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आए दिन राजनीतिक हत्याएँ और गैंगवार, नशे के अड्डे से लेकर खालिस्तानी आंतकवाद तक: जानें कैसे AAP सरकार में पंजाब में बढ़ रहा अपराध?


पंजाब

अमृतसर के मैरीगोल्ड मैरिज पैलेस में रविवार (4 जनवरी 2026) को उस समय सनसनी फैल गई, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के सरपंच जरमैल सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। CCTV फुटेज में दिखा कि थ्री-पीस सूट पहने दो हमलावर शादी समारोह में बेखौफ अंदर घुसे, 50 वर्षीय ग्रामप्रधान के पास पहुँचे और बेहद करीब से सिर में गोली मार दी।

गोली चलने के बाद शादी में मौजूद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, जबकि हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना के कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर सामने आए एक पोस्ट में गैंगस्टर प्रभ ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली। वैसे तो पंजाब में हिंसा की घटनाएँ नई नहीं हैं, लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी के एक स्थानीय नेता की इस तरह खुलेआम हत्या ने पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पुलिस व्यवस्था पूरी तरह विफल होने का आरोप लगाया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मान के पास ही राज्य का गृह मंत्रालय भी है।

एक्स पर एक अन्य पोस्ट में सुखबीर सिंह बादल ने बताया कि साल 2026 के पहले छह दिनों में ही पंजाब में चार हत्याएँ हो चुकी हैं। उन्होंने लिखा कि शुक्रवार (2 जनवरी 2026) को कपूरथला में एक महिला की हत्या हुई, मोगा के भिंडर कलाँ इलाके में एक व्यक्ति को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया, जगराओं के मनुके गाँव में कबड्डी खिलाड़ी गगनदीप की हत्या कर दी गई और इसके अलावा अमृतसर में आम आदमी पार्टी के सरपंच की दिनदहाड़े हत्या हुई।

एक्स पर एक पोस्ट में, भारतीय जनता पार्टी (पंजाब) ने कहा कि राज्य में कोई ‘कानून और व्यवस्था’ नहीं है। पार्टी ने कहा, ‘यह गुंडाराज का शासन है’।

दिनदहाड़े राजनीतिक हत्याएँ

सरपंच की हत्या कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि यह पिछले कुछ महीनों में पंजाब को झकझोर देने वाली राजनीतिक हत्याओं की एक कड़ी का हिस्सा है। सरपंच की हत्या से ठीक 48 घंटे पहले मोगा में कॉन्ग्रेस नेता उमरसीर सिंह को गोलियों से भून दिया गया। बताया गया कि इस हमले के पीछे स्थानीय रंजिश थी, जिसमें आम आदमी पार्टी के एक पदाधिकारी का नाम भी सामने आया, जो चिंता का विषय है।

लगातार हुई इन राजनीतिक हत्याओं से एक सत्तारूढ़ दल के नेता और दूसरी विपक्षी पार्टी के नेता की एक कड़वी सच्चाई सामने ला दी है कि पंजाब में अब न तो सत्ता पक्ष और न ही विपक्ष का कोई नेता खुद को सुरक्षित महसूस कर सकता है।

इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री परगट सिंह ने राज्य में हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “हाल के वर्षों में पंजाब ने ऐसी अराजकता कभी नहीं देखी।” परगट सिंह समेत कई विपक्षी नेताओं ने हालात को सरकार के नियंत्रण से बाहर बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की माँग की।

गौर करने वाली बात यह है कि ये सभी राजनीतिक हत्याएँ दिनदहाड़े, सार्वजनिक जगहों पर की गईं। सरपंच की हत्या के CCTV फुटेज से साफ दिखता है कि हमलावरों को पुलिस की कोई चिंता नहीं थी। इसी तरह उमरसीर सिंह की हत्या के बाद भी आरोपित आसानी से फरार हो गए।

कॉन्ग्रेस विधायक गुरजीत औजला ने आम आदमी पार्टी सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह नाकाम रहने का आरोप लगाया और कहा कि अब छोटे-छोटे स्थानीय विवाद भी खुलेआम जानलेवा हिंसा में बदल रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है जब आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान पंजाब में इतनी बड़ी और चर्चित हत्याएँ हुई हों। साल 2022 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध लेकिन विवादित गायक और कॉन्ग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े, आधुनिक हथियारों से की गई हत्या ने राज्य में गैंगवार और संगठित अपराध के बढ़ते खतरे की चेतावनी दी थी।

बाद में यह हत्या गैंग आपसी रंजिश से जुड़ी पाई गई, जिसने राजनीति और संगठित अपराध के खतरनाक गठजोड़ को उजागर किया। इसके बाद हिंसक घटनाओं की संख्या और दुस्साहस लगातार बढ़ता चला गया।

जबरन वसूली, गिरोह और खेल के मैदान में जंग

राजनीति से आगे बढ़कर अब संगठित अपराध गिरोहों ने पंजाब को अपना खेल और जंग का मैदान बना लिया है। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि राज्य में गैंगस्टरों से फिरौती की कॉल आना अब आम बात हो गई है और इस डर के माहौल में आम लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।

बाजवा ने आरोप लगाया कि गैंग सरगना खुलेआम घूम रहे हैं और प्रशासन ने ग्रामीण इलाकों में लगभग अपना नियंत्रण खो दिया है। वहीं शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मौजूदा हालात को जंगल राज बताते हुए कहा कि व्यापारी, डॉक्टर, कलाकार और खिलाड़ी सभी फिरौती माँगने वालों के गंभीर खतरों का सामना कर रहे हैं और हिंसक बदला लेना अब सामान्य होता जा रहा है।

कानून-व्यवस्था की हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जुलाई 2025 में फाजिल्का जिले के अबोहर में प्रसिद्ध कारोबारी संजय वर्मा की उनकी दुकान के बाहर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। संजय वर्मा मशहूर कपड़ा ब्रांड वियर वेल के सह-संस्थापक थे और उन्हें कुर्ता-पायजामा किंग के नाम से जाना जाता था। इस हत्या के बाद व्यापारियों ने विरोध में हड़ताल भी भी किया था।

राज्य की कुख्यात गैंगवार अब खेल के मैदान तक पहुँच चुकी है। पंजाब के लोकप्रिय ग्रामीण खेल कबड्डी में भी हाल के वर्षों में खून-खराबा देखने को मिला है, क्योंकि अपराधी गिरोह इसके बड़े और मुनाफे वाले टूर्नामेंटों को प्रभावित करने की कोशिश करते रहे हैं।

दिसंबर 2025 में मोहाली के एक खचाखच भरे स्टेडियम में कबड्डी प्रमोटर कंवर दिग्विजय उर्फ राणा बलाचौरिया की खुद को प्रशंसक बताने वाले हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह वारदात अपराध और खेल के खतरनाक गठजोड़ की मिसाल बन गई। करीब 100 करोड़ रुपए के कारोबार वाली कबड्डी अब सट्टेबाजी, गैंग रंजिश और हिसाब-किताब चुकाने का जरिया बनती जा रही है।

अक्टूबर 2025 में जगराओं में मैदान पर हुए विवाद के दौरान 25 वर्षीय खिलाड़ी तेजपाल सिंह को गोली मार दी गई थी। एक महीने बाद समराला में एक अन्य खिलाड़ी गुरविंदर सिंह की हत्या कर दी गई, जिसकी जिम्मेदारी सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली थी।

इससे पहले 2022 में जालंधर में एक टूर्नामेंट के दौरान अंतरराष्ट्रीय कबड्डी स्टार संदीप नंगल अंबियाँ की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जाँच में सामने आया कि यह हत्या खेल प्रमोटरों के बीच रंजिश का नतीजा थी।

हर हत्या के साथ मुनाफे वाली कबड्डी दुनिया में अंडरवर्ल्ड का संतुलन बदलता रहा, जहाँ गिरोह टूर्नामेंटों पर कब्जा, सट्टेबाजी और खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट्स पर असर डालने की कोशिश करते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में एक जाँच अधिकारी ने बताया कि गैंगों की पकड़ इतनी गहरी हो चुकी है कि कई खिलाड़ी चुपचाप मैच हारने के दबाव और गैंग से जुड़े सट्टेबाजों की धमकियों की बात करते हैं।

राज्य में गैंगस्टर कानून के डर के बिना अपनी गतिविधियाँ चला रहे हैं। हालाँकि मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार गैंगवार पर लगाम लगाने के प्रयास भी कर रही है। साल 2022 में राज्य सरकार ने एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) का गठन किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नवंबर 2025 तक टास्क फोर्स ने 2,209 गैंगस्टरों को गिरफ्तार किया, 21 को ढेर किया, 825 नेटवर्क तोड़े और बड़ी मात्रा में हथियार, वाहन और नशा बरामद किया। बावजूद इसके, आरोप लगते रहे हैं कि बीते कुछ वर्षों में सरकारी चूक के कारण गैंगों को फलने-फूलने का मौका मिला।

प्रताप सिंह बाजवा ने यहाँ तक आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और पुलिस के कुछ लोग चुपचाप गैंगस्टरों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। उनका दावा है कि जो पीड़ित फिरौती की शिकायत लेकर पुलिस के पास जाते हैं, उन्हें सख्त कार्रवाई का भरोसा देने के बजाय अपराधियों से ही आपस में समझौता कर लेने की सलाह दी जाती है।

बाजवा के ये आरोप बेहद गंभीर हैं, क्योंकि ये जनता की सोच और भरोसे की हकीकत को सामने लाते हैं। आम लोगों के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि पुलिस या तो प्रभावशाली गैंग सरगनाओं से निपटने में सक्षम नहीं है या फिर ऐसा करना ही नहीं चाहती।

इसी हालात पर चिंता जताते हुए पंजाब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने राज्य को गैंगलैंड बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब में आम लोग डर और खौफ के साए में जी रहे हैं, जबकि गैंगस्टर खुलेआम घूम रहे हैं और कानून उन्हें छू भी नहीं पा रहा है।

नार्को-टेरर स्टेट, ड्रग्स और आतंकी हमले

एक तरफ जहाँ पंजाब में घरेलू अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नशे की गंभीर समस्या का एक और खतरनाक पहलू सामने आता है, जो नर्को-आतंकवाद से जुड़ता है। ओपइंडिया पहले भी पंजाब के संदर्भ में नर्को-आतंकवाद पर विस्तार से रिपोर्ट कर चुका है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक साल 2023 में पंजाब में NDPS एक्ट के तहत 11,589 मामले दर्ज किए गए। यह केरल और महाराष्ट्र के बाद देश में तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। खास बात यह है कि इन मामलों में से 7,785 केस नशे की तस्करी से जुड़े थे, न कि सिर्फ व्यक्तिगत सेवन से।

ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पंजाब केवल नशे का बाजार नहीं है, बल्कि संगठित ड्रग तस्करी का एक बड़ा ट्रांजिट रूट भी बन चुका है। पाकिस्तान से लगी लंबी सीमा के कारण पंजाब तस्करों के लिए पसंदीदा रास्ता बन गया है। सीमा पार बैठे नेटवर्क ड्रोन, सुरंगों और कूरियर सिस्टम के जरिए न सिर्फ नशा, बल्कि हथियार भी पंजाब में भेज रहे हैं।

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने एक बयान में आम आदमी पार्टी सरकार की उदासीनता को नर्को-आतंकवाद के दोबारा सिर उठाने के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दिसंबर 2022 में तरनतारन में हुए रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) हमलों को सीधे तौर पर बढ़ते नशे के कारोबार और कमजोर सीमा सुरक्षा से जोड़ा। वहीं कॉन्ग्रेस नेता राजा वड़िंग ने सोशल मीडिया पर हालात को बेहद गंभीर बताते हुए राज्य और केंद्र सरकार से मिलकर नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि पंजाब में इस तरह के हमले पहले भी होते रहे हैं। मई 2022 में एक पुलिस इमारत पर RPG हमला हुआ था, जबकि 2021 में लुधियाना जिला कोर्ट में विस्फोट हुआ। सितंबर 2024 में भी चंडीगढ़ के सेक्टर-10 में धमाका हुआ, जो पंजाब और हरियाणा की साझा राजधानी है। इन घटनाओं से साफ है कि सरकार चाहे किसी भी पार्टी की रही हो, राज्य समय-समय पर ऐसे हमलों से दहलता रहा है।

इन दुस्साहसी हमलों ने न सिर्फ पड़ोसी राज्यों को चिंता में डाला है, बल्कि केंद्रीय एजेंसियों की भी नींद उड़ाई है। आम पंजाबियों के लिए ये धमाके 1980 और 1990 के दशक के उस दौर की डरावनी याद दिलाते हैं, जब उग्रवाद के दौरान बम धमाके और गोलीबारी आम बात थी।

इसी बीच राज्य में खालिस्तानी अलगाववादी प्रचार भी ज्यादा खुलकर सामने आने लगा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण स्वयंभू उपदेशक अमृतपाल सिंह का उभार रहा। फरवरी 2023 में उसका कट्टर खालिस्तानी अभियान हिंसा में तब बदल गया, जब उसके समर्थकों ने तलवारों, बंदूकों और श्री गुरु ग्रंथ साहिब को ढाल बनाकर अमृतसर के पास अजनाला थाने पर धावा बोल दिया। वे उसके एक गिरफ्तार साथी की रिहाई की माँग कर रहे थे।

थाने पर हुए इस हमले के दृश्य पूरे देश में दिखाए गए। सैकड़ों लोगों ने बैरिकेड तोड़कर थाने को घेर लिया, कई पुलिसकर्मी घायल हुए और यह राज्य प्रशासन के लिए बड़ी बेइज्जती साबित हुई। सबसे खतरनाक बात यह रही कि भीड़ अपने मकसद में कामयाब रही और अमृतपाल के साथी को छुड़ा ले गई। इससे यह संदेश गया कि कट्टरपंथी पुलिस को खुली चुनौती दे सकते हैं।

इसके बाद कई हफ्तों तक अमृतपाल सिंह पुलिस से बचता रहा, जब तक कि देशव्यापी तलाशी अभियान के बाद उसे गिरफ्तार नहीं कर लिया गया। अजनाला कांड और उसके बाद की खालिस्तान समर्थक गतिविधियों ने यह उजागर कर दिया कि राज्य की आतंक-रोधी व्यवस्था कितनी कमजोर हो चुकी है।

जाँच के दौरान जब अमृतपाल से जुड़े ठिकानों पर छापे मारे गए, तो अधिकारियों ने बताया कि वह एक निजी मिलिशिया खड़ी कर रहा था। वहाँ से हथियार, बुलेटप्रूफ जैकेट और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद हुआ। बाद में उसे गिरफ्तार कर असम की जेल में भेज दिया गया और ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया।

हैरानी की बात यह रही कि गंभीर आरोपों में जेल में बंद होने के बावजूद उसे 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई, जिसे उसने जीत भी लिया। हालाँकि सांसद बनने के बावजूद वह जेल में ही रहा और संसद की एक भी बैठक में शामिल नहीं हो सका।

पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भेजे जा रहे हथियार, विदेश बैठे खालिस्तानी नेताओं के प्रचार वीडियो और पंजाब की धरती पर होने वाले रहस्यमय धमाके ये सभी पिछले दो दशकों में कागजों पर बनी शांति को धीरे-धीरे कमजोर करते जा रहे हैं।

AAP सरकार में पंजाब का हाल

जब 2022 में भगवंत मान ने पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली, तो उनकी सरकार ने नई शुरुआत का वादा किया था। गैंगवार और नशे पर काबू पाने के लिए कुछ फैसले भी किए गए, लेकिन उनके नतीजे सीमित ही नजर आए।

सरकार की ओर से ड्रग माफिया के घरों पर बुलडोजर चलाने, पंजाब पुलिस की विशेष इकाइयों द्वारा नशे की बरामदगी करने और सीमा पर BSF के साथ मिलकर ड्रोन पकड़ने की कार्रवाई की गई। आम आदमी पार्टी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया कि 2024 में 283 ड्रोन, जिनमें हेरोइन, हथियार और गोला-बारूद थे उनको जब्त किया गया। अगस्त 2025 तक 137 ड्रोन और बरामद किए गए। इसके बावजूद राज्य से नशे की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है।

इसी तरह, हत्या, चोरी और अन्य अपराधों में बढ़ोतरी ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। हालात ऐसे हो गए कि जज तक चोरी से नहीं बचे। मार्च 2023 में अतिरिक्त सत्र जज रवदीप हुंदल के सरकारी आवास में चोरी हुई, जहाँ चोर नल और गीजर तक उखाड़ ले गए। अक्टूबर 2024 में अमृतसर का एक CCTV वीडियो सामने आया, जिसमें दिनदहाड़े एक महिला ने बहादुरी दिखाते हुए तीन चोरों को अपने घर में घुसने से रोक दिया।

कॉन्ग्रेस के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की माँग करते हुए कहा कि वह गृह विभाग और पंजाब पुलिस को प्रभावी ढंग से संभालने में विफल रहे हैं। बाजवा ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री में जरा भी आत्मसम्मान है, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।

पिछले साल जुलाई में अबोहर के व्यापारी की दिनदहाड़े हत्या के बाद बाजवा ने विधानसभा में कहा था कि आज कोई भी पंजाबी सुरक्षित नहीं है और गैंगस्टर इसलिए बेखौफ हैं क्योंकि प्रशासन सोया हुआ है।

हालाँकि हाल के महीनों में पंजाब पुलिस ने राइफलें, RDX विस्फोटक और हेरोइन की बड़ी खेपें बरामद की हैं, जो यह दिखाती हैं कि अपराध और आतंक का नेटवर्क कितना हथियारबंद और मजबूत है।

लेकिन इन सफलताओं पर लगातार हो रहे हमलों की बेखौफ घटनाएँ भारी पड़ जाती हैं। भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने कहा कि हर हत्या के बाद आम आदमी पार्टी सरकार की कान फोड़ने वाली चुप्पी गैंगस्टरों का हौसला और बढ़ा देती है और नियंत्रण में देरी का मतलब है कि हालात हाथ से निकलते जा रहे हैं।

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता दलजीत चीमा ने भी मुख्यमंत्री पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रहने का आरोप लगाया और कहा कि अगर वह हालात नहीं संभाल सकते, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

आँकड़े भी इन चिंताओं की पुष्टि करते हैं। NCRB के 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी सरकार के शुरुआती साल में पंजाब में संज्ञेय अपराधों (IPC + विशेष कानून) में हल्की बढ़ोतरी हुई थी, हालाँकि 2023 में इसमें थोड़ी गिरावट दर्ज की गई। 2023 में राज्य में कुल 69,944 मामले दर्ज हुए, जिनमें 44,872 IPC अपराध और 25,072 विशेष या स्थानीय कानूनों के तहत मामले थे।

हालाँकि प्रति लाख आबादी पर अपराध दर करीब 228 है, जो कई बड़े राज्यों से कम है, लेकिन अपराधों की प्रकृति लोगों को ज्यादा डरा रही है। हिंसक अपराधों की संख्या और उनका असर साफ दिख रहा है।

2023 में पंजाब में 681 हत्याएँ दर्ज हुईं, यानी हर एक लाख आबादी पर करीब 2.2 हत्याएँ। यह 2022 के 718 मामलों से बस मामूली कम है। दूसरे शब्दों में, राज्य में औसतन रोज दो लोगों की हत्या अब भी हो रही है, जिनमें से कई आपसी रंजिश और गैंगवार से जुड़ी हैं।

संपत्ति से जुड़े अपराध, जैसे चोरी और सेंधमारी, हर साल IPC मामलों का बड़ा हिस्सा बने रहते हैं। पंजाब में चोरी के हजारों मामले दर्ज हुए, जिससे संपत्ति अपराध दर करीब 146 प्रति लाख तक पहुँच गई।

इन आंकड़ों के पीछे नशे का कारक भी अहम है। 2023 में NDPS एक्ट के तहत मामले बढ़कर 11,589 हो गए, यानी 37.6 प्रति लाख आबादी और नशीले पदार्थों की बरामदगी में पंजाब देश के अग्रणी राज्यों में रहा।

NCRB की ताजा रिपोर्ट से साफ तस्वीर उभरती है कि पंजाब में अपराध न सिर्फ संख्या में ज्यादा हैं, बल्कि उनका स्वरूप भी लगातार ज्यादा खौफनाक होता जा रहा है। कुल मिलाकर, पंजाब एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ा है। जिस राज्य ने उग्रवाद के भयावह दौर से निकलने के लिए भारी कीमत चुकाई थी, वह अब नए लेकिन जाने-पहचाने खतरों का सामना कर रहा है।

अब जिम्मेदारी सरकार पर है कि वह सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि काम करके साबित करे कि वह अपराध और आतंक के इस जाल को तोड़ सकती है। अगर सरकार इसमें नाकाम रही, तो जनता का फैसला सख्त होगा और वह पूरी तरह जायज भी होगा।

(मूलरूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में अनुराग ने लिखी है, जिसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)



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