यमन के हूती विद्रोहियों ने 6 जुलाई, 2025 को लाल सागर में मैजिक सीज नाम के एक बड़े जहाज को निशाना बनाया। इसके बाद उन्होंने एटरनिटी जहाज को भी निशाना बनाया। हूती विद्रोहियों ने इसका वीडियो भी जारी किया है। सामने आया है कि दोनों जहाज इन हमलों के बाद डूब गए।
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Yemeni Forces released footage of raiding and blowing up the bulk carrier MAGIC SEAS for violating the blockade imposed on Israel pic.twitter.com/aBsTSugmpl— Iran Observer (@IranObserver0) July 8, 2025
हूतियों ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि जहाज मैजिक सीज इजरायल पर लगाई गई उनकी नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहा था। हूतियों ने जहाज पर ड्रोन, मिसाइल, रॉकेट-लॉन्चर आदि से हमला किया था, यही वजह है कि थोड़ी ही देर में एक भीषण धमाके के बाद जहाज दो टुकड़ों में टूट गया और जल्दी ही पूरी तरह से डूब गया। यूरोपियन यूनियन के नौसैनिक मिशन ‘ऑपरेशन एस्पाइड्स’ के अनुसार इस हमले में 3 नाविकों की मौत हुई है और दो लोग घायल हुए हैं। बाकियों की तलाश जारी है।
हूतियों के इस हमले के बाद लाल सागर के महत्व और इस पर नियंत्रण को लेकर बहस तेज हो गई है। लाल सागर इजरायल और हमास के बीच संघर्ष चालू होने के बाद से विवाद का केंद्र बिंदु रहा है और यहाँ होने वाली कोई भी घटना पूरे विश्व के तेल बाजार को प्रभावित करती है।
लाल सागर : हिंद महासागर का समुद्री प्रवेश द्वार
लाल सागर को एरिथ्रियन सागर के नाम से भी जाना जाता है। यह अफ्रीका और एशिया के बीच में स्थित है। यह हिंद महासागर का समुद्री प्रवेश द्वार है। लाल सागर, स्वेज नहर के जरिए यूरोप के भूमध्य सागर से जुड़ता है। इसी रास्ते से यूरोप और एशिया के देशों के बीच समुद्र के जरिए व्यापार भी होता है।
इसके एक तरफ अफ्रीका के मिस्र, सूडान, इरिट्रिया और जिबूती देश हैं, वहीं दूसरी तरफ एशिया के सऊदी अरब और यमन देश स्थित हैं। जानकारी के अनुसार इसे विश्व का सबसे खारा सागर माना जाता है, क्योंकि अन्य समुद्र और महासागरों के मुकाबले इसमें सबसे अधिक नमक पाया जाता है। यहाँ
बहुत अधिक गर्मी की वजह से लाल सागर का पानी लगातार उड़ता रहता है इसलिए इसमें नमक की मात्रा अधिक ही रहती है। रिपोर्ट्स का मानें तो जहाँ विश्व के अन्य महासागरों में अधिकतम 35 फीसदी नमक होता है, वहीं लाल सागर में नमक की मात्रा 40 फीसदी होती है।
व्यापारिक दृष्टि से भी अहम लाल सागर
रेड सी (लाल सागर) क्षेत्र में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर पूरी दुनिया के व्यापार पर पड़ रहा है। यह इलाका पहले भी कई बार अस्थिरता और संकट का केंद्र रहा है, इसलिए संभव है कि भविष्य में भी यहाँ से व्यापार में रुकावटें आती रहेंगी।
लाल सागर, गल्फ ऑफ एडन और स्वेज नहर के बीच का रास्ता एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला एक अहम समुद्री मार्ग है। आज के समय में इसी रास्ते से होकर करीब 12% वैश्विक व्यापार और दुनिया के लगभग 30% कंटेनर जहाज गुजरते हैं। यदि इस सागर में कोई व्यवधान पैदा होता है तो दुनिया भर का व्यापार प्रभावित होता है।
जब भी इस मार्ग में कोई परेशानी आती है, चाहे वह युद्ध हो, राजनीतिक तनाव, प्राकृतिक आपदा या कोई और वजह तो उसका सीधा असर दुनियाभर की आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ता है। केवल रोजमर्रा की चीजें ही नहीं, बल्कि तेल और LNG जैसी जरूरी ऊर्जा सामग्री का निर्यात भी इससे बुरी तरह प्रभावित होता है।
लाल सागर का व्यापार में महत्व कोई नया नहीं है। प्राचीन मिस्र के समय से यह क्षेत्र व्यापार, संस्कृति और राजनीति के लिए एक अहम केंद्र रहा है। अफ्रीकी, इस्लामी, ओटोमन और यूरोपीय ताकतों ने कई पीढ़ियों तक इस रास्ते को नियंत्रित कर व्यापार और विस्तार के लिए इस्तेमाल किया है।
यही वजह है कि रेड सी आज भी दुनिया के सबसे रणनीतिक और संवेदनशील व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। हर बार व्यापार में रुकावट का कारण युद्ध या संघर्ष ही नहीं होता। साल 2021 में इसका एक बड़ा उदाहरण देखने को मिला।
उस समय स्वेज नहर में रोजाना औसतन 55 से ज्यादा जहाज गुजरते थे और हर दिन लगभग 11 से 16 बार आवाजाही होती थी। उसी साल एक बड़ा कंटेनर जहाज ‘एवर गिवन’ नहर में तिरछा फँस गया था, जिससे पूरे मार्ग का ट्रैफिक छह दिनों तक पूरी तरह रुक गया। इसके चलते शिपिंग कम्पनियों को भारी नुकसान हुआ है।
इस घटना ने यह साफ दिखा दिया कि स्वेज नहर वैश्विक व्यापार और शिपिंग के लिए कितनी जरूरी है। जब भी इस तरह की रुकावटें आती हैं, तो इसका असर सिर्फ शिपिंग कंपनियों पर नहीं बल्कि आम लोगों और दुनियाभर के व्यापार पर भी पड़ता है।
खासकर उन लोगों के लिए जो सामान का निर्यात करते हैं, इसका असर तुरंत दिखने लगता है। आज भी कई जहाजों को स्वेज नहर की जगह अफ्रीका के चक्कर लगाकर या किसी और रास्ते से भेजा जा रहा है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है लाल सागर?
लाल सागर भारतीय व्यापार के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्ग की भूमिका निभाता है। भारत के लगभग 50% निर्यात इसी के रास्ते होते हैं। यूरोप को जाने वाला 80% सामान लाल सागर के रास्ते ही जाता है। इसी से अमेरिका को सामान पहुँचाया जाता है।
इसके अलावा भारत को आने वाला लगभग तेल और गैस इसी के रास्ते आता है। इसकी कीमत लगभग ₹2 लाख करोड़ से अधिक है। ऐसे में यह भारत के लिए व्यापारिक और रणनीतिक, दोनों तरीके से जरूरी है। इसके अलावा भारत से जाने वाला माल इस रास्ते के बंद होने से देरी होती है। इससे लगभग 15% तक किराया भी बढ़ता है।
इसके अलावा, लाल सागर भारतीय नौसेना के गश्ती क्षेत्र से कोई विशेष दूर नहीं है। 2024 में भारतीय नौसेना ने ऐसे एक जहाज से क्रू को बचाया था, जिस पर हूतियों ने मिसाइल हमला किया था। इस रास्ते से निकलने वाले भारतीय जहाजों को भी हूती निशाना बना सकते हैं, ऐसे में भारत के लिए सुरक्षा चिंताएँ भी हैं।
कैसे रुकेंगे हूतियों के हमले?
हूतियों के यह हमले बीते लगभग 2 वर्षों से जारी हैं। उनका कहना है कि यह हमले वह हमास के समर्थन में कर रहे हैं। हूतियों को ईरान हथियार सप्लाई करता है। ईरान लाल सागर में अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है और इसीलिए वह हूतियों पर अपना प्रभाव जमाए हुए हैं।
हूतियों को रोकने के लिए अमेरिका और इजरायल लगातार हवाई हमले कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद हूतियों पर हवाई हमले और भी तेज हुए हैं। इजरायल लगातार यमन के भीतर हूतियों के ठिकानों को निशाना बना रहा है। इजरायल ने इस जहाज पर हमले के बाद भी हूतियों को निशाना बनाया है।
इन हमलों के बाद भी हूती यमन में अपना कब्जा जमाए हुए हैं। उनके खिलाफ जमीन पर वर्तमान में कोई बड़ी लड़ाई नहीं चल रही है, इसके चलते उन्हें यमन की सत्ता से नहीं हटाया जा सकता है। यमन में इससे पहले एक बार जमीन पर सेना भेजने का प्रयास भी फेल हो चुका है।