मुंबई में अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कांशीराम जयंती को ‘PDA दिवस’ (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) के रूप में मनाने का भव्य ऐलान किया था। पार्टी ने पूरे उत्तर प्रदेश में जिला स्तर पर कार्यक्रमों का निर्देश जारी किया। लेकिन रविवार (15 मार्च 2026) को जब दलित-बहुजन समाज कांशीराम की जयंती मना रहा था, अखिलेश यादव मुंबई पहुँच गए। वहाँ उन्होंने ‘Vision India: Creative Economy Summit’ में भाग लिया और बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान से मुलाकात की। सपा की PDA रट लगाने वाले अखिलेश का यह व्यवहार न सिर्फ पाखंड का उदाहरण है, बल्कि उनकी राजनीति की खोखलापन को भी उजागर करता है।

क्या है पूरा मामला, पहले ये समझ लें

दरअसल, समाजवादी पार्टी की ओर से खुद अखिलेश यादव ने ऐलान किया था कि सपा ने 15 मार्च 2026 को कांशीराम जयंती को ‘बहुजन समाज दिवस अर्थात PDA दिवस’ मनाएगी। प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने सर्कुलर जारी कर सभी जिलों में कार्यक्रम करने के निर्देश दिए। लेकिन अखिलेश खुद उत्तर प्रदेश में कहीं नजर नहीं आए।

इसके बजाय उन्होंने मुंबई का रुख किया। वहाँ ‘Vision India: Creative Economy Summit’ में शामिल होकर उन्होंने एक्स पर लिखा, “जो इंसान, इंसानियत और दुनिया को बेहतर बनाए वही क्रिएटिविटी है।” ट्वीट में उन्होंने क्रिएटिव इकॉनमी पर लंबा भाषण दिया और तस्वीरें शेयर कीं।

इसी दिन अखिलेश ने सलमान खान के बांद्रा स्थित घर पहुँचकर मुलाकात की। उन्होंने ट्वीट किया, “मुंबई मिलन! @BeingSalmanKhan” और फोटो शेयर की।

जब पत्रकारों ने पूछा कि PDA दिवस के दिन आप मुंबई में सलमान खान से मिल रहे हैं, तो अखिलेश ने जवाब दिया कि सलमान के पिता सलीम खान की तबीयत खराब है, इसलिए आए हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि सलीम खान की तबीयत कई दिनों से खराब बताई जा रही थी। मुलाकात एक दिन पहले या बाद में भी हो सकती थी। लेकिन अखिलेश ने PDA दिवस की ‘खानापूर्ति’ के लिए मुंबई की राह पकड़ ली। सलमान से मिलने के बाद उन्होंने कांशीराम को भारत रत्न देने की माँग भी की, लेकिन यह सब उत्तर प्रदेश से दूर…मुंबई से।

इसके विपरीत, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने अखिलेश के PDA ऐलान पर पहले ही तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा कि सपा का PDA असल में ‘परिवार दल अलायंस’ है। मायावती ने सपा पर नौटंकीबाजी का आरोप लगाया और कहा कि सपा का चाल-चरित्र-चेहरा हमेशा दलित-पिछड़ा विरोधी रहा है। बसपा ने अपने स्तर पर कांशीराम जयंती के कार्यक्रम किए, जबकि सपा ने सिर्फ खानापूर्ति की। अखिलेश यादव सपा के मुखिया हैं, लेकिन PDA दिवस पर उन्होंने उत्तर प्रदेश के दलित-बहुजन कार्यकर्ताओं को संबोधित करने की बजाय बॉलीवुड की चकाचौंध चुनी।

दलितों पर अत्याचार की खबर आते ही अखिलेश यादव ने मूँद ली आँखें

यह पहला मौका नहीं है जब अखिलेश यादव की PDA राजनीति की असली सूरत सामने आई हो। सपा की यह PDA सिर्फ वोट बैंक की रणनीति है। जब दलितों पर अत्याचार होता है और अपराधी यादव समुदाय से जुड़ा होता है, तो अखिलेश और सपा पूरी तरह चुप हो जाते हैं। ताजा उदाहरण भदोही (संत रविदास नगर) की घटना है। जहाँ दलित चौकीदार जैसलाल सरोज को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया। आरोपित का नाम कमलेश यादव है, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया।

लेकिन अखिलेश यादव ने इस घटना पर एक शब्द भी नहीं कहा। न ट्वीट, न प्रेस कॉन्फ्रेंस, न परिवार से मुलाकात। जब पीड़ित दलित होता है और अपराधी यादव, तो सपा की ‘PDA’ की ‘डी’ (दलित) गायब हो जाती है। जब अपराधी यादव होता है तो चुप्पी, वरना ‘संविधान बचाओ’ का राग अलापती है। यह PDA राजनीति का सबसे बड़ा पाखंड है। अखिलेश यादव दलितों के नाम पर वोट माँगते हैं, लेकिन जब उनके अपने समुदाय का कोई व्यक्ति दलित पर अत्याचार करता है, तो आँखें बंद कर लेते हैं।

अखिलेश यादव की प्राथमिकता परिवारवाद, सेलिब्रिटी कल्चर और सैफई महोत्सव

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो अखिलेश यादव की यह हरकत 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी को भी उजागर करती है। PDA का नारा पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को एकजुट करने का दावा करता है, लेकिन अखिलेश का मुंबई भ्रमण साबित करता है कि उनकी प्राथमिकता परिवारवाद, सेलिब्रिटी कल्चर और सैफई महोत्सव जैसी चकाचौंध है।

सपा उत्तर प्रदेश की पार्टी है, लेकिन मुखिया मुंबई में क्रिएटिव इकॉनमी समिट में व्यस्त हैं। क्या यह सामाजिक न्याय है? क्या PDA दिवस मनाने के लिए सिर्फ ट्वीट और सर्कुलर काफी है, जबकि नेता खुद मौजूद नहीं?

अखिलेश यादव ने कांशीराम जयंती पर PDA दिवस का ऐलान किया, लेकिन खुद मुंबई चले गए। सलमान खान से हाथ मिलाया, सलीम खान की तबीयत का बहाना बनाया, लेकिन दलितों की पीड़ा पर चुप रहे। भदोही जैसी घटनाओं में चुप्पी साध लेना उनकी सोच को दर्शाता है। सपा यादव-केंद्रित पार्टी है। PDA का ‘डी’ सिर्फ चुनावी जुमला है। असली दलित उत्थान तो बसपा जैसे दलों के पास है, जो कांशीराम की विरासत को सच्चे अर्थों में निभाती है।

अखिलेश यादव PDA दिवस मनाने के लिए जोर-शोर से डंका बजा रहे थे, लेकिन कल इनको बुलावा मिला तो मुंबई चले गए, सलमान खान-रितेश देशमुख और बाकी सब से मिले, X पर इसकी स्टोरी भी डाली लेकिन कांशीराम जयंती को सिर्फ एक पोस्ट में निपटा दिया। हालाँकि उन्होंने पीडीए दिवस तो मनाया, लेकिन उससे एक दिन पहले यानी 14 मार्च 2026 को सपा की महारैली कर के। जिसमें पीडीए के नाम पर सिर्फ इफ्तार पार्टी में हिस्सा लिया।

यह पूरा घटनाक्रम सपा की क्रेडिबिलिटी पर सवाल खड़ी करती है। अखिलेश यादव की यह दोहरी नीति न सिर्फ दलित समाज को ठगा रही है, बल्कि पूरे PDA गठबंधन को कमजोर कर रही है। उत्तर प्रदेश की जनता अब ऐसे पाखंड को पहचान चुकी है। फिलहाल अखिलेश यादव का मुंबई वाला ‘मिलन’ PDA दिवस की सच्चाई को बेनकाब कर चुका है।



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