कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा और अन्य विपक्षी नेताओं ने उस दावे पर सवाल उठाए हैं जिसमें भाजपा सरकार ने दो भारतीय-ध्वज वाले LPG टैंकरों के होर्मुज पार करने को बड़ी नीतिगत जीत बताया था। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है।
कॉन्ग्रेस का कहना है कि जिन जहाजों शिवालिक और नंदा देवी को इंडियन नेवी की सुरक्षा में होर्मुज पार करने की बात कही जा रही है, वे भारत के लिए गैस नहीं ला रहे थे। विपक्ष का दावा है कि इन जहाजों में भरा LPG भारत नहीं बल्कि अमेरिका के जैक्सन नामक स्थान के लिए भेजा जा रहा था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पवन खेड़ा ने लिखा कि ये जहाज सिर्फ कतर के रास लाफान बंदरगाह से भारतीय झंडे के साथ रवाना हुए थे। उनके अनुसार जहाजों में मौजूद LPG का अंतिम गंतव्य अमेरिका के जैक्सन जा रहा है, जिसे समुद्री ट्रैकिंग वेबसाइट मरीन ट्राफिक पर आसानी से देखा जा सकता है।
सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट्स में मरीन ट्राफिक के डेटा में इन जहाजों की डेस्टिनेशन फील्ड अमेरिका के जैक्सन का दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।

इस दावे को दोहराने वाले अन्य लोगों ने भी मरीन ट्राफिक का एक स्क्रीनशॉट साझा किया। इस स्क्रीनशॉट में जहाज शिवालिक की डेस्टिनेशन जैक्सन US दिखाई देने का दावा किया गया है।
And Its Going To Jacksons USA..
And #Shivalik was out in Gulf of Oman for last 24 hours..
LIAR grade: Vishwaguru https://t.co/4NEY4G1KQv pic.twitter.com/RdEOWQEuHh— Shuvankar Mukherjee (@shuvankr) March 14, 2026
कुछ अन्य लोगों ने वही स्क्रीनशॉट साझा करते हुए यह अटकल भी लगाई कि जहाज का वास्तविक गंतव्य संभवतः जैक्सनविले, फ्लोरिडा हो सकता है।
No, the images are not AI. MarineTraffic indeed shows “Jacksons” (which I’m guessing is Jacksonville port, Florida).https://t.co/wDXdqCYUD7 pic.twitter.com/odV1Q3p9RB
— Angshuman Choudhury (@angshuman_ch) March 14, 2026
हालाँकि, सच्चाई यह है कि जैक्सन नाम का ऐसा कोई समुद्री बंदरगाह मौजूद नहीं है जहाँ बड़े टैंकर जहाज लग सकें। अमेरिकी पोर्ट डायरेक्टरी, US कस्टम्स ऐंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के रिकॉर्ड और समुद्री डेटाबेस की विस्तृत जाँच में यह पुष्टि होती है कि पूरे US में जैक्सन नाम का कोई तटीय बंदरगाह नहीं है जो बड़े LPG टैंकरों को संभाल सके।
सबसे मिलता-जुलता नाम पोर्ट ऑफ जैक्सन का है, जो जैक्सन, मिसीसिपी के पास स्थित एक अंतर्देशीय (इनलैंड) नदी बंदरगाह है। लेकिन यह समुद्र तट पर नहीं है और बड़े समुद्री टैंकर वहाँ तक पहुँच ही नहीं सकते। फ्लोरिडा में पोर्ट ऑफ जैक्सनविल नाम का एक बड़ा बंदरगाह जरूर है, लेकिन वायरल स्क्रीनशॉट में जैक्सन लिखा था, जैक्सनविल नहीं।
एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि US अपनी अधिकांश LPG जरूरत खुद ही पैदा करता है। हालाँकि क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स, विशेष उत्पाद जरूरतों या पुराने व्यापार समझौतों के कारण अमेरिका थोड़ी मात्रा में LPG आयात करता है, लेकिन यह आमतौर पर मध्य-पूर्व से नहीं खरीदी जाती। अमेरिका मुख्य रूप से कनाडा और कुछ यूरोप के देशों से LPG आयात करता है।
दरअसल अमेरिका खुद LPG का बड़ा निर्यातक है और इंडिया अमेरिकी LPG के प्रमुख खरीदारों में से एक है। ऐसे में यह भी कम ही संभव है कि अमेरिका LPG आयात करने के लिए भारतीय ध्वज वाले जहाजों का उपयोग करे।
घरेलू उपयोग के लिहाज से भी दोनों देशों में बड़ा अंतर है। इंडिया में अधिकांश घरों में खाना पकाने के लिए LPG सिलेंडर का ही इस्तेमाल होता है, जबकि US में अधिकतर घर पाइपलाइन से आने वाली प्राकृतिक गैस और बिजली का उपयोग करते हैं।
अमेरिका में भूमिगत पाइपलाइन का बड़ा नेटवर्क है जो सीधे घरों तक प्राकृतिक गैस पहुँचाता है। LPG का इस्तेमाल वहाँ मुख्य रूप से सीमित, ऑफ-ग्रिड घरों या आउटडोर कुकिंग के लिए ही किया जाता है।
भारत की ओर जाने वाले जहाज
ताजा AIS (ऑटोमैटिक आइडेनफकैशन सिस्टम) डेटा से पता चलता है कि इन जहाजों की वास्तविक मंजिल भारतीय बंदरगाह हैं। समुद्री ट्रैकिंग पोर्टलों पर दिखाई दे रहे नवीनतम स्टेटस के अनुसार LPG टैंकर शिवालिक इस समय ओमान की खाड़ी में पूर्व दिशा की ओर बढ़ रहा है। इसका गंतव्य मुंद्रा बंदरगाह, भारत दिखाया गया है और इसके 16 मार्च 2026 तक पहुँचने की संभावना जताई गई है।
इसी तरह दूसरा भारतीय LPG टैंकर नंदा देवी इस समय फारस की खाड़ी में है। इसके गंतव्य के रूप में कांडला पोर्ट दर्ज है और इसके 17 मार्च 2026 के आसपास वहाँ पहुँचने का अनुमान है।
दोनों टैंकरों ने रास लफ़्फ़ान, कतर से LPG लोड किया था। इनमें से शिवालिक ने 14 मार्च को स्ट्रैट ऑफ होरमुज को इंडियन नेवी की सुरक्षा में पार किया। वहीं दूसरा टैंकर नंदा देवी फिलहाल इसी होरमुज को पार कर रहा है। दोनों जहाज भारत की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए वापस इंडिया की ओर बढ़ रहे हैं।
बाद में कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने अपना वह ट्वीट हटा दिया, जब यह स्पष्ट हो गया कि ‘जैक्सन USA’ वाला दावा फर्जी और बेबुनियाद था।
ट्रैकर्स ने कुछ देर के लिए गलत डेस्टिनेशन क्यों दिखाया
चूँकि जैक्सन नाम का कोई समुद्री बंदरगाह मौजूद नहीं है, इसलिए यह माना जा सकता है कि जैक्सन US की एंट्री जहाजों के AIS (ऑटोमैटिक आइडेनफकैशन सिस्टम) ट्रांसपोंडर में मैन्युअल रूप से डाली गई थी। जहाज के क्रू ही ‘रिपॉर्टड डेस्टिनेशन’ वाला फील्ड हाथ से भरते हैं और इसे किसी अथॉरिटी द्वारा खुद भरा जाता है या अपडेट नहीं किया जाता।
अक्सर ऐसा भी होता है कि ये फील्ड पिछले सफर की जानकारी के साथ ही रह जाते हैं या कार्गो लोड होने के बाद अपडेट नहीं किए जाते। सार्वजनिक ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म जैसे मरीन ट्राफिक भी स्पष्ट रूप से क्रू द्वारा डाले गए ‘रिपॉर्टड डेस्टिनेशन‘ और सिस्टम द्वारा जहाज की वास्तविक दिशा, गति और मार्ग के आधार पर निकाले गए मैच डेस्टिनेशन के बीच अंतर दिखाते हैं। संभव है कि क्रू से यह एंट्री गलती से हो गई हो या जानबूझकर डाली गई हो, जिसे बाद में सही कर दिया गया।