गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के कोडिनार स्थित एक दरगाह से घातक हथियार बरामद होने का खुलासा हुआ है। दिल्ली विस्फोट की घटना के बाद SOG समेत पुलिस की कई टीमों ने गुजरात के तटीय इलाके में तलाशी अभियान चलाया था। इसी सिलसिले में कोडिनार के मुलद्वारका इलाके में भी जाँच चल रही थी।

जाँच के दौरान उस इलाके में स्थित हजरत कच्ची पीर की दरगाह से घातक हथियार बरामद हुए। पुलिस ने इस मामले में मामला दर्ज कर दरगाह की संरक्षक अमिनशा इस्माइलशा कनौजिया को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जाँच जारी है। 

घटना के विवरण के अनुसार, रविवार (16 नवंबर 2025) को गिर सोमनाथ जिला पुलिस ने संवेदनशील तटीय गाँवों और बंदरगाह क्षेत्रों की तलाश शुरू की। यह अभियान एसपी जयदीपसिंह जडेजा की देखरेख में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा था।

इस अभियान में दो डीएसपी, छह पुलिस निरीक्षक, सात पुलिस उपनिरीक्षक, एसओजी, एलसीबी और बम निरोधक दस्ते सहित 120 से ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल थे। कोडिनार, ऊना और वेरावल की एक संयुक्त पुलिस टीम ने मूल द्वारका बंदरगाह पर अचानक जाँच की और आस-पास के गाँवों में रहने वाले लोगों से पूछताछ की। 

दरगाह से मिले हथियार

एसओजी टीम को जाँच के दौरान गिर सोमनाथ के हजरत कच्ची पीर बाबा की दरगाह से तलवार, चाकू और खंजर समेत कई हथियार मिले। इस दौरान दरगाह की केयरटेकर (देखभालकर्ता) अमिनशा इस्माइलशा भी वहाँ मौजूद थीं।

पुलिस ने आयोग की मौजूदगी में उनसे हथियार का लाइसेंस माँगा, लेकिन वह नहीं दे पाईं। जिसके बाद पुलिस ने मौके से हथियार जब्त कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। फिलहाल, पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि दरगाह में वो हथियार कैसे आए और इसके पीछे का कारण क्या था?

इस मामले में दरगाह के संरक्षक के खिलाफ कोडिनार थाने में मामला भी दर्ज किया गया है। पुलिस ने खुद शिकायतकर्ता बनकर FIR दर्ज की है। एसओजी के हेड कांस्टेबल गोपाल सिंह मोरी ने शिकायत दर्ज कराई थी और उसके बाद मामला भी दर्ज किया गया है। पुलिस ने अमिनशा इस्माइलशा के खिलाफ गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 के तहत मामला दर्ज किया है। FIR की एक प्रति ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए, शिकायतकर्ता पुलिसकर्मी ने बताया कि गिर सोमनाथ जिले के कलेक्टर ने हथियारों पर प्रतिबंध संबंधी एक अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद पुलिस समेत कई टीमें मूल द्वारका स्थित कच्छी पीर की दरगाह की तलाशी ले रही थीं और वहाँ से हथियार बरामद हुए। इसके बाद दरगाह के संरक्षक मुंजावर के खिलाफ अधिसूचना का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया है। 

पुलिसकर्मी के अनुसार, आरोपित को थाने लाया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये हथियार दरगाह तक कैसे पहुँचे? ये हथियार किसने दिए और इन्हें रखने का क्या मकसद था।

जिला पुलिस प्रमुख ने ऑपइंडिया को क्या बताया?

गिर सोमनाथ जिले के पुलिस प्रमुख जयदीप सिंह जडेजा ने ऑपइंडिया को बताया कि दिल्ली कार ब्लास्ट की घटना के बाद जिला पुलिस टीम ने संवेदनशील इलाकों में तलाशी ली थी, जिसके दौरान एक धर्मस्थल की जाँच के दौरान भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए। चूँकि इनके कोई दस्तावेज नहीं मिले, इसलिए जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जाँच शुरू कर दी गई है।

उन्होंने बताया कि इलाके में जाँच के दौरान कई अन्य मामले भी सामने आए, जिनमें दूसरे राज्यों से आए किराएदार पुलिस को सूचित किए बिना रह रहे थे, जबकि कुछ के खिलाफ अन्य नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई भी की गई है। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस आगे भी ऐसी कार्रवाई करती रहेगी।

बता दें कि पिछले हफ्ते गिर सोमनाथ में ही एक जगह पर तोड़फोड़ अभियान के दौरान दरगाह हटाने गई पुलिस और जिला प्रशासन की टीम पर हमले की घटना भी सामने आई है। इस मामले में महिलाओं समेत कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।

हाल ही में उसी गिर सोमनाथ से कुछ कश्मीरी लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। लेकिन उनके पास से कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। हालाँकि एसपी जडेजा का कहना है कि ये सभी अलग-अलग घटनाएँ हैं और अभी तक इनका कोई संबंध नहीं मिला है।

गुजरात ATS द्वारा पकड़े गए आतंकवादियों ने कलोल के कब्रिस्तान में छिपाए थे हथियार

गौरतलब है कि हाल ही में गुजरात एटीएस ने हथियारों की तस्करी करने गुजरात आए तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया था। यह भी पता चला था कि इन आतंकियों ने गाँधीनगर के कलोल स्थित एक कब्रिस्तान में हथियार छिपा रखे थे।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के दो आतंकी राजस्थान से हथियार लेकर कलोल पहुँचे थे और उन्हें कब्रिस्तान में छोड़ गए थे। बाद में हैदराबाद का सैयद हथियार लेकर आया था। हालाँकि  गुजरात से निकलने से पहले ही ATS की टीम ने उसे पकड़ लिया। फिलहाल इन सभी से पूछताछ की जा रही है।

यह रिपोर्ट मूल रुप से गुजराती में भार्गव राजगुरु ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।



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