दिल्ली से 23 किलोमीटर दूर गाजियाबाद में फर्जी दूतावास चलाने वाले हर्षवर्धन का कनेक्शन लंदन और दुबई में हथियार डीलरों से भी मिले हैं। भारत से पहले वह दुबई और लंदन में लोगों को नौकरी का झाँसा देकर ठगता था। बाद में भारत आकर यहाँ अपनी फर्जी एम्बेसी खोल ली। अभी वह खुद को वेस्ट आर्कटिका का राजदूत बताता था।
कौन है हर्षवर्धन ?
हर्षवर्धन जैन MBA है, जिसने लंदन और गाजियाबाद से पढ़ाई पूरी की है। उसके पिता राजस्थान के बांसवाड़ा और काकरोली में इंदिरा मार्बल्स और जेडी मार्बल्स के नाम से माइन के मालिक थे। हर्षवर्धन भी पिता के साथ काम किया करता था। इन माइन्स से लंदन में भी उत्पाद एक्सपोर्ट किया जाता था। इसीलिए हर्षवर्धन के लंदन में भी अच्छे संपर्क हैं। लेकिन पिता के निधन के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके बाद साल 2000 में हर्षवर्धन की मुलाकात लंदन में विवावादास्पद तांत्रिक चंद्रास्वामी से हुई। चंद्रस्वामी ने ही उसकी मुलाकात दुबई के हथियार डीलर अदनान खरगोशी और एहसान अली सैयद से करवाई। इसके बाद तीनों ने मिलकर लंदन में कंपनियाँ खोलकर ठगी करने लगे।
फिर साल 2006 में हर्षवर्धन अपने चचेरे भाई के पास दुबई चला गया, जहाँ हैदराबाद के शफीक और दुबई के इब्राहिम अली बन शारमा के साथ मिलकर ठगी की कंपनियाँ खोली। यहाँ भी तीनों ने मिलकर लोगों को नौकरियों का झाँसा देकर मोटी रकम वसूली।
साल 2011 में हर्षवर्धन वापस भारत लौट आया। फिर फर्जी दूतावास खोलने के काम में जुट गया। जाँच एजेंसी के मुताबिक पहले हर्षववर्धन सेबोर्गा माइक्रोनेशन नाम की कंपनी का एडवाइजर बना। इसके बाद वो पौलबिया लोडोनिया माइक्रोनेशन और अब वेस्ट आर्कटिका जैसे फर्जी देशों का राजदूत बन कर घूमता था।
5 साल पहले किराए पर ली आलीशान कोठी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 5 साल पहले गाजियाबाद के कविनगर जैसी पॉश कॉलोनी में कोठी किराए पर ली। यह कोठी सुनील अनूप सिंह नाम के शख्स की थी। इस 1 हजार मीटर वाली कोठी में एक दर्जन से ज्यादा कमरे हैं। इनमें से दो कमरों में हर्षवर्धन ने फर्जी दूतावास खोल रखा था। बाकी कमरों में उसकी पत्नी और 8 वर्षीय बेटा रहता था।
इसके अलावा हर्षवर्धन की आपराधिक हिस्ट्री भी खंगाली गई है। साल 2011 में हर्षवर्धन के पास सैटेलाइन फोन पाए जाने पर मुकदमा दर्ज किया गया था। जाँच में यह भी सामने आया कि हर्षवर्धन सऊदी हथियार डीलर अदनान खशोगी का भी करीबी था।
जानें पूरा मामला
गाजियाबाद के कविनगर के आलीशान कोठी में फर्जी दूतावास चलाया जा रहा था। यहाँ हर्षवर्धन नाम का व्यक्ति खुद को वेस्ट आर्कटिका, सबोरगा, पोल्विया और लोडोनिया जैसे देशों का राजदूत बताता था। जबकि इन देशों का कोई अस्तित्व ही नहीं है। उसका असली काम सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को विदेशों में नौकरी दिलाने के बहाने ठगी करना था।
23 जुलाई 2025 को UP STF की नोएडा टीम ने हर्षवर्धन की कोठी पर छापेमारी की। उसके पास से 4 डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी लग्जरी गाड़ियाँ, 12 फर्जी पासपोर्ट और विदेश मंत्रालय की नकली मुहरे बरामद की गई हैं। डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी चार लग्जरी गाड़ियाँ, दो पैनकार्ड, कई देशों और कंपनियों के 34 मुहरें, दो प्रेस कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा 44.7 लाख रुपए नगद और कई फॉरेन कंरसी भी उसके पास से बरामद हुईं।
फर्जी दूतावास से मिली 4 लग्जरी गाड़ियों में से 3 एक्सपायर
हर्षवर्धन की कोठी से चार लग्जरी गाड़ियाँ STF ने हिरासत में ली हैं। गाड़ियों की जाँच में पता लगा कि मर्सिडीज 19 साल पुरानी है तो 2 हुंडई सोनाटा कार 16 और 17 साल पुरानी हैं। इनकी फिटनेस भी खत्म हो चुकी है। जबकि हुंडई गेट्ज 5 साल पुरानी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ACP कविनगर भास्कर वर्मा ने बताया कि चारों गाड़ियों में से तीन एक्सपायर हो चुकी हैं। असली नंबर प्लेट न होने के चलते पुलिस चेकिंग में पकड़ी नहीं गईं। हर लग्जरी गाड़ियों पर विदेशी झंडे और नंबर प्लेट से पुलिस भी धोखा खा गई।
इसके अलावा हर्षवर्धन ने पूछताछ में बताया कि मर्सिडीज उसके ससुर के नाम पर है, जो कि उसे गिफ्ट में मिली है। जबकि एक हुंडई सोनाटा उसकी पत्नी डिंपल जैन के नाम पर है और दूसरी उनके साले के नाम पर है। केवल हुंडई गेट्ज ही हर्षवर्धन के नाम पर है।