अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर बुधवार (30 जुलाई, 2025) को 25% टैरिफ का ऐलान किया था। ट्रंप ने इसी के साथ कहा था कि भारत के रूस से हथियार सौदों और तेल-गैस खरीदने के चलते भारत अपर अतिरिक्त टैरिफ भी लगेगा। ट्रंप ने इसके बाद गुरुवार (31 जुलाई, 2025) को भारत और रूस को ‘डेड इकॉनमी’ बता दिया। उनका इशारा था कि दोनों देश एक साथ हैं और अब वह जो चाहें वो करें।

ट्रंप के यह ‘मूड स्विंग्स’ भारत और पाकिस्तान के बीच मई, 2025 मे हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद से जारी हैं। तब से वह कहीं ट्रेड डील की बात करते हैं, कहीं टैरिफ का ऐलान करते हैं और हर तीसरे घंटे कथित सीजफायर पर शोर मचाते हैं। हालाँकि, भारत ने एक भी बार उनकी सीजफायर वाली बात को मानने से इनकार किया है। संभवत: इसी से चिढ़ के डोनाल्ड ट्रंप अब भारत को ‘डेड इकॉनमी’ बता रहे हैं। वो यूक्रेन या किसी अफ्रीकी देश को ऐसी बात कहें तो ठीक भी है लेकिन भारत के विषय में वह पूर्णतया गलत हैं।
डेड नहीं ‘डैशिंग’ इकॉनमी है भारत
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप अपनी खीझ में भारत को डेड इकॉनमी यानी मृत अर्थव्यवस्था बता रहे हैं। उनका कहने का अर्थ है कि भारतीय अर्थव्यवस्था फेल हो चुकी है और अब वह गर्त को जाने वाली है। यह ना सिर्फ ट्रंप की अज्ञानता बल्कि उनकी मूर्खता और घमंड को तक दर्शाता है। भारत डेड इकॉनमी होने से कोसों दूर है। भारत डेड इकॉनमी तो कहीं से नहीं है बल्कि वह वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था में रफ़्तार का इंजन है। यह सब केवल कहने की बातें नहीं हैं बल्कि आँकड़े इनकी गवाही देते हैं।
भारत वर्तमान में विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है इसका आकार लगभग 4 ट्रिलियन है। जल्द ही यह जर्मनी को पीछे छोड़ कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। भारत वर्तमान में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। और यह सिलसिला बीते 10 वर्षों से लगातार चल रहा है तथा आगे और भी चलना इसका पक्का है। वर्ष 2015-25 के बीच भारत की औसत GDP वृद्धि दर 6%-6.5% रही है।
जबकि इस बीच भारत ने कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और दूसरे वैश्विक संकट झेले हैं। भारत के मुकाबले चीन इस दौरान 6% या उससे नीचे की ही रफ़्तार से बढ़ा है। अब चीन की GDP वृद्धि दर और भी धीमी होती जा रही है। भारत वर्तमान में वैश्विक GDP वृद्धि में 17% का योगदान दे रहा है। यह आगे चलके 20% तक होने का अनुमान है। भारत इसी के चलते वैश्विक ग्रोथ का इंजन बना हुआ है। उसकी अर्थव्यवस्था का आकार 2015-25 में 105% बढ़ा है।
जबकि इसी दौरान चीन की GDP का आकार मात्र 44% बढ़ा है। विश्व में तेल-गैस जैसे महत्वपूर्ण चीजों की माँग में भी भारत का हिस्सा बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में विश्व में खपत होने वाले कुल ऊर्जा स्रोतों का 25% भारत में होगा। जिस भारत को डोनाल्ड ट्रंप डेड इकॉनमी बता रहे हैं, वह वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। भारत की आबादी 140 करोड़+ है। यह अभी और बढ़ेगी। वर्तमान में भारत का मध्यम वर्ग लगभग 60 करोड़ है।
यह मध्यम वर्ग 2047 तक 100 करोड़ पहुँचने के आसार हैं। यही मध्यम वर्ग वर्ष 2030-2031 तक लगभग 2.7 ट्रिलियन डॉलर की खपत करेगा। ऐसे में विश्व की कम्पनियों का धंधा भी चीन के अलावा भारत के ही भरोसे होगा। इतना बड़ा मध्यम वर्ग उसे और कहीं नहीं मिलेगा। यह बाजार जिस देश में है, वह कभी भी डेड इकॉनमी नहीं हो सकता। भारत सिर्फ बड़ा बाजार ही नहीं है बल्कि बहुत ऐसी ऐसी चीजों की फैक्ट्री भी है, जिन पर विश्व निर्भर है।
भारत विश्व में जेनेरिक दवाइयों का विश्व का सबसे बड़ा सप्लायर है। अमेरिका भी वर्तमान में भारत निर्मित जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। भारत का फार्मा एक्सपोर्ट वर्ष 2030 तक 65 बिलियन डॉलर (₹5.5 लाख करोड़) तक पहुँचने का ऐलान है। इसके अलावा भारत भले ही कच्चे तेल का बड़ा उत्पादक ना हो लेकिन वह तेल की रिफायनरी के मामले में बहुत आगे है। भारत विश्व का चौथा सबसे तेल रिफाइन करने वाला देश है। इसके अलावा गाड़ियाँ, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक समेत बाकी कई वस्तुओं का भारत बड़ा सप्लायर है।
ट्रंप की खीझ है भारत पर रोने का कारण
ट्रंप ने बुधवार से भारत के खिलाफ लगातार अपना प्रलाप जारी रखा है। पहले उन्होंने ट्रेड डील पर जारी बातचीत के बावजूद 25% और पेनाल्टी वाले टैरिफ का ऐलान किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि अभी बातचीत चल रही है। ट्रंप ने इसके बाद पाकिस्तान के एक ट्रेड डील का ऐलान कर दिया। उन्होंने साथ में यह भी बताया कि अमेरिका की कोई कंपनी पाकिस्तान में तेल की खोज में भी मदद करेगी। उन्होंने इसके साथ भारत पर तंज कसते हुए कहा, “क्या पता पाकिस्तान किसी दिन भारत को तेल बेचे।”
इससे पहले वह पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को भी डिनर पर बुला चुके हैं। वह लगातार पाकिस्तान के साथ ट्रेड बढ़ाने की बात करते रहे हैं। वह इसी दौरान पाकिस्तान को और भी बढ़ावा देते रहे हैं। इसके उलट उनका भारत पर प्रहार जारी रहा है। पहले उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर हुए सीजफायर का क्रेडिट लेने का प्रयास किया। भारत ने यह मानने से इनकार कर दिया। भारत ने ट्रंप के दावों को हर बार नकार दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्रंप को सामने से मिलने से इनकार कर दिया।
ट्रंप ने अपने सीजफायर के दावों में कहा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान से ट्रेड डील की है, जिसके चलते दोनों देश अपना-अपना युद्ध रोकने पर राजी हुए हैं। भारत ने सीजफायर में ट्रंप की मध्यस्थता के दावों के साथ ही यह मानने से इनकार कर दिया कि भारत ने किसी भी व्यापार सम्बन्धित धमकी के आधार पर यह सीजफायर किया। हालाँकि, ट्रंप ने अपने दावी जारी रखे। भारत इन्हें नकारता रहा। अपने झूठ को ट्रंप ने खुद ही 30 जुलाई, 2025 साबित कर दिया जब उन्होंने भारत के खिलाफ टैरिफ का ऐलान किया।
यदि भारत सीजफायर करने पर व्यापार के आधार पर ही मानता तो भला अब उसे टैरिफ क्यों झेलने पड़ते। इन सबकी खीझ के चलते ट्रंप अब भारत पर हमलावर हो रहे हैं। हालाँकि, उनकी इन धमकियों से भारत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ना ही वह दबाव में कोई ट्रेड डील करने जा रहा है, ना ही अपने अंतरराष्ट्रीय मामलों में उनका दखल स्वीकार करेगा। ट्रंप के कह भर देने से भारत डेड इकॉनमी भी नहीं बन जाएगा।
ट्रंप की खीझ को एक राजस्थानी कहावत से समझा जा सकता है। यह कहावत है- रांडा रोवती रेवे, पामणा जिमंता रेवे। इसका अर्थ है कि विधवाएँ कोसती रहती हैं जबकि दूसरों के पति ज़िंदा रहते हैं। इसी तरह ट्रंप भी भारत को लेकर रोते रह सकते हैं, हमें कोई नहीं फर्क पड़ने वाला।