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साल्हेर, शिवनेरी, सिंधुदुर्ग समेत शिवाजी महाराज के 12 किले UNESCO की लिस्ट में शामिल: मराठाओं की मजबूत रणनीति का रही हैं गवाह, पीएम मोदी बोले- ये देश के लिए ‘गर्व की बात’


12 मराठा किले अब विश्व धरोहर

महाराष्ट्र के लिए यह एक बड़ा गौरवशाली क्षण है। UNESCO ने ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ के तहत छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े 12 ऐतिहासिक किलों को अपनी विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया है।

यह निर्णय पेरिस में आयोजित विश्व धरोहर समिति (WHC) के 47वें सत्र के दौरान लिया गया। भारत के लिए यह 44वीं संपत्ति है जिसे यह वैश्विक मान्यता मिली है।

यह उपलब्धि मराठा शासकों की मजबूत किलेबंदी प्रणाली और सैन्य रणनीति का प्रतीक है। ये किले महाराष्ट्र और तमिलनाडु में फैले हुए हैं।

विश्व धरोहर लिस्ट में शामिल किले

‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ में कुल 12 किले चुने गए हैं। इनमें से 11 किले महाराष्ट्र में हैं। इनके नाम- साल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, खंडेरी, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजय दुर्ग और सिंधुदुर्ग हैं।

तमिलनाडु का जिंजी किला (Gingee Fort) भी इसमें शामिल है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने इन्हें ‘स्वराज्य’ के लिए बनवाया था। ये किले मराठा साम्राज्य की वास्तुकला (बनावट) और उनकी युद्ध कला को दिखाते हैं।

किले और उनकी रणनीतिक स्थिति

ये किले अलग-अलग जगहों पर बने हैं। ये दिखाते हैं कि मराठा सैनिक कितने समझदार थे और रणनीतिक रक्षा योजना को दर्शाते हैं। कुछ किले पहाड़ों पर हैं। इन्हें ‘पहाड़ी किले’ कहते हैं। जैसे- साल्हेर, शिवनेरी, लोहागढ़, रायगढ़, राजगढ़ और जिंजी।

प्रतापगढ़ जंगल के बीच एक पहाड़ पर बना है। पन्हाला एक पहाड़ी पठार पर स्थित किला है। विजयदुर्ग समुद्र किनारे बना है। खंडेरी, सुवर्णदुर्ग और सिंधुदुर्ग पानी के बीच बने हैं। इन्हें ‘द्वीप किले’ कहते हैं। ये सभी किले मिलकर एक मजबूत सैनिक व्यवस्था बनाते हैं।

12 किलों की खासियत

सालहेर किला- यह महाराष्ट्र का सबसे ऊँचा किला है। यह नासिक जिले में है और यहाँ से बहुत सुंदर नज़ारा दिखता है।

शिवनेरी किला- यह पुणे जिले में है। छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म इसी किले में हुआ था।

लोहगढ़ किला- यह पुणे जिले में है। इसका मतलब है ‘लोहे जैसा मजबूत किला’। यह मराठा साम्राज्य की रक्षा में बहुत महत्वपूर्ण था।

खंडेरी किला- यह रायगढ़ जिले में समुद्र के बीच एक द्वीप पर है। शिवाजी महाराज ने इसे समुद्री रास्तों पर नियंत्रण के लिए बनवाया था।

रायगढ़ किला- यह शिवाजी महाराज की राजधानी था। उन्हें यहीं पर 1674 में छत्रपति बनाया गया था।

राजगढ़ किला- यह पुणे जिले में है। यह छत्रपति शिवाजी महाराज की पहली राजधानी था।

प्रतापगढ़ किला- यह सतारा जिले में है। यह किला 1659 में अफजल खान के साथ हुए युद्ध के लिए मशहूर है।

सुवर्णदुर्ग- यह रत्नागिरी जिले में समुद्र के बीच एक द्वीप पर है। यह मराठा नौसेना की ताकत का प्रतीक है।

पन्हाला किला- यह कोल्हापुर जिले में है। शिवाजी महाराज ने इसे 1659 में जीता था।

विजय दुर्ग- यह सिंधुदुर्ग जिले में समुद्र किनारे है। यह भारत के सबसे मजबूत समुद्री किलों में से एक है। शिवाजी महाराज ने इसे नौसेना का केंद्र बनाया।

सिंधुदुर्ग- यह सिंधुदुर्ग जिले में समुद्र के बीच एक द्वीप पर है। शिवाजी महाराज ने इसे समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए बनवाया था। यहाँ शिवाजी महाराज के हाथों के निशान भी हैं।

जिंजी किला- यह तमिलनाडु में है। इसे ‘दक्षिण भारत का सबसे मजबूत किला’ माना जाता है। यह किला तीन पहाड़ियों पर फैला हुआ है।

देश भर से बधाई संदेश

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर देश के नेताओं ने खुशी जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह सम्मान हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने लोगों से इन किलों को देखने की अपील की।

वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को नमन किया और नागरिकों को बधाई दी।

इसके अलावा, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह सभी देशवासियों के लिए गर्व का पल है। उन्होंने बताया कि ये किले ‘हिंदवी स्वराज‘ के मुख्य आधार रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि ये किले छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता को दिखाते हैं।



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