चर्चा के दौरान कुछ विधायकों ने राज्य में जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों पर आँकड़े देने की माँग की। उन्होंने एसबी कृष्णा के मामले की ओर ध्यान दिलाया, जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस ने गोवा में दो लड़कियों के अपहरण के शक में हिरासत में लिया था।
बताया गया कि आयशा उर्फ निक्की का असली नाम एसबी कृष्णा है, जिसने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल किया। उस पर दो महिलाओं को निकाह के लिए जबरन धर्मांतरण करवाने और यूपी से ले जाने का आरोप है।
यह मामला तब सामने आया जब कई राज्यों में एक्टिव धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें पीएफआई और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया यानी एसडीपीआई के नाम आए।
मुख्यमंत्री सावंत ने कहा, “उत्तर प्रदेश में जो कानून है, उसमें जबरन धर्म परिवर्तन की इजाजत नहीं है। कई राज्यों ने ऐसे कानून बना लिए हैं। मैं मानता हूँ कि हमें भी ऐसा कानून लाना चाहिए, ताकि जबरन धर्मांतरण को रोका जा सके।” उन्होंने कॉन्ग्रेस विधायकों की तरफ देखते हुए कहा, “आप सभी को भी इसमें हमारा साथ देना चाहिए।”
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधानसभा में कहा कि राज्य में अलग-अलग धर्मों के लोगों की शादियाँ हो रही हैं और यह उनके मर्जी से हो रहा है, लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गोवा में ‘लव जिहाद’ के मामले भी सामने आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “लोग कहते हैं कि लव जिहाद नहीं होता, लेकिन अगर आप चाहें तो मैं ऐसे मामलों का विवरण दे सकता हूँ। आप कह सकते हैं कि युवक-युवतियाँ बालिग हैं और प्रेम में हैं, लेकिन जब किसी को निशाना बनाकर ये सब किया जा रहा हो, तब हमें ध्यान देना ही पड़ेगा।”
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध उन लोगों के लिए है जो पैसे दे कर, लालच देकर या जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “गोवा की गंगा-जमुनी तहजीब कभी नहीं टूटी है और ना ही टूटनी चाहिए। लेकिन लालच देकर धर्म परिवर्तन गलत है।”
इस चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक क्रूज सिल्वा ने इस मामले की गहराई से जाँच कराने की माँग की। उन्होंने राज्य की पुलिस और कानून-व्यवस्था से पूछा कि ऐसे कितने संदिग्ध लोग गोवा में रह रहे हैं। क्रूज सिल्वा ने कहा, “गोवा एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है। देश-विदेश से लोग यहाँ आते हैं।
हाल ही में सेंट फ्रांसिस जेवियर का समारोह ओल्ड गोवा में हुआ, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए। लेकिन उसी समय ISIS से संबंधित एक महिला को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है, वह ओल्ड गोवा में ही रह रही थी।”
उन्होंने सवाल उठाया, “जब यूपी पुलिस उसे पकड़ सकती है, तो फिर गोवा पुलिस और क्राइम ब्राँच को उसकी कोई जानकारी क्यों नहीं थी?”
जबरन धर्मांतरण कराने वाले रैकेट का पर्दाफाश
‘मिशन अस्मिता’ के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस ने अवैध धर्मांतरण के मामले में छह राज्यों के दस लोगों को गिरफ्तार किया है। इन दस लोगों में से छह पहले हिंदू थे, जिनमें कृष्णा नाम का व्यक्ति भी शामिल है। ये लोग युवकों और युवतियों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे थे।
इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान था, जिसे दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके से यूपी एटीएस और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने मिलकर पकड़ा है। जाँच एजेंसियों ने पाया है कि इस नेटवर्क का कनेक्शन आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) से है। धर्मांतरण के लिए विदेशी फंडिंग होने का भी पता चला।
इस नेटवर्क में शामिल आरोपी अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर रहे थे, जैसे- पैसे की लेन-देन, कानूनी सलाह देना, नए फोन और सिम कार्ड मुहैया कराना, युवाओं को प्रेम-जाल (लव जिहाद) में फँसाना और धर्म परिवर्तन में मदद करना।
भारत के राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून
भारत के बारह राज्यों में जबरन धर्म परिवर्तन को गैरकानूनी माना गया है। इन राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
इन राज्यों में ‘धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम’ के तहत ऐसे नियम बनाए गए हैं, जो किसी भी व्यक्ति को बलपूर्वक, धोखे से, लालच देकर या मानसिक दबाव डालकर धर्म परिवर्तन कराने से रोकते हैं। अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे जुर्माना भरना पड़ सकता है और साथ ही उसे जेल की सजा भी हो सकती है।
अरुणाचल प्रदेश
46 साल बाद अरुणाचल प्रदेश सरकार ने 1978 में बने ‘धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम’ को लागू करने का फैसला किया है। यह फैसला तब लिया गया जब गुवाहाटी हाई कोर्ट ने सितंबर 2024 में राज्य सरकार को 6 महीनों के अंदर इस कानून के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया। इस फैसले का कुछ ईसाई संगठनों ने विरोध किया है।
यह कानून अक्टूबर 1978 में पास हुआ था। इसका उद्देश्य था कि किसी व्यक्ति को जबरदस्ती, लालच या धोखे से एक धर्म से दूसरे धर्म में बदलने से रोका जाए और साथ ही स्थानीय परंपराओं और विश्वासों की रक्षा की जाए। इस कानून के अनुसार, यदि कोई इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे अधिकतम दो साल की जेल और 10,000 रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार एक सख्त कानून लाने जा रही है, जिसका नाम ‘छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम’ होगा। इस कानून का मकसद जनजातियों और संभवतः अन्य लोगों के धर्म परिवर्तन को रोकना है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर कोई जनजाति धर्म बदलता है, तो उसे Scheduled Tribe की सूची से हटाना चाहिए, ताकि धर्मांतरण पर लगाम लगाई जा सके।
इस कानून के तहत जबरन, धोखे से या लालच देकर महिलाओं, बच्चों और जनजातियों का धर्म परिवर्तन अपराध माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर उसे कम से कम 2 साल से लेकर 10 साल तक की जेल हो सकती है और 25,000 रुपए या उससे ज्यादा का जुर्माना लगाया जा सकता है।
अगर कोई गैरकानूनी तरीके से सामूहिक धर्मांतरण कराता है, तो उसे 3 से 10 साल की सजा और 50,000 रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
गुजरात
गुजरात सरकार ने 2021 में धार्मिक स्वतंत्रता संशोधन विधेयक पेश किया, जिसका मकसद जबरन धर्म परिवर्तन और धोखे से की गई शादी के जरिए धर्म बदलवाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है। इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति सिर्फ इसलिए किसी से शादी करता है ताकि उसका धर्म बदला जा सके, तो ऐसी शादी को गैरकानूनी माना जाएगा।
इसके अलावा, किसी को शादी के लिए मजबूर करना, धोखा देना, बहलाना-फुसलाना, या फिर धर्म परिवर्तन के इरादे से किसी की शादी करवाने में मदद करना या सलाह देना, ये सब अपराध की श्रेणी में आएँगे और सभी दोषियों को समान रूप से सजा दी जाएगी।
अगर कोई इस कानून का उल्लंघन करता है, तो उसे 3 से 5 साल की जेल और कम से कम 2 लाख का जुर्माना देना होगा। लेकिन अगर पीड़ित महिला अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से है, तो सजा और भी सख्त होगी और 4 से 7 साल की जेल और 3 लाख तक का जुर्माना लगेगा।
अगर कोई संस्था इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाई जाती है, तो उसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा और दोषियों को 3 से 10 साल तक की जेल और 5 लाख का जुर्माना हो सकता है।
इस कानून के तहत ऐसे सभी अपराध गैर-जमानती (non-bailable) हैं, यानी बिना अदालत की अनुमति के जमानत नहीं मिलेगी।
हरियाणा
हरियाणा सरकार ने 2022 में एक कानून पास किया है जिसका नाम है हरियाणा धर्मांतरण की रोकथाम विधेयक 2022। इस कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति किसी और का धर्म झूठ बोलकर, दबाव डालकर, जबरदस्ती, लालच देकर, धोखे से या शादी के जरिए बदलवाने की कोशिश करता है, तो उसे 1 से 5 साल तक की जेल और कम से कम 1 लाख जुर्माना हो सकता है।
अगर यह धर्मांतरण किसी नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति के साथ होता है, तो सजा और भी सख्त होगी और कम से कम 4 साल से लेकर 10 साल तक की जेल और 3 लाख या उससे ज्यादा जुर्माना लगेगा। साथ ही अगर कोई शादी सिर्फ धर्म बदलवाने के मकसद से की गई है, तो ऐसी शादी को गैरकानूनी और अमान्य माना जाएगा।
हालाँकि, अगर कोई व्यक्ति अपने पहले वाले धर्म में वापस लौटता है, तो उसे धर्मांतरण नहीं माना जाएगा और इस कानून के तहत उस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022 का मकसद राज्य में धर्म परिवर्तन से जुड़े 2019 के कानून में बदलाव करना है। यह कानून पहले 2006 में लाया गया था, लेकिन 2012 में हाई कोर्ट ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन मानते हुए रोक दिया था। इसके बाद 2019 में नया कानून आया और 2022 में इसे और सख्त किया गया।
इस संशोधन में कहा गया है कि अगर कोई जबरन, धोखे से या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसे अब 7 की बजाय 10 साल तक की जेल हो सकती है। अगर कोई अपना धर्म छिपाकर किसी और धर्म के व्यक्ति से शादी करता है, तो उसे कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है। इसके साथ ही जुर्माना भी ₹50,000 से बढ़ाकर 1 लाख तक किया गया है।
अगर कोई सामूहिक धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसे 7 साल की जेल और ₹50,000 तक जुर्माना देना होगा। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन के बाद भी अपने पुराने धर्म की सुविधाओं का लाभ लेता है, तो यह भी अपराध माना जाएगा, जिसकी सजा 2 से 5 साल तक की जेल और ₹50,000 से 1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
झारखंड
झारखंड में 2017 में बना ‘धर्म स्वतंत्रता अधिनियम’ ये कहता है कि अगर कोई व्यक्ति किसी और का जबरदस्ती, धोखे से या लालच देकर धर्म बदलवाने की कोशिश करता है, तो वो गैरकानूनी है। ऐसा करने पर उसे तीन साल तक की जेल हो सकती है और साथ ही ₹50,000 तक का जुर्माना भी लग सकता है।
लेकिन अगर धर्म बदलने वाला व्यक्ति कोई महिला है, नाबालिग है, या अनुसूचित जाति या जनजाति से आता है, तो सजा और जुर्माना और भी ज्यादा कठोर हो जाता है।
इतना ही नहीं अगर कोई अपनी मर्जी से भी धर्म बदलना चाहता है, तो उसे पहले जिला उपायुक्त यानी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से लिखित मंजूरी लेनी होगी। बिना मंजूरी के धर्म बदलना इस कानून के तहत अपराध माना जाएगा।
कर्नाटक
कर्नाटक सरकार ने 2022 में एक कानून बनाया था जिसे ‘धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का संरक्षण अधिनियम’ कहा गया। इसका मकसद था लोगों को जबरन, धोखे से, लालच देकर या शादी का झाँसा देकर धर्म परिवर्तन करवाने से बचाना। इस कानून के तहत अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल और ₹25,000 तक का जुर्माना हो सकता था।
लेकिन अगर धर्म परिवर्तन किसी महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति या मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के साथ किया गया हो, तो सजा दस साल तक बढ़ सकती थी। हालाँकि 2023 में कॉन्ग्रेस की सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस कानून को खत्म करने का फैसला कर लिया।
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में 2021 में ‘धर्म स्वतंत्रता अधिनियम’ लागू किया गया था, जिसका मकसद था धोखे, जबरदस्ती, लालच या झूठ बोलकर धर्म परिवर्तन को रोकना, खासतौर पर शादी के बहाने धर्म बदलवाने की घटनाओं पर लगाम लगाना। इस कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति सिर्फ धर्म परिवर्तन के मकसद से शादी करता है, तो ऐसी शादी को अवैध माना जाएगा।
इस तरह का अपराध गंभीर (cognisable) होगा, उसे जमानत नहीं मिलेगी, और केस सीधे सेशंस कोर्ट में चलेगा। अगर कोई कानून तोड़ता है, तो उसे 1 से 5 साल की जेल और कम से कम ₹25,000 का जुर्माना हो सकता है। लेकिन अगर पीड़ित महिला है, नाबालिग है, अनुसूचित जाति या जनजाति से है, तो सजा और कड़ी होगी 2 से 10 साल तक की जेल और ₹50,000 तक का जुर्माना हो सकता है।
अगर कोई धर्म छुपाकर धोखे से शादी करता है, तो उसे 3 से 10 साल की सजा और कम से कम ₹50,000 का जुर्माना भुगतना होगा। वहीं अगर कोई एक साथ कई लोगों का धर्म बदलवाता है (mass conversion), तो उसे 5 से 10 साल तक की जेल और 1 लाख का जुर्माना हो सकता है।
इसके साथ ही कानून में कुछ प्रावधान स्कूलों, चर्चों और मदरसों को लेकर भी हैं। अगर कोई संस्थान जबरन धर्म परिवर्तन में शामिल पाया जाता है या उसका समर्थन करता है, तो सरकार उसकी मदद रोक सकती है और दी गई जमीन भी वापस ले सकती है।
ओडिशा
यह भारत में धर्मांतरण को लेकर बना पहला कानून था, जिसे ओडिशा सरकार ने 1967 में लागू किया था और इसे ‘ओडिशा धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1967’ कहा गया। इस कानून के तहत कोई भी व्यक्ति जबरदस्ती, लालच देकर या धोखे से किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता।
अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे एक साल की जेल, ₹5000 का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। अगर धर्म परिवर्तन किसी महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति का हो, तो सजा दोगुनी हो जाती है।
इसके अलावा, कोई भी धर्म परिवर्तन करने से पहले इसकी जानकारी सरकार को देनी जरूरी होती है। 1989 में बने नियमों के अनुसार, जो भी धर्म परिवर्तन करवा रहा है (जैसे पंडित, मौलवी या पादरी), उसे कम से कम 15 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित में बताना होता है कि कौन, कब, कहाँ और किसका धर्म बदल रहा है।
राजस्थान
राजस्थान धर्मांतरण निषेध विधेयक 2025 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति अगर अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे धर्म परिवर्तन से कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को इसकी लिखित सूचना देनी होगी। इसके बाद मजिस्ट्रेट यह जाँच करेगा कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हुआ है या किसी दबाव, लालच या जबरदस्ती के कारण। अगर मजिस्ट्रेट को लगता है कि धर्म परिवर्तन जबरदस्ती नहीं हुआ है, तब ही उसे मंजूरी दी जाएगी।
वहीं अगर कोई व्यक्ति किसी को जबरदस्ती, धोखे से या लालच देकर धर्म बदलवाता है, तो उसे 2 से 10 साल तक की जेल हो सकती है। विशेष रूप से अगर महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों को जबरन धर्म बदलवाया जाता है, तो दोषी को ₹25,000 का जुर्माना भी देना होगा।
वहीं अगर बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया गया है, तो दोषी को 3 से 10 साल तक की सजा और ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
उत्तराखंड
उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2018 के अनुसार, जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराना एक गैर-जमानती अपराध है। इस तरह के मामलों में दोषी पाए जाने पर 1 साल से 5 साल तक की जेल हो सकती है। लेकिन अगर पीड़ित व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से है, तो कम से कम 2 साल की सजा अनिवार्य है।
अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे धर्म परिवर्तन से कम से कम एक महीने पहले संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM) को एक शपथपत्र (affidavit) देना होगा, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि धर्म परिवर्तन उसकी स्वेच्छा से हो रहा है।
अगर यह नियमों का उल्लंघन करके धर्म परिवर्तन किया गया है, तो सरकार ऐसे धर्म परिवर्तन को अवैध घोषित कर सकती है। इसके अलावा शादी के लिए धर्म परिवर्तन करने की स्थिति में भी यही प्रक्रिया अपनानी होगी, यानी एक महीना पहले शपथ पत्र देना जरूरी है।
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने धर्म का अवैध रूपांतरण रोकथाम (संशोधन) विधेयक 2024 पेश किया है। सरकार का कहना है कि पहले लागू 2021 का कानून इस तरह के मामलों को रोकने में पर्याप्त नहीं था। पहले अवैध धर्मांतरण के लिए अधिकतम सजा 10 साल की जेल और 50,000 जुर्माना थी, लेकिन अब संशोधन के बाद सजा को और सख्त कर दिया गया है।
अब अवैध धर्मांतरण करने पर 3 से 10 साल की जेल हो सकती है। अगर एक साथ कई लोगों का धर्मांतरण (mass conversion) किया गया या विदेशी फंडिंग से धर्म बदलवाया गया, तो 7 से 14 साल की सजा दी जाएगी।
अगर जबरदस्ती, धोखे, शादी या शादी का वादा करके धर्म परिवर्तन कराया गया है और इससे किसी की जान या संपत्ति को खतरा हुआ, तो आरोपित को 20 साल से लेकर उम्रकैद (life imprisonment) तक की सजा हो सकती है। इतना ही नहीं अगर धर्मांतरण के मामले में महिला, नाबालिग या तस्करी के शिकार व्यक्ति शामिल हैं, तो भी सजा 20 साल से उम्रकैद तक दी जाएगी।
अब गोवा की बारी
राज्यों की लंबी फेहरिस्त में अब गोवा भी शामिल होने वाला है। जिन राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून बने हैं। वहाँ बीजेपी के शासन के दौरान ही ये हो पाया। गोवा में भी मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की अगुवाई वाली सरकार लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ सख्त है और इसको लेकर कानून लाने की तैयारी कर रही है।