पहले पढ़ी नमाज, फिर उमर ने तैयार किया ‘मौत का सेटअप’: 17 घंटे की प्लानिंग के बाद किया लाल किला ब्लास्ट, डॉक्टर के कोट में दिखी आतंकी की तस्वीर


दिल्ली ब्लास्ट आतंकी उमर

दिल्ली के लाल किला में सोमवार (10 नवंबर 2025) शाम को हुए भीषण कार ब्लास्ट को अब तक के सबसे खतरनाक आतंकी हमलों में से एक माना जा रहा है। इस धमाके में 13 लोगों की मौके पर मौत हो गई थी। जाँच आगे बढ़ने के साथ ही, मुख्य आरोपित आतंकी डॉ उमर मोहम्मद की एक नई तस्वीर वायरल हो रही है। जाँच में खुलासा हुआ है कि दिल्ली में दाखिल होने के बाद, उमर तुर्कमान गेट स्थित एक दरगाह पहुँचा और नमाज अदा की। इसके बाद, वह लाल किला के समीप सुनहरी बाग पार्किंग में पहुँचा, जहाँ उसने विस्फोटक तंत्र को सक्रिय किया। अब तक की जाँच में उमर की पूरी गतिविधियों, विस्फोटक तैयार करने की तकनीक और उसके नेटवर्क पर कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।

नूहँ-मेवात से दिल्ली तक का 17 घंटे का सफर

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, जाँच में मिले CCTV फुटेज से पता चलता है कि आतंकी उमर ने हमले को अंजाम देने से 17 घंटे पहले ही अपनी प्लानिंग शुरू कर दी थी। देर रात करीब डेढ़ बजे, उसकी कार पहली बार हरियाणा के नूहँ-मेवात रूट पर तेज गति से गुजरती हुई कैमरे में कैद हुई।

अगली सुबह 8 बजे, वह बदरपुर बॉर्डर से दिल्ली में दाखिल हुआ। इस समय कार की पिछली सीट पर विस्फोटक सामग्री से भरा एक बड़ा काला-सफेद बैग स्पष्ट दिख रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान विस्फोटक निष्क्रिय था, इसलिए यात्रा सामान्य रही।

पार्किंग में तैयार हुआ ‘मौत का तंत्र’

दिल्ली में दाखिल होने के बाद, उमर तुर्कमान गेट स्थित एक दरगाह पहुँचा और नमाज अदा की। वहाँ से निकलकर वह लाल किला के समीप सुनहरी बाग पार्किंग में पहुँचा और तीन घंटे से अधिक समय तक कार में ही बैठा रहा। जाँच एजेंसियों का मानना है कि उमर ने इसी समय डेटोनेटर, फ्यूज और बैटरी सप्लाई को विस्फोटक सामग्री से जोड़कर पूरे तंत्र को सक्रिय किया।

फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, कार में रखा विस्फोटक पोटेशियम क्लोरेट और अमोनियम नाइट्रेट का मिश्रण था, जो हाई-इंटेंसिटी ब्लास्ट पैदा करता है। कार के बोनट का ढीला होना और उसे रस्सी से बाँधकर रखना संकेत देता है कि विस्फोटक को उसी स्थान पर सक्रिय किया गया था और वायरिंग ठीक से फिट नहीं हो रही थी।

धमाके की भयावह तीव्रता

विस्फोट की तीव्रता भयानक थी, जिसके परिणामस्वरूप शवों के टुकड़े 300 से 400 मीटर दूर तक पाए गए। जाँच अधिकारियों के अनुसार, उमर ने लिक्विड डेटोनेटर का उपयोग किया होगा, जिसे बैटरी सप्लाई से सक्रिय किया जाता है। फोरेंसिक अधिकारियों का अनुमान है कि विस्फोटक के कार के ईंधन (पेट्रोल/CNG) के संपर्क में आने से यह अत्यधिक अग्नि-गोलक जैसा प्रभाव पैदा हुआ। अधिकांश घायलों की सुनने की क्षमता प्रभावित होना भी धमाके की भयावहता को दर्शाता है।

डॉक्टर मॉड्यूल और विदेश कनेक्शन

इस हमले से डॉक्टरों के एक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तहत अब तक 8 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जाँच में सामने आया है कि मॉड्यूल के कुछ लोग दुबई और लंदन से लगातार संपर्क में थे। डॉ आदिल के भाई के दुबई में होने की जानकारी मिलने के बाद एजेंसियों ने विदेश में मौजूद सपोर्ट सिस्टम की जाँच तेज कर दी है।

डॉ शाहीना सईद के विदेश भागने की तैयारी में होने की भी आशंका है, क्योंकि अल-फलाह यूनिवर्सिटी में उसके नाम से वीजा वेरिफिकेशन की फोटो मिली थी। यह पूरी जाँच स्पष्ट करती है कि आतंकी उमर एक उच्च-प्रशिक्षित मॉड्यूल के साथ काम कर रहा था और उसने अत्यंत योजनाबद्ध तरीके से हमले को अंजाम दिया। यह नेटवर्क अब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुका है।

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