उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली में बीते 5 अगस्त को आए सैलाब के बाद लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस बीच आपदा के 12वें दिन रेस्क्यू टीम को करीब 400 साल पुरानी माँ राजराजेश्वरी की चाँदी की मूर्ति पूरी तरह सुरक्षित मिली है। यह मूर्ति मलबे में करीब 25 फीट नीचे दबी थी। हैरानी की बात यह है कि इस मूर्ति को लगाई गई बिंदी भी जस की तस थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मूर्ति एक पेड़ के नीचे दबी मिली है। साथ ही, गलाणथोक की कुलदेवी माँ राजराजेश्वरी के साथ रखी कटार और 5 पांडवों व भगवान शिव की पंचमुखी मूर्तियाँ भी सुरक्षित मिली हैं।
धराली गाँव के प्रवेश द्वार के पास राजराजेश्वरी माता का देवदार से बना प्राचीन मंदिर था। इसी मंदिर में हिमाचल प्रदेश से लाई गई यह मूर्ति भी रखी थी। सैलाब में यह मंदिर ध्वस्त हो गया और मूर्ति मलबे में दब गई थी।
शनिवार (16 अगस्त) को एक ग्रामीण को माता की चुनरी दिखाई दी जिसके बाद उन्होंने बीआरओ से उस स्थान पर खुदाई करने की माँग की थी। इस खुदाई के दौरान प्राचीन मंदिर से कुछ ही फीट की दूरी पर करीब 25 फीट नीचे माँ राजराजेश्वरी की व अन्य मूर्तियाँ सुरक्षित मिलीं।
ग्रामीणों ने मूर्ति को सुरक्षित निकालकर माँ राजराजेश्वरी की पूजा अर्चना की है। फिलहाल माता की मूर्ति को एक होटल के कमरे में विराजित किया गया है। ग्रामीणों ने इस घटना को चमत्कार बताते हुए कहा है कि आपदा का दौर बीतने के बाद भव्य मंदिर तैयार कर उसमें माता की मूर्ति को स्थापित किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यह तीसरी बार है जब आपदा की स्थिति में माँ की मूर्ति सुरक्षित मिली है। बताया जा रहा है कि इस गाँव में 1971 व 1982-83 में दो बार भीषण अग्निकांड हुआ था और तब भी माता की मूर्ति वाला भवन आग की चपेट में आने से बचा रहा था।
धराली में आए सैलाब के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। रेस्क्यू टीमें लगातार लापता लोगों को तलाशने में जुटी हुई हैं। सर्च टीमें लापता लोगों को ढूंढने के लिए तकनीक का बडे़ स्तर पर इस्तेमाल कर रही है। साथ ही, धराली के लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है।
