आम आदमी पार्टी (AAP) ने राजनीति में पारदर्शिता, अभिव्यक्ति की आजादी और सत्ता से सवाल पूछने के अधिकार को अपना मूल मंत्र बताया था। लेकिन बीते कुछ वर्षों, खासकर पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली AAP सरकार के दौरान, ऐसे अनेक घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनमें सरकार पर आरोप लगा है कि वह अपने खिलाफ आवाज उठाने वालों, मीडिया संस्थानों, पत्रकारों, यूट्यूबर्स और असहमत सुरों पर सरकारी मशीनरी के जरिए दबाव बना रही है।
छापेमारी, गिरफ्तारियाँ, विज्ञापनों पर रोक, अखबार वितरण में बाधा, चैनलों पर कथित ब्लैकआउट और पुलिस कार्रवाई, ये सब ऐसे कदम बताए जा रहे हैं जिन्हें ‘डराने-धमकाने’ की रणनीति के तौर पर देख जा रहा है। नीचे उन प्रमुख मामलों का क्रमवार संकलन है, जिनमें AAP सरकार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने के आरोप लगे हैं।
पंजाब केसरी पर छापेमारी: निशाने पर मीडिया हाउस
15 जनवरी 2026 की रात पंजाब केसरी की बठिंडा और जालंधर (सूरानुसी) स्थित प्रिंटिंग प्रेसों पर पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त कार्रवाई हुई। अखबार के अनुसार, बिना नोटिस घुसकर गेट तोड़े गए, सैंपल जबरन भरे गए, कर्मचारियों से बदसलूकी हुई और कुछ को हिरासत में लिया गया। मारपीट में घायल कर्मचारियों का इलाज सिविल अस्पताल में कराया गया। आरोप है कि पूछताछ पर ‘ऊपर से आदेश’ का हवाला दिया गया।
सीएम और राज्यपाल को पत्र: ‘बदले की कार्रवाई’ का आरोप
पंजाब केसरी समूह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर कहा कि 31 अक्टूबर 2025 को AAP के राष्ट्रीय नेतृत्व से जुड़े आरोपों पर निष्पक्ष रिपोर्टिंग के बाद से अखबार को निशाना बनाया जा रहा है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार ने समूह के सभी सरकारी विज्ञापन रोक दिए और 10 से 15 जनवरी 2026 के बीच लगातार छापेमारी कराई गई। समूह ने निष्पक्ष जाँच और तत्काल कार्रवाई की माँग की।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने छापेमारी की निंदा करते हुए कहा कि AAP सरकार जनआक्रोश से घबराकर मीडिया को डराने पर उतर आई है। नायब सैनी ने इसे लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर सुनियोजित हमला बताया।
वहीं, BJP के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि पंजाब में AAP सरकार उन मीडिया संस्थानों पर कार्रवाई कर रही है जो सरकार से कठिन सवाल पूछते हैं। अमित मालवीय ने छापों, बिजली कटौती और पुलिस तैनाती को बदले की कार्रवाई बताया और इसे इमरजेंसी जैसे हालातों से जोड़ा।
AAP दफ्तर पर पत्रकार से बदसलूकी
सितंबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने AAP मीडिया कोऑर्डिनेटर विकास कुमार योगी के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया था। हालाँकि, कोर्ट ने आम आदमी पार्टी की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए थे। अदालत ने मामले की गंभीरता को कम नहीं माना और इस पर कड़ी टिप्पणी भी की थी।
एक मामला मई 2024 का है, जब AAP कार्यालय के बाहर कथित विदेशी फंडिंग से जुड़ी खबर कवर करने पहुँची वरिष्ठ महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी हुई थी। FIR के मुताबिक, विकाश कुमार योगी के इशारे पर 8-10 पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पत्रकार और उनके कैमरा-पर्सन को घेर लिया था, कैमरा छीनने की कोशिश की, धक्का-मुक्की की और आपत्तिजनक नारे लगाए थे।
इसके बाद जून 2025 में आपसी समझौते के बाद AAP मीडिया कोऑर्डिनेटर विकास कुमार ने बिना शर्त माफी माँगी थी। पत्रकार ने भी कोर्ट को बताया था कि अब उनकी कोई शिकायत नहीं थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने FIR रद्द की थी, जिससे AAP नेताओं के रवैये पर राजनीतिक और मीडिया हलकों में तीखी चर्चा हुई थी।
अजीत भारती ने पंजाब पुलिस की कार्रवाई से सुरक्षा के लिए किया था हाई कोर्ट का रुख
28 अक्टूबर 2025 को यूट्यूबर अजीत भारती ने पंजाब पुलिस की संभावित कार्रवाई से सुरक्षा की माँग को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में अजीत भारती ने कहा था कि इंटरनेट मीडिया पर की गई उनकी टिप्पणियों को लेकर पंजाब पुलिस द्वारा FIR दर्ज की गई थी, लेकिन उन्हें अब तक कोई आधिकारिक सूचना या विवरण नहीं दिया गया था।
मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से ही उन्हें यह जानकारी मिली थी कि उनके खिलाफ सख्त धाराओं और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए थे। अजीत भारती ने आशंका जताई थी कि बिना पूर्व सूचना और सुनवाई के उनके खिलाफ दमनात्मक कदम उठाए जा सकते थे।
मुजफ्फरनगर से यूट्यूबर रचित कौशिक की गिरफ्तारी, पंजाब पुलिस पर किडनैपिंग जैसे आरोप
6 फरवरी 2024 की रात सोशल मीडिया पर दिल्ली के एक पत्रकार के मुजफ्फरनगर से किडनैप होने की खबरें सामने आई थीं। बाद में स्पष्ट हुआ था कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति यूट्यूबर रचित कौशिक थे, जिन्हें आम आदमी पार्टी शासित पंजाब पुलिस अपने साथ ले गई थी।
रचित कौशिक ‘सब लोकतंत्र’ नाम से सोशल मीडिया चैनल चलाते थे और दिल्ली के शाहदरा में रहते थे। वे उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अपनी भांजी की शादी में शामिल होने आए थे।
परिजनों के अनुसार, 6 फरवरी की शाम करीब 7 बजे सफेद स्कॉर्पियो में आए 4 सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन उठा लिया था। न तो पुलिस वर्दी में थी और न ही स्थानीय पुलिस मौजूद थी। बाद में पता चला कि लुधियाना में दर्ज एक FIR के आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई थी।
रचित कौशिक के इंस्टाग्राम से की गई पोस्ट के अनुसार, उन्होंने AAP नेताओं के भ्रष्टाचार को लेकर एक वीडियो बनाया था जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है। उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि ऐसा उनसे बदला लेने के लिए किया गया था।
पंजाब में जी मीडिया चैनलों पर प्रतिबंध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उठे सवाल
28 मई 2024 को पंजाब सरकार ने राज्य में जी मीडिया के सभी चैनलों के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया था। ZEE न्यूज हिंदी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान जी न्यूज द्वारा जनहित से जुड़े मुद्दे उठाने और राज्य सरकार की कमियों पर सवाल खड़े करने के बाद यह कार्रवाई की गई थी।
उस समय जी मीडिया ने इस प्रतिबंध को लेकर सवाल उठाया था कि क्या पंजाब में आपातकाल जैसी स्थिति है और इसलिए सरकार से सवाल नहीं किया जा सकता और अगर किया गया तो ये अंजाम भुगतने होंगे।
मामले को लेकर जी न्यूज से बातचीत में भाजपा नेता जवाहर यादव ने कहा था कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की अनुमति के बिना राज्य में सच्चाई दिखाने की इजाजत नहीं है। उन्होंने मीडिया को निशाना बनाने वालों से इस कथित प्रतिबंध पर खुलकर सामने आने की अपील की थी।
इस पूरे मामले पर भगवंत मान सरकार ने उस समय कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था। वहीं, 27 मई 2024 को भाजपा नेता तजिंदर बग्गा द्वारा AAP मंत्री बलकार सिंह पर लगे आरोपों के वीडियो के बाद सरकार पहले से ही विवादों में घिरी हुई थी।
टाइम्स नाउ की पत्रकार भावना किशोर की गिरफ्तारी, जमानत के बाद सामने आई हिरासत की पीड़ा
टाइम्स नाउ नवभारत की महिला पत्रकार भावना किशोर को 5 मई 2023 को पंजाब पुलिस ने उनके दो सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी आम आदमी पार्टी के एक कार्यक्रम की कवरेज के दौरान की गई थी। बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इसे गैर-कानूनी बताते हुए तीनों को जमानत दे दी थी।
जमानत के बाद 9 मई 2023 को ग्रुप एडिटर नविका कुमार और एंकर सुशांत सिन्हा से बातचीत में भावना किशोर ने हिरासत के दौरान हुई कथित मानसिक प्रताड़ना का खुलासा किया था। उन्होंने बताया कि उनसे जाति पूछी गई और वॉशरूम का इस्तेमाल दरवाजा खुला रखकर करने को कहा गया था।
भावना ने बताया कि ये सब उन पर दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल के बंगले को लेकर किए गए खुलासे ‘ऑपरेशन शीशमहल’ को हटाने का दबाव बनाने के लिए किया गया था।
केजरीवाल-मान प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार से बदसलूकी
30 अप्रैल 2022 को दिल्ली के द इम्पीरियल होटल में आयोजित दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार के साथ बदसलूकी का मामला सामने आया था। पत्रकार नरेश वत्स ने इस संबंध में कनॉट प्लेस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
नरेश वत्स का कहना था कि जब वह कार्यक्रम कवर करने पहुँचे थे, तब एंट्री गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक लिया था। उन्होंने अपना PIB कार्ड दिखाया था, लेकिन जाँच के बहाने कार्ड लेकर कुछ देर बाद यह कहकर लौटा दिया गया कि वह रिपोर्टर नहीं हैं और उन्हें अंदर जाने नहीं दिया जाएगा।
नरेश वत्स ने आरोप लगाया था कि जब उन्होंने रिपोर्टर होने की कसौटी पूछी, तो पंजाब पुलिस के अफसरों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था और उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दी गई थी। विरोध करने पर उन्हें घसीटकर बाहर निकाला गया था, जो सीसीटीवी में दर्ज था।
ऑक्सीजन संकट पर सवाल उठाने की सजा
दिल्ली में कोविड-19 महामारी के दौरान ऑक्सीजन संकट को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाना पत्रकारों को भारी पड़ा था। 6 मई 2021 को दिल्ली सरकार के मीडिया सेल ने हिंदुस्तान टाइम्स के सात पत्रकारों को उस आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया था, जिसके जरिए प्रेस नोट, प्रेस कॉन्फ्रेंस की सूचनाएँ और रोजाना स्वास्थ्य बुलेटिन साझा किया जाता था।
यह कार्रवाई दिल्ली सरकार के चीफ मीडिया कोऑर्डिनेटर विकास योगी द्वारा की गई थी, लेकिन पत्रकारों को हटाने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया था। मीडिया से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह कदम हिंदुस्तान टाइम्स की 6 मई की एक रिपोर्ट के बाद उठाया गया था, जिसमें दिल्ली सरकार के ऑक्सीजन संकट से निपटने में हुई विफलताओं को उजागर किया गया था।
रिपोर्ट में बताया गया था कि सरकार के पास क्रायोजेनिक टैंकरों की कमी थी, अस्पतालों के लिए दैनिक ऑक्सीजन आवंटन की कोई ठोस योजना नहीं थी, ऑक्सीजन प्लांट लगाने में देरी हुई और केंद्र सरकार से मदद भी देर से माँगी गई थी।
ग्रुप से हटाए जाने के बाद कई पत्रकारों ने इसका विरोध किया था और स्पष्टीकरण माँगा था, लेकिन सरकार की ओर से चुप्पी साध ली गई थी। पत्रकारों का कहना था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस अब सिर्फ रिकॉर्डेड वीडियो तक सीमित हो गई थीं, जहाँ सवाल पूछने की कोई गुंजाइश नहीं बची थी।
इस घटना को मीडिया की आवाज दबाने और सरकार की आलोचना करने वालों को हाशिये पर डालने की कोशिश के रूप में देखा गया था।
स्टिंग विवाद में AAP का पत्रकार और न्यूज चैनल पर मानहानि का मुकदमा
25 नवंबर 2013 को आम आदमी पार्टी (AAP) ने पत्रकार अनुरंजन झा और न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। यह कार्रवाई उस स्टिंग ऑपरेशन के सामने आने के एक दिन बाद हुई थी, जिसमें AAP के कई प्रमुख नेताओं को बिना उचित पृष्ठभूमि जाँच के चंदा स्वीकार करने को तैयार दिखाया गया था।
यह स्टिंग ‘मीडिया सरकार’ द्वारा किया गया था और दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सामने आया था, जब AAP अपना पहला चुनावी डेब्यू करने जा रही थी। AAP ने दावा किया था कि स्टिंग की CD से महत्वपूर्ण हिस्से काटे गए थे और फुटेज को एडिट कर पार्टी नेताओं को गलत रोशनी में दिखाया गया था।
स्टिंग में शाजिया इल्मी सहित कई नेता शामिल बताए गए थे, लेकिन AAP ने उस समय न तो इल्मी का इस्तीफा स्वीकार किया था और न ही स्टिंग के आधार पर उम्मीदवारों के खिलाफ कोई कार्रवाई की थी। विपक्ष और आलोचकों ने इसे पारदर्शिता के दावों के विपरीत कदम बताया था।
पंजाब में ‘मूक आपातकाल’: AAP सरकार पर प्रेस की आवाज दबाने का आरोप
पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार पर उस समय भी गंभीर आरोप लगे थे, जब 3 नवंबर 2025 को पंजाब पुलिस ने राज्य के कई हिस्सों में अखबार वितरण करने वाले वाहनों को रोककर तलाशी ली थी। यह कार्रवाई सुबह के करीब 4 बजे शुरू हुई थी, ठीक उसी समय जब प्रिंटिंग प्रेसों से अखबारों की खेप निकलती है।
इसके कारण कई इलाकों में अखबार पाठकों तक पहुँच ही नहीं पाए थे, जबकि कुछ स्थानों पर वितरण घंटों देरी से हुआ था। ड्राइवरों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए थे, जिससे अखबार प्रबंधन और कर्मचारियों में भारी अफरा-तफरी मची थी। कई वाहन सुबह 8 बजे के बाद छोड़े गए थे, जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा गई थी।
चंडीगढ़ प्रेस क्लब ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया था। विपक्षी दलों ने इसे ‘शीश महल’ रिपोर्ट्स से घबराई AAP सरकार की बौखलाहट करार दिया था। भाजपा, कॉन्ग्रेस और अकाली दल के नेताओं ने कहा था कि पंजाब के इतिहास में आपातकाल और आतंकवाद के दौर में भी कभी अखबारों को नहीं रोका गया था।
लोकतंत्र की कसौटी पर सरकार
इन तमाम घटनाओं के संकलन से एक गंभीर सवाल खड़ा होता है कि क्या सत्ता में आने के बाद AAP ने आलोचना सहने की अपनी क्षमता खो दी है? मीडिया, पत्रकारों और असहमत आवाजों पर बार-बार कार्रवाई के आरोप लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट माने जाते हैं। सरकार का दायित्व है कि वह निष्पक्ष जाँच, पारदर्शिता और कानून के शासन से संदेह दूर करें। क्योंकि जब सवाल पूछने वालों को डराया जाता है, तो नुकसान केवल किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र का होता है।
