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छांगुर पीर हो या फरहान, मोहम्मद कैफ हो या रहमान… सबका टारगेट सिर्फ हिंदू लड़कियों को कलमा पढ़वाना: 2 महीने में 6 धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़, कट्टरपंथियों को ₹100-100 करोड़ की होती थी फंडिंग


धर्मांतरण गिरोह हिंदू लड़कियाँ

हिंदू लड़कियों को मुस्लिम बनने के लिए धर्म परिवर्तन कराने को लेकर धर्मांतरण के कई मामले हाल ही में सामने आए। महीने भर में भोपाल, बलरामपुर, आगरा, प्रयागराज, अलीगढ़ और कुशीनगर में बड़ी संख्या में लड़कियों को बरगलाकर या उन्हें प्रेम जाल में फाँस कर धर्मांतरण करने वाले गिरोहों का पर्दाफाश हुआ और साथ ही कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

हिंदू छात्राओं और परिवारों को निशाना बनाकर उन्हें मुस्लिम धर्म में जबरन परिवर्तित करने की न केवल कोशिश की गई बल्कि इन गिरोहों के सरगना भी देश- विदेश की फंडिंग से मालामाल हुए। इसके साथ ही इन गिरोहों के आतंकी संगठनों से भी तार जुड़े मिले।

भोपाल में कॉलेज की लड़कियाँ बनी शिकार

सबसे पहले धर्मांतरण के गिरोह का बड़ा मामला मध्यप्रदेश के भोपाल से आया। यहाँ कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों को फरहान नाम के युवक ने पहले अपनी दोस्ती के जाल में फँसाया। इसके बाद उनसे प्यार का नाटक कर रेप किया। इसकी वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू किया। पीड़िताओं को रेप का वीडियो दिखा कर ये धमकी भी दे कि उनके साथ भी वैसे ही होगा। एक के बाद एक, कई लड़कियों के साथ ये पूरी प्रक्रिया दोहराई गई।

हिम्मत करके 11 अप्रैल 2025 को भोपाल के बागसेवनिया थाना में कुछ छात्राओं ने शिकायत की कि उन्हें मुस्लिम लड़कों ने ब्लैकमेल किया, उनका वीडियो बनाया और धमकी देकर रेप किया गया। जाँच शुरू हुई तो और लड़कियाँ भी सामने आईं। साथ ही फरहान के साथ साथ साहिल खान, अली खान, साद, नबील और अबरार के साथ 11 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया। मामले में SIT टीम गठित हुई और इस ‘मुस्लिम गैंग’ पर शिकंजा कसा गया।

छांगुर पीर ने बिछाया धर्मांतरण का जाल

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में धर्मांतरण का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया। इसका सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर गाँव गाँव जाकर नग और छोटी मोटी चीजें बेचता था। इसके बाद वह मुंबई पहुँचा और वहाँ पर मिले हिंदू परिवार नीतू और नवीन वोहरा के परिवार का सबसे पहले बरगलाकर धर्म परिवर्तन करवाया। इस परिवार की 158 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी को अपने हिसाब से खरीद फरोख्त की और उन्हें मुंबई से बलरामपुर के उतौरला में लाकर बसा दिया।

इसके बाद छांगुर ने धर्मांतरण को ही अपना धंधा बना लिया। इसके तहत उसने 1500 से भी अधिक हिंदू युवतियों का धर्मांतरण करवाया। 5 जुलाई 2025 को यूपी एटीएस ने छांगुर पीर और नीतू उर्फ नसरीन को लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार किया था।

छांगुर धर्म परिवर्तन के नाम पर आलीशान जीवन और पैसे का लालच देता था। इसके लिए उसे विदेशों से भी फंडिंग मिलती थी। उसके नाम पर 106 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी के साथ 40 से अधिक बैंक अकाउंट में 100+ करोड़ से अधिक की फंडिग मिली है।

छांगुर के धर्मांतरण गिरोह में धर्म परिवर्तन के लिए लड़कियों की जाति के हिसाब से एक फीस तय थी। ब्राह्मण, क्षत्रिय, सरदार लड़कियों के लिए ₹15-16 लाख, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए ₹10-12 लाख और अन्य जातियों के लिए ₹8-10 लाख की रकम फिक्सड थी। इस मामले में ATS के साथ ED की जाँच भी जारी है।

आगरा में ‘अस्मिता’ ने खोला धर्म परिवर्तन का राज

यूपी पुलिस ने हाल ही में ‘ऑपरेशन अस्मिता’ चलाया। इसमें एक बड़ा धर्मांतरण गिरोह पकड़ा गया। इस ऑपरेशन में 19 जुलाई 2025 को 6 राज्यों से 10 लोग गिरफ्तार हुए। पुलिस ने यूपी, गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान में छापे मारे। इसी के जरिए आगरा में एक बड़े धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश हुआ।

आगरा का मामला सबसे पहले दो सगी बहनों के गायब होने की शिकायत से खुला। आगरा की दो सगी बहनों को कोलकाता तक पहुँचाया गया था। बताया गया कि दोनों बहनें घर से ₹25 हजार और कुछ गहने लेकर भागी थीं। दोनों बस से दिल्ली, मुजफ्फरनगर, समस्तीपुर होते हुए कोलकाता पहुँचीं। कोलकाता में ओसामा नाम के युवक ने बहनों को होटल दिलाया। फिर कोलकाता की मुस्लिम बस्ती ‘तपसिया’ में कमरा दिलाने में भी मदद की।

आगरा के मामले में सरगना अब्दुल रहमान पहले हिंदू था। उसका नाम महेंद्र पाल हुआ करता था। 1990 में वह ईसाई बन गया। फिर इस्लाम में धर्म परिवर्तन किया।बताया गया कि अब्दुल के पास से हरियाणा के रोहतक की हिंदू लड़की को भी बचाया गया है।

 आगरा का गिरोह केवल ‘बालिग’ युवतियों को निशाना बनाता था। इससे उन्हें अपने साथ ले जाने में परेशानी नहीं होती थी। इस धर्मांतरण गैंग में शामिल 10 लोगों में से 6 पहले हिंदू थे। आरोपितों में से अबू रहमान इस गैंग का सरगना है।

इन लोगों ने धर्म परिवर्तन कर अपने नाम भी बदल लिए। धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों का कोलकाता में वोटर आईडी और आधार कार्ड भी बनाए जाते थे। इन्हें वोट डालने का भी अधिकार मिल जाता था।

प्रयागराज में हुआ गिरोह का भंडाफोड़

प्रयागराज 28 जून 2025 को दलित लड़की की मां ने फूलपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। महिला ने बताया था कि उसकी बेटी को दरकशा बानो नाम की एक महिला ने ब्रेनवॉश किया है। मामले में पुलिस ने आगे जाँच की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। 15 वर्षीय बच्ची को दरकशा बानो इस्लाम अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया और हिन्दू धर्म के प्रति जहर भरती रही। दरकशा बानो ने मोहम्मद कैफ के साथ मिलकर दलित लड़की को पैसों का लालच दिया और झाँसे में लेकर दिल्ली से केरल चली गई।

केरल में लड़की को पैसों का लालच, फिर जबरन धर्मांतरण और ‘जिहाद’ में शामिल होने का दबाव डाला गया। लड़की ने केरल के एक रेलवे स्टेशन से भागकर स्थानीय पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने उसे सुरक्षित बरामद कर प्रयागराज वापस भेजा और वन स्टॉप सेंटर में रखा। मामले में पहले दरकशा बानो और मोहम्मद कैफ और इसके बाद मुख्य आरोपी मोहम्मद ताज को 14 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने तीन विशेष टीमें बनाईं और गिरोह के नेटवर्क की जाँच शुरू की।

गिरोह विशेष रूप से दलित नाबालिग लड़कियों को निशाना बना रहा था। जांच एजेंसियों को शक है कि यह एक मल्टी-स्टेट नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य धर्मांतरण के बाद आतंकी गतिविधियों में शामिल करना था।

अलीगढ़ में धर्म परिवर्तन कर गायब हुई हिंदू महिलाएँ

आगरा की तरह ही अलीगढ़ में अवैध धर्मांतरण के नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इसके झाँसे में आईं करीब 97 महिलाओं का पता नहीं चल पा रहा है। ये महिलाएँ लापता बताई जा रही हैं। इसका सरगना उमर गौतम ही था जिसने पूरा नेटवर्क फैला रखा था।

इस मामले में भी उमर गौतम की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि 2018 में 33 महिलाओं का धर्मांतरण कराया गया था जिसमें 3 अलीगढ़ की थीं। लेकिन ये नेटवर्क धीरे-धीरे महिलाओं और युवतियों को अपने झाँसे में लेने लगा। यही वजह है कि जनवरी से अब तक 97 महिलाएँ लापता हैं जिनमें से 17 टीन एजर्स हैं।

कुशीनगर में मिला धर्मांतरण गैंग

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में सक्रिय धर्मांतरण गैंग का खुलासा हुआ है। रामकोला पुलिस ने गैंग की मास्टरमाइंड जैरुन्निशा और उसके साथी अरमान अली, अरबाद और इकरामुल को गिरफ्तार किया है। गैंग ने 3 हिंदू नाबालिग लड़कियों का धर्म परिवर्तन करवाया और फिर उन्हें मुंबई में जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया।

टेकुआटार टोला खैरटवा के प्रेम मधेशिया ने अपनी 15 साल की नाबालिग को शादी का झाँसा देकर भगाने के आरोप में गाँव के ही अरमान के खिलाफ शिकायत की थी। इससे पहले पीड़ित रामचरित प्रसाद ने भी अपनी दो बेटी और उसकी सहेली के अपहरण मामले में इसी प्रकार की शिकायत दर्ज कराई थी।

कोडवर्ड में होती थी बात

आगरा मामले में गिरफ्तार धर्मांतरण गिरोह ने धर्मांतरण का शिकार बन चुके लोगों के लिए कोडवर्ड बनाए था। जिन लोगों का धर्मांतरण यह गैंग कर लेता था, उन्हें ‘रिवर्ट’ नाम दे दिया जाता था। धर्मांतरण में आने वाले लोगों के लिए इसे ‘सेफ जोन’ कहा जाता था।

इसी तरह छांगुर पीर भी अपने गैरकानूनी कामों को छुपाने के लिए कुछ खास और गुप्त शब्दों (कोडवर्ड्स) का इस्तेमाल करता था। जब वो लड़कियों को अपने जाल में फँसाने की बात करता था तो उन्हें ‘प्रोजेक्ट’ कहता था।

किसी के धर्मांतरण की प्रक्रिया को वो ‘मिट्टी पलटना’ कहता था। छांगुर पीर से कोई मिलने आता था तो इसे ‘दीदार करना’ कहा जाता था। किसी का ब्रेनवॉश करने या उसे अपने विचारों में ढालने को ‘काजल करना’ कहा जाता था।

विदेशों से मिलती थी फंडिंग

आगरा, बलरामपुर, प्रयागराज और अलीगढ़ में मिले धर्मांतरण गिरोह के तार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। इन्हें अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, यूएई से फंडिंग मिलती थी। पुलिस का मानना है कि यह तरीका ISIS जैसे आतंकी संगठन इस्तेमाल करते हैं।

इस तरह के धर्मांतरण गिरोह केवल कुछ शहरों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत में बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, हर जगह इनकी पकड़ तेज हो रही है। इनका सिर्फ एक मकसद है- हिंदुओं को अत्संख्यक बनाना और उनका प्रमाण भी भारत से मिटा देना।

अब जरूरत आन पड़ी है कि इन पर अंकुश लगाने के लिए सिर्फ जाँच एजेंसियों पर ही निर्भर न रहा जाए बल्कि अपने आसपास भी जागरूकता बढ़ाई जाए, सतर्कता बरती जाए और अपनी आगामी पीढ़ी को अपने धर्म, संस्कृति और पौराणिकता के बारे में जानकारी दी जाए। तभी इन जैसे गिरोहों को अपने ज्ञान और बुद्दि कौशल से समाज से खत्म किया जा सकता है।

आज की आवश्कता ये है कि आपस में जात-पात, ऊँच-नीच के बार में न लड़कर, समाज में बढ़ रही गंदगी के लिए एकजुट हुआ जाए और उसके खिलाफ लड़ा जाए।

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