बसंत पंचमी पर भोजशाला में जुम्मे की नमाज पर रोक की माँग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल, दिनभर माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना की माँगी गई इजाजत


मध्यप्रदेश के धार में भोजशाला को लेकर विवाद में अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल की है। इस याचिका में कहा गया है कि 23 जनवरी 2026 को शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी का त्यौहार है। इस दिन जुम्मा भी है। इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज से रोकने और सिर्फ हिंदुओं को ही माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना दिनभर करने देने की इजाजत माँगी गई है।

ASI के 7 अप्रैल 2023 को जारी आदेश के मुताबिक जहाँ भोजशाला में हिंदुओं को मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा की इजाजत है, वही मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार को 1 से 3 बजे के बीच नमाज पढ़ सकते है। लेकिन ASI के इस आदेश में यह साफ नहीं है कि अगर बंसत पंचमी शुक्रवार के दिन होगी तो क्या होगा।

अधिवक्ता जैन के दाखिल किए गए याचिका में कहा गया है कि माँ सरस्वती का यह मंदिर परमार राजा भोज ने 11 वीं शताब्दी में बनाया था। कोर्ट के आदेश के मुताबिक हुए सर्वे में भी यहाँ मंदिर होने की पुष्टि हुई है। ऐसे में ASI का आदेश वैसे ही अपने आप में गलत है, लेकिन बंसत पंचमी का दिन तो माँ सरस्वती की पूजा- अर्चना का दिन है। उस दिन हवन, पूजा और महाआरती जैसे आवश्यक धार्मिक कर्म संकल्प से पूर्णाहुति तक बिना किसी व्यवधान के होने चाहिए।

गर्भगृह की पवित्रता कायम रहनी चाहिए।ऐसे में उस दिन नमाज की इजाजत नहीं होनी चाहिए। इसलिए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील की गई है। ये मामला आस्था, संवैधानिक अधिकार और कानून व्यवस्था तीनों से जुड़ा हुआ है।



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