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कभी तम्बाकू की पुड़िया के नाम पर हमला, कभी अश्लीलता के नाम पर हत्या… निहंगों की मॉरल पुलिसिंग का शिकार हुई एक और महिला: अब है सुधार की जरूरत


कमल कौर

पंजाब के भटिंडा में हाल ही में एक इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर कमल कौर भाभी की हत्या कर दी गई। कमल कौर भाभी की लाश एक गाड़ी में खून से लथपथ अवस्था में मिली। पुलिस ने मामले में जाँच की तो पता चला कि कमल कौर की हत्या निहंग सिखों ने की थी। 

इस मामले में पुलिस ने दो निहंग सिखों को गिरफ्तार किया। बताया गया कि एक निहंग अब भी फरार है। हत्या करने वाले इन निहंग सिखों के नाम निमरनजीत सिंह और जसप्रीत सिंह हैं। मामले में फरार चल रहे अमृतपाल सिंह की तलाश जारी है। वह इस हत्या का मुख्य आरोपित है। 

गिरफ्तार निहंगों ने बताया है कि वह कमल कौर भाभी के कथित अश्लील कंटेंट बनाने को लेकर नाराज थे। उन्होंने बताया कि वह पहले भी कंचन को समझा चुके थे लेकिन नहीं मानने पर उन्होंने एक विज्ञापन देने के बहाने कमल कौर को बुलाया और एक गैराज में ले जाकर हत्या कर दी। 

उन्होंने बताया कि कमल कौर पंजाब के युवाओं को गलत रास्ते पर ले जा रही थी। इस मामले में फरार निहंग ने और भी भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा है कि अभी वह पकड़ा नहीं गया है और गिरफ्तारी से पहले 6-7 ऐसे ही इन्फ्लुएंसरों को मार कर जेल जाएगा। 

उसने चेतावनी भी दी है कि अगर 24 घंटे के भीतर अश्लील कंटेंट नहीं हटा तो उसकी गाड़ी ऐसा कंटेंट बनाने वालों के शहर में होगी। उसने इससे पहले 15 मिनट का एक वीडियो भी कमल कौर भाभी की हत्या का कारण बताते हुए रिलीज की थी। 

इस पूरे मामले ने एक बार फिर पंजाब में नैतिकता के आधार पर होने वाली हत्याओं और निहंगों के कानून तोड़ने की बहस को जन्म दे दिया है। बीते कुछ सालों में निहंग लगातार कई बार ऐसी हिंसक वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। अधिकांश हत्याओं के पीछे ऐसा कोई कथित समाज सुधारक टाइप कारण होता है। 

यह कोई अकेला ऐसा मामला नहीं है जब किसी इन्फ्लुएंसर को निहंग धमका रहे हो। पंजाब की एक और इन्फ्लुएंसर प्रीत जट्टी ने भी एक ऐसा ही वीडियो साझा किया है। उसे भी यही अमृतपाल सिंह लगातार धमकियां दे रहा है। प्रीत जट्टी को ज्योतिष संबंधित एक वीडियो बनाने पर माफी माँगने को मजबूर किया गया है। 

अब उसे विदेशी नंबरों से काम करके गानों पर भी वीडियो ना बनाने की धमकी दी जा रही है। प्रीत जट्टी ने इस मामले में एक FIR दर्ज की है। जहां यह एक ओर सीधे तौर पर महिलाओं की स्वतंत्रता पर हमले का मामला है, तो वहीं इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अपने आप को निहंग बताने वाले इन लोगों ने कैसा डर का साम्राज्य स्थापित कर लिया है। 

‘पंजाब के युवा को सुधारने’ और ‘अश्लीलता ना फैलाने’ के नाम पर यह कोई पहली बार मोरल पुलिसिंग की घटना नहीं हुई है। इससे पहले अगस्त, 2023 में एक लड़की के नाईट आउट पर जाने पर अमृतसर में उसके पिता ने ही उसकी हत्या कर दी थी। यह शख्स भी एक निहंग था।

उसने सबक सिखाने के नाम पर इस लड़की की लाश को पूरे गाँव में बाइक से बाँध कर घुमाया भी था। उसने हत्या के बाद कहा था कि यह बाकी लड़कियों के लिए एक सीख होगी। उसे हत्या का कोई भी पश्चाताप नहीं था। यह भी एक ऐसा मामला था जहाँ महिलाओं की आजादी पर हमला तो हुआ ही, वह भी इतनी बर्बरता से।

जुलाई, 2024 में एक बिहारी शख्स पर निहंगों ने सिर्फ इसलिए हमला कर दिया था क्योंकि कथित तौर पर उसके पास तम्बाकू की पुड़िया थी। यह शख्स गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसकी हड्डी पसली टूट गई थीं। यह घटना अमृतसर के हरमंदिर साहिब के पास हुई थी।

इसके अलावा एक पंजाबी सीरियल उडारिया की शूटिंग के सेट पर भी निहंगों ने खूब उत्पात मचाया था। जुलाई, 2024 में यह घटना हुई थी। निहंग इस बात से नाराज थे कि इस सीरियल में सिख विवाह का शूट किया जाना था। निहंगों ने इसे बेअदबी के नाम पर सही ठहराया था।

यह बात एकदम स्पष्ट है कि अश्लीलता की समाज में जगह नहीं होनी चाहिए, ना ही किसी धर्म के आदर्शों की बेअदबी होनी चाहिए। लेकिन इन सबके लिए हत्या और तलवारों से हमले कतई जायज नहीं हैं। पाकिस्तान में बेअदबी के नाम पर हमले जघन्य हत्याएँ देखी हैं।

कमलेश तिवारी की भारत में बेअदबी के नाम पर हत्या की गई। निहंग सिख अगर किसी बेअदबी या अश्लीलता से नाराज हैं तो उन्हें कानूनी रास्ता अख्तियार करना चाहिए ना कि किसी की हत्या करके वीडियो बनाने चाहिए। हत्या कर देना और फिर उसे समाजसुधार के नाम पर जायज ठहराना तालिबानी सोच जैसा है।

कई मौकों पर निहंगों ने पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया है। एक पुलिसकर्मी का हाथ एक निहंग ने काट दिया था। विडंबना यह है कि कई मामलों में निहंगों के इन कृत्यों को लोग सही ठहराते हैं। हत्या के बाद उन पर फूलों की बरसात की जाती है।

निहंगों पर सिख धर्म की रक्षा का भार है, वह सिखों का लड़ाका समूह हैं, लेकिन पंजाब से लेकर दिल्ली तक ऐसी घटनाएँ उनको लेकर नकारात्मक विचार बनाती हैं। यदि जल्द ही सिखों के भीतर से ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने की कोशिश नहीं हुई तो यह विकराल रूप ले लेगी।



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