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अंबेडकर के सोमनाथ मंदिर को लेकर केएम मुंशी को लिखे पत्र की कहानी

गुजरात में समंदर के किनारे भारत का गौरव बनकर शान से खड़े सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के आक्रमण को 1000 साल हो गए हैं। 8 जनवरी से गुजरात में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भी मनाया जाना है। इस बीच मंदिर से जुड़े पुराने किस्से लगातार चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का मंदिर से जुड़ा एक पत्र वायरल हो रहा है जो उन्होंने कन्हैयालाल माणिकलाल (केएम) मुंशी को लिखा था।

सरदार पटेल ने नवंबर 1947 में जनता से वादा किया था कि वह सोमनाथ मंदिर का पुनर्निमाण करवाएँगे दिसंबर 1950 में उनके निधन के बाद तत्कालीन खाद्य मंत्री मुंशी ने यह जिम्मेदारी अपने कंधे पर ले थी। वह मंदिर के पुनर्निमाण की देख रेख कर रहे थे। मई 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा नए मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की जानी थी उससे पहले मार्च 1951 में मुंशी को अंबेडकर ने पत्र लिखा था।

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस मंदिर के पुनर्निमाण से विचलित थे यह तथ्य किसी से छिपा नहीं हैं। नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के प्रस्ताव का ‘हिंदू पुनरुत्थानवाद‘ कहकर विरोध भी किया था। वहीं, अंबेडकर के पत्र से यह स्पष्ट होता है कि वह इस मंदिर के पुनर्निर्माण के ना केवल समर्थक थे बल्कि उसमें अपने सुझाव भी दे रहे थे।

अंबेडकर ने पत्र में क्या लिखा है?

एक वर्ग द्वारा अंबेडकर की यह छवि बनाई गई है कि हिंदू विरोधी थे लेकिन यह पत्र अंबेडकर की छवि को लेकर एक नई दृष्टि भी देता है। Conundrum और Your Prime Minister is Dead जैसी चर्चित किताबों के लेखक अनुज धर ने ‘X’ पर यह पत्र शेयर किया है।

27 मार्च 1951 के इस पत्र में अंबेडकर मुंशी को लिखते हैं, “मुझे यह जानकारी मिली है कि सोमनाथ में मूर्ति की स्थापना की तिथि 11 मई तय की गई है। मैं चाहता हूँ कि इस अवसर पर मेरे मित्र अनिरुद्धाचार्य जी को समारोह में आमंत्रित किया जाए। वे बड़ौदा जिले के चंदोदा स्थित मठ के प्रमुख हैं। मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ और मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस निमंत्रण के पूर्णतः योग्य हैं।”

GROK ने लेटर को बताया AI जेनरेटेड, जानें क्या है सच?

अनुज धर के पोस्ट शेयर करने के बाद कई X यूजर्स इस पत्र को नकली और AI द्वारा बनाया गया बताने लगे। कई यूजर्स ने मस्क की कंपनी xAI के चैटबॉट GROK को टैग कर इस लैटर को लेकर सवाल पूछे तो चैटबॉट ने इसे AI द्वारा बनाया गया पत्र बता दिया।

चैटबॉट ने X पोस्ट में लिखा, “यह पत्र अंबेडकर की आधिकारिक लेखों या ऐतिहासिक अभिलेखागारों में नहीं मिलता है। 2026 से पहले की खोजों में इसका कोई ज़िक्र नहीं मिला। ‘Antrudhachary’ नाम का 1951 के ऐतिहासिक रिकॉर्ड से कोई मेल नहीं खाता। ऐसा लगता है कि यह मनगढ़ंत है, हो सकता है कि AI द्वारा बनाया गया हो।”

इसके बाद तो इसे AI द्वारा बनाया गया बताने वालों की बाढ़ सी ही आ गई। हमने खुद अनुज धर से इस पत्र को लेकर बात की। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा, “इन सभी रिकॉर्ड्स का सोर्स नेशनल आर्काइव्स है। जो कोई भी इन्हें नकली समझता है, उसे आर्काइव्स में केएम मुंशी के पेपर्स देखने चाहिए।” साथ ही, उन्होंने इस पत्र से जुड़े और पत्र भी साझा किए हैं।

यानी AI चैटबॉट के भरोसे जो लोग आर्काइव्स पढ़ने या उससे समझने की कोशिश करते हैं और मानते हैं कि AI है तो सब जानता है होगा, उनके लिए यह समझना भी जरूरी है कि AI शब्द नहीं जानता है। AI पर पूरी तरह भरोसा करना समस्या है।

चैटबॉट आर्काइव्स को इसलिए नहीं पढ़ पाता क्योंकि ऐतिहासिक अभिलेखों का बहुत बड़ा हिस्सा आज भी डिजिटल रूप में मौजूद ही नहीं है। भारत ही नहीं, दुनिया भर के आर्काइव्स में करोड़ों दस्तावेज कागज पर तो सुरक्षित हैं कि पुराने सरकारी फाइलें, निजी पत्र, हस्तलिखित डायरी, रिपोर्टें और रजिस्टर। ये दस्तावेज अक्सर न तो स्कैन किए गए हैं और न ही ऑनलाइन उपलब्ध हैं। चैटबॉट केवल उसी सामग्री तक पहुँच सकता है जो पहले से डिजिटल और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो।

इसमें भी कई तरह की दिक्कतें हैं, जो आर्काइव्स डिजिटाइज किए भी गए हैं, वे अधिकतर स्कैन की गई तस्वीरों के रूप में होते हैं, न कि साफ-सुथरे टेक्स्ट फाइल की तरह। इनमें स्याही के धब्बे, फटे पन्ने, धुंधले अक्षर और पुरानी लिपियाँ होती हैं। ऐसी सामग्री को पढ़ने के लिए सिर्फ भाषा ज्ञान का नहीं बल्कि पैलियोग्राफी और ऐतिहासिक दस्तावेज पढ़ने का अभ्यास चाहिए जो चैटबॉट के लिए संभव नहीं है।

इस लेटर से जुड़े अन्य पत्र

अनुज धर ने अंबेडकर के इस पत्र से जुड़े दो अन्य पत्र भी साझा किए हैं जिनमें एक अंबेडकर को मुंशी का जवाब और दूसरे में स्वामी अनिरुद्धाचार्य को निमंत्रण है। 30 मार्च 1951 को मुंशी ने डॉक्टर अंबेडकर को लिखा, “27 मार्च के आपके पत्र के लिए धन्यवाद। मुझे अनिरुद्धाचार्य को समारोह के लिए आमंत्रित करके बहुत खुशी होगी। मैं आपसे यह भी अनुरोध करूँगा कि आप भी प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हों।”

अंबेडकर को मुंशी का पत्र (साभार: अनुज धर)

30 मार्च 1951 को ही मुंशी ने स्वामी अनिरुद्धाचार्य को निमंत्रण देते हुए पत्र लिखा था। मुंशी ने लिखा, “आपको यह जानकारी होगी कि सोमनाथ लिंग की स्थापना 11 मई 1951 को प्रभास पाटन में तय की गई है। इसी दौरान अखिल भारतीय संस्कृत परिषद का आयोजन भी किया जाएगा। हम इस अवसर पर देश के सभी धार्मिक संस्थानों के प्रमुखों को आमंत्रित कर रहे हैं। हमें बहुत खुशी होगी यदि आप अपनी सुविधा के अनुसार इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएँ। आप चाहें तो कार्यक्रम से दो दिन पहले भी पधार सकते हैं।”

स्वामी अनिरुद्धाचार्य को मुंशी का पत्र (फोटो साभार: अनुज धर)

अंबेडकर के पत्र के अलावा इन दोनों को पढ़ने के बाद अनुज धर का यह दावा पुख्ता हो जाता है कि यह पत्र कोई इकलौता पत्र नहीं है जो AI से बना लिया गया है बल्कि पत्रों की एक पूरी सीरीज है। इससे उन लोगों की भी पोल खुल जाती है जो अंबेडकर को हिंदुओं को खिलाफ खड़ा करने पर तुले रहते हैं।



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