ईरान में पिछले दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों ने अब एक बेहद खौफनाक मोड़ ले लिया है। जहाँ एक तरफ ईरानी अधिकारियों ने पहली बार माना है कि सुरक्षाकर्मियों समेत लगभग 2,000 लोग मारे गए हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संस्थाओं का दावा है कि हकीकत इससे कहीं ज्यादा डरावनी है।
वहीं, बात करें ‘ईरान इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तो सिर्फ 8 और 9 जनवरी 2026 की दो रातों में ही करीब 12,000 लोगों को बेरहमी से मार दिया गया। इस हिंसा पर दुनिया भर में गुस्सा है। जर्मनी के चांसलर का मानना है कि अब ईरान की सरकार गिरने वाली है।
‘खूनी’ खेल और सरकार की सफाई
जानकारी के अनुसार, ईरान में बिगड़ती अर्थव्यवस्था और सख्त पाबंदियों के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं। सरकार ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। एक ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स से बात करते हुए इन मौतों के लिए ‘आतंकियों’ को जिम्मेदार ठहराया है।
उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों की आड़ में छिपे आतंकी सुरक्षा बलों और आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। हालाँकि, नोबेल विजेता शिरीन एबादी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने इंटरनेट बंद करके और मीडिया पर ताला लगाकर एक ‘संगठित नरसंहार’ किया है ताकि दुनिया को सच पता न चल सके।
जर्मनी की भविष्यवाणी: ‘यह सरकार का आखिरी समय’
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज ने ईरान की स्थिति पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि हम इस शासन के आखिरी दिन और हफ्ते देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो सरकार हिंसा के दम पर टिकना चाहती है, उसका अंत निश्चित है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने मेर्ज के इस बयान को ‘दोहरा मापदंड’ बताते हुए खारिज कर दिया है। अराक्ची ने कहा कि जर्मनी को दूसरों को ज्ञान देने के बजाय अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।
शांति की अपील या युद्ध की तैयारी?
संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादी’ कहने पर ईरान को लताड़ा है और हिंसा रोकने की अपील की है। नीदरलैंड, स्पेन और फिनलैंड जैसे देशों ने भी ईरान के राजदूतों को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया है।
ईरान सरकार एक तरफ प्रदर्शनों को जायज बता रही है तो दूसरी तरफ भारी बल प्रयोग कर रही है। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अगर युद्ध हुआ तो उसके लिए भी पूरी तैयारी है।
