पिंपरी चिंचवड धर्म परिवर्तन

महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड में एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ विदेशी पैसे का इस्तेमाल कर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में पुलिस ने एक अमेरिकी नागरिक और उसके भारतीय साथी को गिरफ्तार किया है। ये लोग ईसाइयत अपनाने के लिए पैसों का लालच देते थे। इस मामले में एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है।

इससे देश में विदेशी फंड के जरिए धर्मांतरण पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि ये लोग स्थानीय लोगों को ईसाई बनाने के लिए पैसों का लालच देते थे। फिलहाल जाँच चल रही है और पुलिस पूरे मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।

धर्मांतरण कराने की साजिश में शामिल था विदेशी नागरिक

पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपितों की पहचान अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया निवासी शेफ़र जैविन जैकब (41) और पिंपरी के रईसोनी सोसाइटी निवासी स्टीवन विजय कदम (46) के रूप में हुई है। जैकब पिंपरी-चिंचवड के मुकाई चौक के पास एक किराए के फ्लैट में रह रहा था।

जाँच में पता चला है कि जैकब 2016 से भारत आ रहा है। टूरिस्ट और बिजनेस वीजा पर कई बार भारत का दौरा किया। इससे यह संदेह पैदा हुआ कि कहीं वह वैध यात्रा के बहाने धर्म प्रचार जैसे गतिविधियों में तो शामिल नहीं था।

FIR विवरण: हिंदू व्यक्ति को पैसे का लालच देने का कथित प्रयास

पिंपरी के रहने वाले हिंदू-सिंधी समुदाय के 27 वर्षीय सनी धनानी ने रविवार (27 जुलाई 2025) को पिंपरी पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई। FIR के अनुसार, जैकब और कदम 27 जुलाई सुबह करीब 11:30 बजे सनी के घर आए और उन्हें ईसाइयत अपनाने के लिए कहने लगे।

शिकायत के मुताबिक आरोपितों ने खुद को धार्मिक जानकार बताते हुए हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला दिया और मोक्ष के लिए हिन्दू धर्म के बजाए ईसाइयत को बेहतर रास्ता बताया। उन्होंने सनी और उनके परिवार से वादा किया कि अगर वे ईसाइयत अपना लेंगे, तो उन्हें मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और विदेशों से आर्थिक सहायता मिलेगी।

सनी को जब शक हुआ, तो पिंपरी पुलिस स्टेशन गया और मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। FIR में सनी ने कहा है कि अमेरिकी नागरिक ने उससे कहा था कि अगर वह ईसाइयत अपनाता है तो वह खुश रहेगा। मानसिक रूप से शांत रहेगा और आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएगा। उन्होंने विदेशी मदद दिलाने का भी वादा किया।

डिजिटल ट्रेल और व्यवस्थित आउटरीच संदिग्ध

पुलिस को शक है कि जैकब और कदम एक बड़े अभियान का हिस्सा थे जो लोगों का धर्मांतरण कराने की कोशिश में लगे हैं। माना जा रहा है कि ये लोग स्थानीय परिवारों से संपर्क बनाने के लिए WhatsApp, मोबाइल कॉल्स और आमने-सामने की बातचीत जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।

FIR में बताया गया है कि वे भावनात्मक दबाव और धार्मिक ग्रंथों की चुनी हुई व्याख्या का इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करते थे।

पुलिस ने उनके पास से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कुछ किताबें जब्त की हैं। पुलिस को शक है कि इसका इस्तेमाल धार्मिक प्रचार के लिए किया गया होगा। फिलहाल इन सब की फॉरेंसिक जाँच और पैसों के लेन-देन की भी जाँच चल रही है।

नाबालिग के भूमिका की जाँच जारी

अधिकारियों ने एक नाबालिग लड़के को भी हिरासत में लिया है। हालाँकि मामले में उसकी भूमिका अभी तक स्पष्ट नहीं है। आशंका है कि उसका इस्तेमाल परिवारों का विश्वास जीतने या बैठकों और आउटरीच में मदद करने के लिए किया जाता था।

BNS और विदेशी अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई

पिंपरी-चिंचवड पुलिस ने आरोपित अमेरिकी नागरिक और उसके साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और विदेशियों अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

BNS की धारा 299 के तहत उन्हें धार्मिक भावनाएँ भड़काने के इरादे से जानबूझकर की गई हरकतों के लिए आरोपित बनाया गया है। साथ ही, धारा 3(5) के तहत उन पर प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप भी लगाया गया है।

इसके अलावा विदेशी नागरिक होने के कारण उन पर विदेशियों अधिनियम की धारा 14(b) और 14(c) के तहत भी केस दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत उस पर वीजा की शर्तों का उल्लंघन करने और भारत में अनुमति से बाहर जाकर गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

2016 से भारत आ रहा है जैकब

यह मामला भारत के छोटे शहरों और कस्बों में संगठित रूप से विदेशी फंडिंग के सहारे धर्मांतरण की गहरी साजिश की ओर भी इशारा कर रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने माँग की है कि जैकब के 2016 से अब तक के भारत दौरे और उसके संपर्कों की गहराई से जाँच होनी चाहिए।

ऐसा माना जा रहा है कि आरोपित ने पिंपरी-चिंचवड इलाके में संपर्कों का एक नेटवर्क बना लिया था। ये भी आशंका जताई जा रही है कि उसने कई कमजोर परिवारों के साथ भी इसी तरह की कोशिश की होगी।

अमेरिकी नागरिक इस समय न्यायिक हिरासत में है और इमिग्रेशन अधिकारियों को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक उसके वीजा को स्थायी रूप से रद्द कर उसे देश से डिपोर्ट भी जा सकता है।



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