J&K में चिनाब नदी पर 1856 मेगावट का पावर प्रोजेक्ट होगा तैयार, ‘सिंधु नदी’ का सारा जल भारत के काम आएगा: पाकिस्तान को मोदी सरकार ने फिर दिया झटका


सावलकोट जलविद्युत परियोजना

भारत सरकार ने ‘सिंधु जल संधि’ रोकने के बाद एक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के सिद्धू गाँव के पास चिनाब नदी पर 1,856 मेगावाट क्षमता वाले सावलकोट जलविद्युत परियोजना के निर्माण की शुरुआत कर दी है। इस परियोजना पर पहली बार 1960 में विचार किया गया था।

जानकारी के अनुसार, भारत द्वारा 22 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद विकास संबंधी यह फैसला पाकिस्तान के लिए एक बड़ी समस्या का कारण हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को रोकने के लिए भारत को जल भंडारण क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। कहा जा रहा है कि सावलकोट परियोजना पूरी होने के बाद भारत सिंधु नदी के पानी का बेहतर इस्तेमाल कर पाएगा।

यह परियोजना ऊपर की ओर बगलीहार डैम और नीचे सालाल डैम के बीच आने वाले चिनाब नदी के हिस्से पर बनाई जा रही है। यह परियोजना रामबन और उधमपुर जिलों में फैली हुई है और जम्मू और श्रीनगर दोनों से लगभग 120-130 किलोमीटर की दूरी पर है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट में एक ‘रोलर कॉम्पैक्टेड कंक्रीट ग्रैविटी डैम’ बनेगा, जिसकी ऊँचाई 192.5 मीटर होगी। नदी का बहाव मोड़ने के लिए घोड़े की नाल के आकार की तीन सुरंगें बनाई जाएँगी, जिनकी लंबाई क्रमशः 965 मीटर, 1130 मीटर और 1280 मीटर होगी। यह नदी का रुख मोड़ने में सक्षम होगा।

परियोजना के तहत डैम के बाएँ किनारे पर एक भूमिगत पावर हाउस बनेगा, जिसमें 225 मेगावाट के 8 यूनिट होंगे यानी कुल मिलाकर इसकी क्षमता 1,800 मेगावाट होगी। इसके अलावा, पर्यावरणीय जल प्रवाह के लिए छोड़े गए पानी से 56 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली बनाई जाएगी, जिसके बाद इसकी क्षमता 1856 मेगावाट हो जाएगी।

बता दें कि बाढ़ नियंत्रण के लिए भी योजना तैयार की गई है। योजना के मुताबिक, अन्य मौसम में 2,977 क्यूमेक और मॉनसून में 9,292 क्यूमेक पानी मोड़ने की क्षमता होगी। परियोजना के तहत कार्यों की देखरेख की जिम्मेदारी राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (NHPC) को सौंपी गई है।

यह पूरी परियोजना ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ (नदी प्रवाह आधारित) सिस्टम पर आधारित है। सावलकोट जल विद्युत परियोजना से प्रतिवर्ष 7,994.73 मिलियन यूनिट ऊर्जा उत्पन्न होने की उम्मीद है, जिससे ऊर्जा की कमी वाले उत्तरी ग्रिड में बिजली की आपूर्ति को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही क्षेत्र में औद्योगिक विकास में भी सहायता मिलेगी।

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