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दरभंगा में SC-ST एक्ट का क्या है मामला, जिसके बाद ब्राह्मण पुरुषों को छोड़ना पड़ा है गाँव: पेट पालने के लिए जो परदेश गए-उनके भी नाम FIR में, जानें पूरा घटनाक्रम


बिहार दरभंगा

बिहार के दरभंगा के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र में SC/ST एक्ट के तहत दर्ज एक ही FIR में गाँव के सभी ब्राह्मणों को आरोपित बनाया गया है। FIR में 70 नामजद ब्राह्मणों के साथ-साथ 100 से 150 अज्ञात लोगों को भी शामिल किया गया है। शिकायतकर्ता अशरफी पासवान ने आरोप लगाया है कि शनिवार (31 जनवरी 2026) को पूरे गाँव ने मिलकर उनके परिवार पर हमला किया और उन्हें प्रताड़ित किया।

यह FIR अंकित चौधरी द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज कराई गई है। पुलिस के अनुसार, आवेदन में पूरे गाँव के ब्राह्मण समुदाय को सामूहिक रूप से आरोपित बनाया गया है। मामला इतना गंभीर हो गया है कि डर के कारण गाँव के सभी पुरुष ब्राह्मण अपना घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं।

दिल्ली-मुंबई में काम करने वाले भी आरोपित

FIR में कई ऐसे लोगों को आरोपित बनाया गया है, जो सालों से गाँव में नहीं रहते हैं। कुछ दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में मजदूरी करते हैं, जबकि कुछ प्राइवेट कंपनियों में काम करते हैं। उनके परिवारों का कहना है कि घटना के समय वे गाँव में मौजूद नहीं थे, फिर भी उनके नाम FIR में जोड़ दिए गए हैं।

गाँववालों का मानना है कि पूरे ब्राह्मण समुदाय को निशाना बनाया गया है, जबकि जाँच केवल दोषियों की होनी चाहिए, न कि पूरे समाज पर। उनका कहना है कि हर व्यक्ति की अलग-अलग जाँच होनी चाहिए।

नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (NCIB) नामक एक NGO ने इस मामले से जुड़ी FIR साझा की है। संगठन ने बताया कि FIR में शामिल कई ब्राह्मण प्रवासी मजदूर हैं, जो दिल्ली और मुंबई में रहकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर NCIB ने लिखा, “ब्राह्मणों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें से अधिकांश दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।”

यह विवाद कैसे शुरू हुआ और पुलिस का क्या रुख है?

पुलिस और शिकायत के अनुसार, विवाद की जड़ एक पुराना पैसों का लेन-देन है। आरोप है कि 2015 में कैलाश पासवान ने हरिनगर गाँव के हेमंत झा का घर बनाया था। इसके करीब 2.5 लाख रुपए अब भी बकाया हैं। कैलाश का कहना है कि पैसे नहीं मिले। हेमंत झा ने रकम देने से इनकार करते हुए काम का सबूत माँगा। मामला पंचायत तक पहुँचा, लेकिन समाधान के बजाय दोनों पक्षों में तीखी बहस और गाली-गलौज हुई।

शनिवार (31 जनवरी 2026) की रात विवाद हिंसा में बदल गया। लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला हुआ, जिसमें महिलाओं और एक बच्चे समेत 10 से ज्यादा लोग घायल हुए। शिकायतकर्ता अशरफी पासवान का आरोप है कि हेमंत झा, श्रीनाथ झा, पंकज झा, ओमप्रकाश झा, सुमित झा समेत कई लोग उनके घर आए और परिवार पर हमला किया।

FIR के अनुसार, 70 नामजद ब्राह्मणों के अलावा 100–150 अन्य लोगों ने मिलकर परिवार को दौड़ाया और पीटा। हमलावरों पर लाठी, लोहे की रॉड, कुल्हाड़ी, ब्लेड, ईंट-पत्थर इस्तेमाल करने और जातिसूचक गालियाँ देने का आरोप है।

आरोप है कि हमलावरों ने सोने-चाँदी के गहने, 2 लाख रुपए नकद, टीवी, फ्रिज, मोबाइल फोन लूट लिए, चार मोटरसाइकिलें तोड़ दीं और बाद में उनके होटल में भी तोड़फोड़ की। जाते समय धमकी दी गई कि गाँव में दुसाध समुदाय को नहीं रहने दिया जाएगा। अब तक पुलिस 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

एक वीडियो में ग्रामीणों को यह कहते सुना जा सकता है कि हेमंत झा ने सभी भुगतान कर दिए हैं और कोई बकाया नहीं है, जबकि अशरफी पासवान झूठा दावा कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि FIR में नामजद 70 ब्राह्मणों में से कई लोग वर्षों से गाँव में नहीं रहते और घटना के समय गाँव में मौजूद भी नहीं थे।

उन्होंने यह भी बताया कि हमले के डर से गाँव के सभी ब्राह्मण अपना घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं।



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