जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन SIO की मेहमान बनीं ‘ट्विटर हिस्टोरियन’ रुचिका: मंच पाकर किया हिंदुत्व को किया बदनाम, इस्लामी आक्रांताओं का बचाव करने में कोई कसर नहीं छोड़ी


ट्विटर हिस्टोरियन के नाम से मशहूर और विवादों में घिरी रुचिका शर्मा को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में बोलने के लिए गुरुवार  (24 जुलाई 2025) को बुलाया गया। यह कार्यक्रम स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) की ओर से आयोजित किया गया था, जो कि कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ‘जमात-ए-इस्लामी’ की छात्र इकाई है।

SIO का मुख्य उद्देश्य इस्लाम का प्रचार और धर्मांतरण को बढ़ावा देना माना जाता है। यह कार्यक्रम उनके शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (CERT) द्वारा आयोजित किया गया।

जिसमें रुचिका शर्मा को हिंदुत्व और भारतीय इतिहास को लेकर भ्रामक और झूठी जानकारियाँ फैलाने के लिए आमंत्रित किया गया था। रुचिका पर पहले भी आरोप लग चुके हैं कि वे भारत में इस्लामी आक्रमणकारियों द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों को नजरअंदाज या छिपाने का प्रयास करती रही हैं।

हिंदू धर्म को लेकर झूठ फैलाने और इस्लामी कट्टरता को कमतर दिखाने के लिए पहचानी जाने वाली ‘ट्विटर हिस्टोरियन’ रुचिका शर्मा को अब जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा खुलकर समर्थन दे रही है।

SIO ने रुचिका को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में बोलने के लिए बुलाया। ये वही संगठन है जिसने सितंबर 2022 में मोदी सरकार की ओर से बैन लगाए गए इस्लामिक आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का खुलकर बचाव किया था।

SIO ने उस समय ट्वीट करके कहा था, “PFI के खिलाफ देशभर में की गई कार्रवाई सरकार द्वारा असहमति की आवाज को दबाने के लिए जाँच एजेंसियों के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वे इस सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाएँ।”

पिछले साल, स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) ने हमास के आतंकवादी नेता इस्माइल हानिया की तारीफ की थी। इतना ही नहीं, केरल में इस संगठन से जुड़े लोगों ने हमास के एक और कुख्यात आतंकी याह्या सिनवार के लिए जनाजे की नमाज भी अदा की थी।

महाराष्ट्र में स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) के अध्यक्ष सलमान अहमद को फरवरी 2020 में, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 109 (अपराध के लिए उकसाना), 153 (दंगे भड़काने की नीयत से उकसाना) और 34 (साझा इरादे से किया गया अपराध) के तहत केस दर्ज किया गया था।

जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र शाखा SIO के कट्टरपंथी सोच के बावजूद रुचिका शर्मा को इस संगठन से जुड़ने में कोई हिचकिचाहट नहीं हुई। ‘ट्विटर हिस्टोरियन’ के नाम से जानी जाने वाली रुचिका, इस्लामी आक्रमणकारियों की क्रूरता को छिपाने और हिंदू धर्म को गलत तरीके से दिखाने में इस संगठन के लिए एक आसान और उपयोगी चेहरा बन गईं।

रुचिका शर्मा और कैसे इस विकृत कलाकार ने प्रसिद्धि पाई

पिछले कुछ वर्षों में, रुचिका शर्मा अक्सर गलत कारणों से सुर्खियों में रही हैं। उन्होंने कई बार सनातन धर्म और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों का मजाक उड़ाने और उन्हें गलत ढंग से पेश करने की कोशिश की है।

उन्हें अपने विचारों को इतिहास के नाम पर भोले-भाले दर्शकों के सामने रखने का शौक है। रुचिका JNU की पूर्व छात्रा हैं और ‘आईशैडो एंड इतिहास विद डॉ. रुचिका शर्मा’ नाम से एक यूट्यूब चैनल भी चलाती हैं।

एक बार उनके द्वारा लिखा गया एक लेख को स्क्रॉल वेबसाइट ने प्रकाशित किया था, पर उनके लिखे झूठे दावों के कारण बाद में उसे हटा दिया गया था। 2017 में स्क्रॉल ने उनका एक लेख प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था इतिहास का पाठ: पद्मावती को एक राजपूत राजकुमार ने आत्मदाह के लिए मजबूर किया था, अलाउद्दीन खिलजी ने नहीं।’  

इस लेख में दावा किया गया था कि रानी पद्मिनी, रावल रतन सेन की हार और मौत के बाद, कुंभलनेर के राजा देवपाल द्वारा बलात्कार की आशंका से डरकर जौहर (आक्रमणकारियों के हाथों अपमान से बचने के लिए किया गया आत्मदाह) करने पर मजबूर हुई थीं।

यह लेख बाद में हटा दिया गया क्योंकि इसमें इतिहास को लेकर गंभीर गलतियाँ थीं। लेख में झूठे तथ्य पेश किए गए थे, जिससे स्क्रॉल की काफी आलोचना हुई और मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप भी लगा। रुचिका शर्मा खुले तौर पर मुगल तानाशाह औरंगजेब और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की प्रशंसा करती हैं।

वे अक्सर अपने ट्वीट्स और इंटरव्यूज में इन दोनों की कथित उदारता की तारीफ करती हैं, जो आमतौर पर वामपंथी विचारधारा से सहमत मीडिया संस्थानों द्वारा बढ़ावा दी जाती है। हालाँकि, ऐतिहासिक रूप से यह स्पष्ट है कि औरंगजेब और टीपू सुल्तान दोनों ने हिंदुओं, उनके मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर अत्याचार किए। उन्हें मारा, अपंग किया और लूटा।

इसके बावजूद, रुचिका शर्मा इन शासकों का लगातार महिमामंडन और मानवीकरण करती हैं, जिनका इतिहास हिंदुओं के खिलाफ नरसंहार, जबरन धर्मांतरण, जजिया कर (गैर-मुसलमानों पर टैक्स) लगाने और धार्मिक कट्टरता से भरा हुआ है।



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