना चाहती थी।

पुलिस की कार्रवाई

रुमिया ने यह भी बताया कि गौरिपुर पहुँचने से पहले उसने पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में पुलिस से मदद लेने की कोशिश की थी, लेकिन वहाँ से उसे असम पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी गई। फिलहाल उसे अस्थायी तौर पर गौरिपुर के एक नर्सिंग होम में रखा गया, जहाँ उसकी देखभाल के लिए महिला कांस्टेबल को तैनात किया गया है।

गौरिपुर थाना प्रभारी दिव्य कमल दत्ता ने पुष्टि की कि मामले में केस दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि महिला को अब धुबरी जिला बॉर्डर पुलिस के हवाले किया जा रहा है, जो बांग्लादेश लौटाने की प्रक्रिया और उसकी सुरक्षित वापसी के लिए जरूरी कदम उठाएगी।



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