‘ऑपरेशन महादेव’ में मारे गए लश्कर आतंकियों के पास से मिले पाकिस्तानी पहचान पत्र-हथियार-कम्युनिकेशन सेट, 3 साल पहले देश में घुसे: गृहमंत्री ने खुद लिया अपडेट, पहलगाम हमले में शामिल थे सुलेमान-हमजा-जिबरान


जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के तीन पाकिस्तानी आतंकियों को सुरक्षा बलों ने शुक्रवार, 28 जुलाई 2025 को ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत मार गिराया।

मुठभेड़ के बाद मौके से मोबाइल फोन, दो लोरा कम्युनिकेशन सेट, पाकिस्तानी नादरा कार्ड की तस्वीरें, आधार कार्ड, गोप्रो हार्नेस, सोलर चार्जर, सूखा राशन और अन्य संदिग्ध सामान बरामद हुआ। ये सभी चीजें आतंकियों की गहरी साजिश और पाकिस्तान से सीधा संबंध होने के पक्के सबूत मानी जा रही हैं।

बताया गया है कि ये तीनों आतंकी तीन साल पहले भारत में घुसपैठ कर चुके थे और लंबे समय से बड़े हमले की योजना बना रहे थे। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई ने न केवल आतंकियों का अंत किया, बल्कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करने की दिशा में एक बड़ी सफलता भी हासिल की।

जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यह पक्का करना चाहते थे कि ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीनों आतंकी वही हैं जो पहलगाम हमले में शामिल थे, इसी वजह से उन्होंने सोमवार रातभर जागकर ऑपरेशन की जानकारी लेते रहे।

वे चंडीगढ़ फॉरेंसिक साइंस लैब के वैज्ञानिकों से फोन और वीडियो कॉल के जरिए लगातार संपर्क में रहे, क्योंकि वहाँ पर ही ऑपरेशन महादेव के बाद बरामद हुई बंदूकों और गोलियों का मिलान किया जा रहा था।

दाचीगाम में पनाह के मिले सबूत

रिपोर्ट के अनुसार, तीनों आतंकवादी पहलगाम हत्याकांड के बाद श्रीनगर के बाहरी इलाके में स्थित दाचीगाम के ऊपरी जंगलों में छिपे हुए थे। यह क्षेत्र दो दिशाओं से निकलने के रास्तों के चलते रणनीतिक रूप से अहम है।

एक अनंतनाग के पहलगाम से जुड़ता है और दूसरा गांदरबल जिले से। सुरक्षा बलों ने इनकी वायरलेस गतिविधियों को 22 मई से ट्रैक करना शुरू किया और 22 जुलाई को अंतिम लोकेशन पकड़कर ऑपरेशन शुरू कर दिया।

राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO) अब बरामद हुए उपकरणों की तकनीकी जाँच कर रहा है ताकि पाकिस्तान से मिले सैन्य समर्थन और स्थानीय संपर्कों की जानकारी जुटाई जा सके।

तीन साल की साजिश, दो ग्रुप सक्रिय

मार गिराए गए आतंकियों में सुलेमान उर्फ फैजल जट्ट, हमजा अफगानी और जिबरान शामिल थे। ये तीनों 2021 में ही भारत में घुसपैठ कर चुके थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल ये दो समूहों में बँट गए थे।

सुलेमान ने एक ग्रुप की अगुवाई की, जबकि दूसरे ग्रुप की कमान मूसा नामक आतंकी के पास थी। सुलेमान गांदरबल जिले के गगनगीर में सात लोगों की हत्या में भी शामिल था। पहलगाम हमले के लिए इन आतंकियों ने कई महीनों तक जंगल में रहकर ट्रेनिंग ली और हर गतिविधि को सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया।

सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इन आतंकियों के साथ जम्मू क्षेत्र में सक्रिय लश्कर के एक और ग्रुप का भी कनेक्शन हो सकता है, जो हाल के महीनों में कई हमले कर चुका है। मोबाइल और लोरा सेट से मिले डेटा के आधार पर और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।

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