कश्मीर घाटी जिसे प्राचीन काल से ऋषियों की भूमि कहा जाता है, कभी ज्ञान, अध्यात्म और विविध संस्कृतियों का गढ़ रही है। यहाँ आदिकाल से कई प्राचीन मंदिर और तीर्थ रहे हैं, जिनका उल्लेख नीलमत पुराण सहित विभिन्न ग्रंथों में मिलता है।
माना जाता है कि महान ऋषि कश्यप से ही कश्मीर का नाम पड़ा। लेकिन बीते दशकों में आतंकवाद और पलायन के चलते इस भूमि की सांस्कृतिक पहचान पर गहरी चोट पहुँची। इसी घाटी के बडगाम जिले में अब एक बार फिर नई शुरुआत हुई है। 35 साल बाद यहाँ का शारदा भवानी मंदिर फिर से खोला जा चुका है।
कश्मीरी पंडित समुदाय ने तीन दशक से भी अधिक समय बाद घाटी में अपनी आस्था और जड़ों की ओर वापसी का एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। रविवार (31 अगस्त 2025) को बडगाम जिले के इचकूट गाँव में स्थित शारदा भवानी मंदिर को फिर से खोला गया।
समारोह के दौरान विधिवत पूजा और प्राण प्रतिष्ठा की गई। यह वही मंदिर है जो 1990 में आतंकवाद शुरू होने के बाद बंद हो गया था और कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद खंडहर में बदल गया था।
लंबे समय बाद जब पंडित परिवार यहाँ लौटे तो स्थानीय लोगों ने न केवल उनका स्वागत किया बल्कि आयोजन को सफल बनाने में भी सक्रिय भूमिका निभाई। शारदा स्थापना समुदाय के अध्यक्ष सुनील कुमार भट ने कहा कि यह मंदिर पाकिस्तान स्थित शारदा माता मंदिर की एक शाखा माना जा सकता है।
उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की इच्छा भी लंबे समय से यही थी कि मंदिर को फिर से खोला जाए। भट ने कहा, “जब हम यहाँ पहली बार आए थे तब केवल चार लोग थे, लेकिन आज पूरा गाँव हमारे साथ खड़ा है। यह स्थानीय लोगों के सहयोग का सबसे बड़ा प्रमाण है।”
समारोह में शामिल एक बुज़ुर्ग ने कहा, “ये लोग इसी गाँव के रहने वाले हैं। हालात बिगड़ने से पहले हम सब साथ रहते और खाते-पीते थे। हमें खुशी है कि वे वापस आए और प्रार्थना की। कश्मीर उनकी जन्मभूमि है और हम उनका स्वागत करते हैं।”
मंदिर के पुनः उद्घाटन के साथ ही पुनर्निर्माण की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। कुछ कश्मीरी पंडित, जो प्रधानमंत्री पैकेज के तहत घाटी में काम कर रहे हैं, मंदिर के जीर्णोद्धार और नए निर्माण के लिए जिला प्रशासन से संपर्क में हैं। उन्होंने राना मंदिर में भी एक शिवलिंग स्थापित किया है, जो सफाई और मरम्मत के दौरान मिला था।