बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार ने बुधवार (23 जुलाई 2025) को एक नया अध्यादेश जारी किया है। मोहम्मद यूनुस की सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को का विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार इस अध्यादेश के जरिए खत्म कर दिया है।
इस अध्यादेश के तहत, अगर कोई सरकारी कर्मचारी हड़ताल करता है तो उसे नौकरी से जबरन सेवानिवृत्त किया जा सकता है और साथ ही पद या वेतन में भी कटौती की जा सकती है।
यह बदलाव 2018 के सरकारी सेवा कानून में संशोधन के रूप में किया गया है। मोहम्मद यूनुस की सरकार अब सरकारी कर्मचारियों को विरोध करने से रोक रही है, जो बांग्लादेश में लोकतंत्र के कमजोर होने का संकेत है।
मोहम्मद यूनुस की सरकार ने छात्रों की भी दबाई आवाज
बांग्लादेश के माध्यमिक और उच्च शिक्षा निदेशालय ने इस साल 2 जनवरी को एक नोटिस जारी किया था। इसमें साफ कहा गया कि मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के खिलाफ गलत खबरें फैलाने और दुष्प्रचार करने वाले छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निदेशालय ने सभी अधिकारियों को सतर्क रहने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि छात्र यूनुस सरकार के खिलाफ झूठी जानकारी, अफवाहें या दुष्प्रचार से वह प्रभावित न हों। साथ ही, छात्रों को भड़काऊ गतिविधियों में शामिल होने से रोकने के लिए भी आदेश दिया गया था।
माध्यमिक और उच्च शिक्षा निदेशालय ने साफ कहा था कि अगर कोई शैक्षणिक संस्थान या छात्र गलत जानकारी, दुष्प्रचार या अफवाहें फैलाते हैं तो उच्च अधिकारियों को तुरंत इसकी जानकारी दी जाए।
देखने में यह नोटिस गलत सूचना रोकने का कदम लग सकता है, लेकिन असल में यह आलोचनाओं को दबाने और उन छात्रों को डराने का तरीका है जो पहले शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन कर चुके हैं।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के खिलाफ किसी भी असहमति को आसानी से दुष्प्रचार माना जा सकता है और मुहम्मद यूनुस की आलोचना करने वाले छात्रों को अफवाह फैलाने के आरोप में निशाना बनाया जा सकता है। अगर शैक्षणिक संस्थानों को इन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की पूरी छूट मिल गई, तो उन्हें धमकाया जाएगा और मुंह बंद रखने को मजबूर किया जाएगा।